सुख-दुख अपने हाथ में – विभा गुप्ता   : Moral stories in hindi

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Moral stories in hindi:   ” दीदी…दीजिये ना..पराँठे मैं बेल देती हूँ।” कहते हुए गरिमा अपनी जेठानी सुषमा के हाथ से बेलन लेने लगी।   ” अरे नहीं गरिमा..मैं कर लूँगी।तुम अपना नाॅवेल पूरा कर लो..इस समय तो तुम पढ़ती हो।” कहते हुए सुषमा ने गरिमा के हाथ से बेलन ले लिया और पराँठे बेलकर सेंकने लगी। … Read more

माँ को समर्पित –  विभा गुप्ता : Moral stories in hindi

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Moral stories in hindi:   ” हा-हा…पगली काकी…पगली काकी….” कहते हुए मुहल्ले के बच्चे उन्हें देखकर तालियाँ बजाने लगें और वे हर आने-जाने वालों को ऐसे देखने लगीं जैसे किसी अपने को तलाश कर रहीं हों।तभी अपनी बाइक को साइड में रोककर अभिनव उस महिला की तरफ़ लपका और उन्हें अपने हाथों से पकड़कर घर ले जाते … Read more

‘ एक माँ का संघर्ष ‘ – विभा गुप्ता : Moral stories in hindi

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Moral stories in hindi  : दो वर्ष पूर्व मेरा हैदराबाद जाना हुआ।वहाँ एक परिचित से मिलने जब उनके घर गई तो उनके यहाँ काम करने वाली महिला को देखकर मैं चौंक पड़ी।उसने भी मुझे पहचान लिया था, इसीलिए इशारे से मुझे चुप रहने को कहा और किचन में जाने पर चुपके-से मुझे एक चिट पकड़ा … Read more

तू मेरी सहेली है ना – विभा गुप्ता : Moral stories in hindi

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Moral stories in hindi  : बसंती और देवकी पहले पड़ोसिन थीं, फिर दोनों सहेलियाँ बन गईं।दोनों के पति ज़मींदार थें।खेती की आमदनी से ही उन्होंने अपने बच्चों को खूब पढ़ाया। बसंती के दो बेटे थें-विवेक और विकास।विवेक अमेरिका पढ़ने जाना चाहता था, बसंती के पति ने अपनी ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचकर उसे अमेरिका भेज … Read more

महक उठा आँगन मेरा- विभा गुप्ता : Moral stories in hindi

New Project 87

Moral stories in hindi  :   ” तो पापा, नेक्स्ट वीक मेरी स्कूटी पक्की!” अनुभा ने अपने पापा राकेश जिंदल के गले में अपनी बाँहें डालते हुए कहा तो उसकी माँ रीमा तपाक-से बोलीं,” हर्गिज़ नहीं, पहले अठरह तो पूरी करो।एक दसवीं क्या पास कर गईं, फ़रमाइशों की लिस्ट खत्म ही नहीं होती।सुनिये जी…”     … Read more

ताईजी – विभा गुप्ता : Moral stories in hindi

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moral stories in hindi : काजल से मेरी मित्रता आठवीं कक्षा में हुई थी,काॅलेज़ में आते-आते तक हमारी मित्रता और अधिक गहरी हो गई जिसका कारण यह था कि वह एक संयुक्त परिवार की सदस्या थी और मैं एकल परिवार से ताल्लुक रखती थी।मेरे पिता दादाजी की इकलौती संतान थें, इसलिए मैंने चाचा-ताऊ के स्नेह … Read more

छोटे लोग- विभा गुप्ता  : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : दस बजने को आये और सगुना की बच्ची का अभी तक कोई पता नहीं। महारानी.,मेरा फ़ोन भी नहीं उठा रही है..ज़रूर … इधर-उधर काम करके पैसा बना रही होगी।।आज आये तो सही, फिर खबर लेती हूँ..।” अपनी कामवाली पर गुस्से-से भुनभुनाती रजनी बार-बार घड़ी की तरफ़ देखती जा रही थी … Read more

सच्चा प्रेम – विभा गुप्ता : Moral stories in hindi

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Moral stories in hindi :   ” क्या..दीपक का एक्सीडेंट! मैं अभी आती हूँ।” कहकर आरती ने अपना फ़ोन बैग में रखा और हाॅस्पीटल के लिए निकल गई।पीछे से घरवालों ने उसे बहुत आवाज़ें दी लेकिन उसे कुछ होश नहीं था।वह तो जल्द से जल्द अपने दीपक के पास पहुँचना चाहती थी।           हाॅस्पीटल के स्टाफ़ उसे … Read more

अधिकार – विभा गुप्ता : Moral stories in hindi

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Moral stories in hindi : किचन की खिड़की बंद करते हुए सौम्या ने घड़ी की ओर देखा जो रात के साढ़े दस बजा रही थी। “ओफ़्फ!आज फिर से साढ़े दस बज गये।मैं कितनी भी कोशिश कर लूँ, फिर भी दस तो बज ही जाते हैं।अब तक तो सुकेश भी खर्राटे भरने लग गये होंगे।” खुद-से … Read more

ससुराल का सुख- विभा गुप्ता  : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi :   लड़कियों की तरह लड़के भी अपने ससुराल की अच्छी-अच्छी कल्पनाएँ करते हैं। हैदराबाद की एक आईटी कंपनी में काम करने वाला प्रतीक भी अपने होने वाले ससुराल की बहुत सारी कल्पनाएँ करता था।अपने शादीशुदा मित्रों से जब उनके ससुराल के खट्टे-मीठे अनुभवों को सुनता था तो वह सोचता कि काश! मुझे … Read more

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