आज गुलाबो विद्यालय नहीं आई थी.. सुपर्णा मैडम ने कक्षा में आते ही गौर किया। उड़ती उड़ती जो खबर उन्हें मिली है.. सच तो नहीं है। उन्होंने नजर घुमाया तो गुलाबो की कोई सहेली भी नहीं दिखी, जो वो कुछ पूछ सके ।कल तक तो गुलाबो स्कूल आई थी।
आज अचानक कैसे.. परेशान सी सुपर्णा मैडम उल्टे पाँव लौट गई।प्रधानाध्यापक से आग्रह किया कि चपरासी को भेजकर वस्तुस्थिति पता करवाएं। प्रधानाध्यापक ने जब ये कहा कि मैडम हमारे यहाँ ऐसा ही होता है.. तब तो मैडम हत्थे से उखड़ गई।
सुपर्णा मैडम – मैं बारह साल की बच्ची के साथ ऐसा होने नहीं दे सकती हूँ। विद्यालय की छुट्टी होते ही वो गुलाबो के घर की ओर भागी।
ये क्या.. इतनी सजावट… पूछने पर मालूम हुआ.. उनकी जानकारी सही थी.. गुलाबो का विवाह होने जा रहा था। लड़के की उम्र चौदह साल.. कैसे लोग हैं.. दुनिया कहाँ से कहाँ चली गई और ये लोग अभी भी बाल विवाह में ही अटके है। समझ से परे है कि आखिर ये लोग कुरीतियों के बंधन में क्यूँ जकड़े हुए हैं?दोनों बच्चों की जिंदगी बर्बाद करने पर तुले हैं।
सुपर्णा तुरंत अंदर जाकर गुलाबो की माँ से मिल अपना परिचय देती है। गुलाबो मैडम को देख हिचकियाँ लेकर रोने लगती है। आगे पढ़ना उसका सपना है.. ये सुपर्णा भी बखूबी समझती है।
सुपर्णा गुलाबो की माँ से शादी रुकवाने की बात करती है।
गुलाबो की माँ – ना.. ऐसे ही होवे है हमरे यहाँ शादी.. हम कुछ नाहीं कर सकत ई में। काटकर रख देत ई के बाप हमरा।
सुपर्णा – और आप चाहती हैं कि कल को आपकी बेटी भी यही कहे अपनी बेटी के लिए। आपकी तरह भय से भरी ज़िंदगी कुढ़ते हुए गुजार दे। अरे पढ़ने दो.. जिम्मेदारी समझने लायक बनने दो दोनों बच्चों को। तभी ये जहाँ.. ये संसार बदल सकेगें..
अवसर ही नहीं मिलेगा तो क्या करेंगे ये बच्चे। भविष्य की धरोहर हैं ये बच्चे.. नहीं तो चोरी चकारी जुआ दारू को अपनी जिंदगी बना लेंगे। फिर क्या कहेंगी बेटी को आप.. कुएँ में डूब कर मर जाने या कोठे पर बैठ जाने। पढ़े लिखे होंगे दोनों तो सही गलत समझ सकेंगे।
जिस तरीके से सुपर्णा ने अपनी बात रखी…गुलाबो की माँ सोचने पर मजबूर हो गई क्यूँकि उसकी तो इच्छा थी बेटी पढ़ लिख कर अपने पैरों पर खड़ी हो जाए।उसकी तरह जिल्लत की जिंदगी ना जिए.. एक नया सूरज उसके पास हो।
मैडम जी ई के बाप नै सुनी ना हमर.. गुलाबो की माँ कहती है।
अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है..औरत अगर चाहे तो क्या नहीं कर सकती है। हो सकता है आपके एक कदम से आपकी बेटी के साथ साथ समाज की और बेटियों को भी जीवन दान मिले। फिर हम तो आपके साथ हैं ही.. सरकार ने भी बाल विवाह पर प्रतिबंध लगाया ही हुआ है तो हमें हर तरह की मदद मिल जाएगी।
गुलाबो की माँ अभी भी ऊहापोह की स्थिति में थी। तभी गुलाबो आकर अपनी माँ के गले लग जार जार रोने लगती है। माँ से कुछ बोल नहीं पाती है.. गुलाबो का इस तरह रोना और सुपर्णा की बातों से विचलित होकर गुलाबो की माँ पूरे आत्मविश्वास से मंडप पर जाकर तुरंत शादी स्थगित करने का फ़ैसला सुना देती है।
नशा करके आई है.. काट के गाड़ दूँ तुझे.. शादी रुकवाएगी.. गुलाबो के पिता उसकी माँ के बाल पकड़ते हुए बोलते हैं।
काट तो आज हम देगी सबको.. नहीं करनी ई शादी..इस उमर में हमरी बिटिया किसी बंधन में ना बधेगी। अखनी से सिरफ कॉपी किताब का बंधन होगा ई पर। जोन के जे मन होइए के लिए..गुलाबो की माँ उसके पिता का हाथ झटकती हुई बोलती है। उसका ये रूप देख कोई कुछ नहीं बोल सका।
सुपर्णा मैडम ने आज ये सिद्ध कर दिया कि प्रत्येक स्त्री के बीच एक अनोखा और अदृश्य बंधन विद्यमान होता है जो कि नारियों को एक दूसरे के लिए लड़ने का भाव देता है और बताता है कि नारी के नारीत्व में बँधा आत्मविश्वास ही हर नारी को सजग कर सकता है साथ ही इस जहां को बदल कर उज्जवल दिवस के संग एक सार्थक निशां भी छोड़ सकता है।
आरती झा”आद्या”(स्वरचित व मौलिक)
दिल्ली