बाबू जी आपके दोनों बेटों के बीच में दरार का कारण आप स्वयं ही हैं। माना आप दोनों बच्चों के सम्माननीय पिता हो और सबके सामने जो कह रहे हो कि मैं अपने दोनों बेटों को बहुत प्यार करता हूं यदि छोटा बेटा बड़े की बुराई भी करता है तो मैं वह भी चुप करके सुन लेता हूं कि कहीं दोनों के बीच में दरार गहरी ना हो जाए और उसके दिए हुए पैसों और उपहार से अपने बड़े बेटे और उसके परिवार की सहायता ही करता हूं।
बाबूजी मैंने आपके दोनों बेटों का बचपन देखा है आपके बड़े बेटे की मेहनत भी देखी है। मैंने देखा है कि आपके दोनों बेटों के बीच में क्यों कि 10 साल का फर्क है तो आप का बड़ा बेटा छोटे बेटे की पेरेंट्स टीचर मीटिंग में भी पहुंच जाता था। इस छोटी सी दुकान को इतना बड़ा शोरूम बनाने के लिए आपका बड़ा बेटा कितना मेहनत करता था। छोटे भाई के द्वारा मांगी गई हर चीज को पूरा करने के लिए वह हमेशा तत्पर रहता था। तब तो आप भी खुशी-खुशी सबके बीच में कहते थे कि बड़ा भाई तो पिता के समान होता है। अब जब आपका दुकान भी शोरूम में बदल गया, आपके बड़े बेटे की बेइंतेहा मेहनत रंग लाई, आपको याद होगा कि अपनी बीमारी के कारण आप तीन-चार साल तक दुकान में भी नहीं आ पाए और आप खुद हैरान हो गए थे कि आप के बड़े बेटे ने घर का और दुकान का काम अकेले ही संभाला था।
लेकिन जैसे ही आपका छोटा बेटा बढ़ा हुआ तो आपने बड़े भाई को पिता के दर्जे से हटाकर दोनों भाइयों को समान बना दिया। आपके छोटे बेटे ने तो मेहनत भी नहीं करी थी फिर भी दुकान का आधा हिस्सा लेकर वह अलग हो गया। आज मेहनत से बनाई हुई उस दुकान को दोबारा से चलाने के लिए और अब खुद के परिवार को चलाने के लिए उसको कितनी मशक्कत करनी पड़ रही है यह आपको नहीं दिख रहा। इसके विपरीत आप कह रहे हैं कि मैं अपने छोटे अमीर बेटे से कुछ भी लेकर बड़े बेटे की सहायता करता हूं। ऐसी सहायता करने की बजाय अगर आपने अपने बड़े बेटे को यह एहसास कराया होता बड़ा भाई पिता समान होता है और इस भाई ने तो पिता वाली जिम्मेदारियां भी निभाई है इसलिए इनका तो सम्मान बनता है तो ज्यादा अच्छा होता। उसे समझाते की कि पिता समान होने के कारण यह उसका अधिकार भी है कि तुम उस के लिए कुछ करो
आपका क्या ख्याल है जैसे कि सारे रिश्ते जरूरत के हैं तो जरूरत के समय में ही क्योंकि बड़ा बेटा जल्दी ही सबल हो जाता है तो उससे जब काम लेना हो तो कहो कि बड़ा भाई पिता के समान होता है और जब छोटे भी बड़े हो जाए तो कहावत ही बदल जाए कि सारे भाइयों का तो समानता का ही रिश्ता होता है कहां तक सही है?