आज सिया के ऊपर दीपक ने जैसे ही हाथ उठाया सिया ने दीपक का हाथ कसकर पकड़ लिया और जोर से झटक दिया, अचानक इस झटके से दीपक वहीं जमीन में गिरते गिरते बचा।वो बड़े आश्चर्य से फटी आंखों से सिया को देख रहा था और सोचने लगा इतनी हिम्मत कहां से आ गई
आज इसमें।दीपक उठा और जाकर नीचे मां से कहने लगा देखो तो मम्मी आज आपकी बहू में न जाने कहां से इतनी हिम्मत आ गई कि मेरा हाथ पकड़कर झटक दिया ।मां बोली तभी तो हम कह रहे थे बेटवा कि बीबी को थोड़ा दबाकर रखो नहीं तो वो सिर पर चढ़कर नाचने लगेगी।
अभी कल ही देखा था हमने पता नहीं कौन लड़का था उससे स्कूटर चलाना सीख रही थी । हां हमने भी देखा था दीपक बोला जब पूछा तो कहने लगी हमारा स्टूडेंट है वहीं सिखा रहा था स्कूटर चलाना।चाल चलन ठीक ना है उसकी मां बोली , हां देखता हूं उसको ।
तीन साल पहले सिया और दीपक की शादी हुई थी ।सिया पढ़ी लिखी थी । मनोविज्ञान से एम ए किया था ।दीपक तीन भाई थे दीपक के पापा गोविंद जी का बिजनेस चलता था उसी में सब साथ साथ काम करते थे ,सबसे छोटा भाई अभी पढ़ रहा था।सिया भी दो बहन और एक भाई जी ।सिया सबसे बड़ी थी घर में और जौनपुर जैसी छोटी जगह से थी ।घर में आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी सिया के पापा स्कूल में मास्टर थे
। किसी ने गोविंद जी के बेटे दीपक का रिश्ता सिया के पापा को बताया तो वो दीपक के घर आए लड़के और घर को देखने । गोविन्द जी का अपना घर था बिजनेस था सबकुछ ठीक था तो सिया के पापा ने रिश्ते के लिए हां कर दी और उन लोगों को भी सिया पसंद आ गई थी।
सिया ब्याहकर ससुराल आ गई। शुरू में कुछ दिनों तक तो ठीक रहा लेकिन फिर दीपक रात को देर से आने लगा और पीकर आता जब सिया पूछती तो गुस्सा करता ।और बस यही सिलसिला चल पड़ा बस रात को देर से पीकर आता और अपनी शारीरिक जरूरतें पूरी करके सो जाता और किसी चीज से सिया से मतलब न रखता। इसी बीच सिया एक बेटी की मां बन गई।अब एक दिन सिया ने दीपक से कुछ पैसे मांगे छोटी बहन की शादी थी तो उसने मना कर दिया क्या जरूरत है पैसे की सबकुछ तो घर में मिल रहा है ।बस खाना कपड़ा ही तो जीवन की जरूरत नहीं होती शादी है कुछ और भी जरूरत हो सकती है ।
जो साड़ी जेवर पास में है वही पहन लेना और पैसे देने से मना कर दिया।इस बीच काफी कहा सुनी हो गई सिया और दीपक में । अच्छा अच्छा बहस न कर जा यहां से लेकिन सिया अड गई कि मुझे पैसे चाहिए ही । उसकी बात को अनसुना करके दीपक वहां से चला गया।रात को जब दीपक घर आया
तो सिया के नजदीक जाने की कोशिश करने लगा तो सिया ने मना कर दिया तो दीपक ने अपनी तौहीन समझ एक ज़ोर दार थप्पड़ रसीद कर दिया। सिया तिलमिला उठी।अब अक्सर ही ऐसा हो जाता कोई बात होती तो दीपक थप्पड़ मार देता कहता पति की जरूरतें पूरी करना एक पत्नी का कर्तव्य है वो तो कर नहीं पाती और पैसे चाहिए बस ।
सिया आज अपनी छोटी बहन से मिली तो बड़ी उदास सी थी ।बहन रिया पूछने लगी क्या बात है दी आप बड़ी चुप चाप सी हो सिया कुछ कुछ न बोली बोल न क्या बात है जीजू ने कुछ कहा वो ,वो मेरे ऊपर चाहे जब हाथ उठा देते हैं क्या ,और तू बर्दाश्त कर लेती है ।तो क्या करूं , क्या करूं नहीं आप ऐसे ही चुप रहोगी तो वो ऐसे ही करते रहेंगे ।विरोध कर उनका ।एक बार तू भी पलटकर एक हाथ उठा दे उस दिन से मारना भूल जाएंगे ।एक बार हिम्मत दिखाओ दी सुन रही है न मेरी बात ,बोल हां सुनरही हूं ।
और तू पढ़ी लिखी है ऐसे ही घर में घुसकर रह गई है पैसे नहीं देते तो तू कहीं टीचिंग कर लें या घर पर ट्यूशन पढ़ाने लग जा । कुछ पैसे तुम्हारे पास आएंगे और तू आत्मनिर्भर बनेगी ,डर मत कुछ नहीं होगा एकं बार मेरी बात मान कर तो देख ।
रिया के हिम्मत देने पर सिया में थोड़ी हिम्मत तो आई और फिर उसने घर पर ही ट्यूशन खोल लिया पहले पड़ोस के एक बच्चे को पढ़ाना शुरू किया फिर धीरे-धीरे चार बच्चे हैं गए और उसके बाद दो ट्यूशन उसको बच्चों को घर जाकर पढ़ाना था। बच्ची को अपनी मां के पास छोड़कर वो बाहर भी पढ़ा आती धीरे-धीरे उसने कुछ पैसे जोड़ लिए और किश्तों पर एक स्कूटी खरीद ली जिससे कहीं आने-जाने में सुविधा हो जाए जाने आने में समय बहुत लग जाता था। थोड़ी हिम्मत भी आ रही थी और आत्मनिर्भर भी बन रही थी।
आज जब राजीव ने उसपर लांछन लगाया कि ट्यूशन के नाम पर न जाने कहां कहां घूमती रहती है और वो कौन लड़का है जो तुम्हें स्कूटी सिखा रहा है जरूर तेरा कुछ चक्कर है उसके साथ ।अब कल से तेरा सबकुछ बंद घर से बाहर जाना और ये ट्यूशन वयूशन सब बंद । क्यों बंद करूं जब पैसे मांगती हूं तो देते नहीं हो क्या मेरी कुछ जरूरतें नहीं है क्या। क्या जरूरत है तूझे पैसे की ,है ज़रूरत अच्छा बड़ा मुंह चला रही है और दीपक ने थप्पड़ मारने को जैसे ही हाथ उठाया सिया ने कसकर हाथ पकड़कर झटक दिया ।घबरा गया दीपक उसे ऐसी उम्मीद नहीं थी सिया से ।
सिया ने आज अपनी छोटी बहन रिया से जब ये घटना बताई तो रिया बहुत खुश हुई ।अब दीदी पीछे मत हटना ऐसे ही हिम्मत दिखाना जब भी हाथ उठाएं पकड़ा लेना या तो एक थप्पड़ तू भी जब देना ।मार खाना नियति नहीं है हम लड़कियों की । अगर कुछ ग़लत हो रहा है हमारे साथ तो उसके लिए आवाज उठाएं न कि डर कर बैठ जाएं । हां रिया मेरी बहन तेरी वजह से ही मुझमें ये हिम्मत आ पाई है और दोनों जोर से हंस पड़ी ।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
5 दिसम्बर