गलतफहमी – डाॅ उर्मिला सिन्हा : Moral stories in hindi

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Moral stories in hindi : भरी दोपहरी  दरवाजे की घंटी, “ट्रिन ट्रिन “! “ओह चैन नहीं  लेने देते ,अब इस समय कौन? “हाथ का काम छोड़ कुंडी खोलने लगी।  “मम्मी… कैसी हैं आप? पापा कहाँ हैं? भैया -भाभी ,दीदी-जीजा जी बच्चे…?”  मुनिया की चिरपरिचित मुस्कान मीठी आवाज।  “कब  आई “मैं आश्चर्यचकित कभी उसे और साथ … Read more

अधिकार – डाॅ उर्मिला सिन्हा : Moral Stories in Hindi

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Moral Stories in Hindi :” कठोर यथार्थ की दलदली धरती  पर   माही के दुर्बल पांव धंसने लगे हैं। क्रूर नियति ने उसके सुख-सौभाग्य पर बेदर्दी से कुठाराघात किया है। माही के कानों में सीटियां सी बज रही है  ,सिर चकरा रहा है  आंखों के सामने अंधेरा छा गया है। वह धड़ाम से गिर पड़ती … Read more

चार लक्खी (कहानी) -डॉ उर्मिला सिन्हा

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   देवकी कल रात से ही उतावली हो रही है।रात भर वे ठीक से सो नहीं पाईं … नींद आती कैसे जिन आंखों में नन्दलाल की मोहिनी सूरत बैठी हुई हो उसमें नींद कहां?    देवकी का बेटा नन्दलाल आई०पी०एस०भारत सरकार का जिम्मेदार पुलिस अफसर।     पूत के पांव पालने में ही दीखने   लगा। वह बचपन से … Read more

कलकतही (कहानी) –     डॉ उर्मिला सिन्हा

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 चूड़ियां सुहाग का प्रतीक। सुहागिनों की पहली पसंद।कुंआंरियों का सुनहरा भविष्य। मैं जब भी चूड़ियां खरीदने चूड़ी के दुकान पर आती हूं , मेरे मानस पटल में बचपन की एक धुंधली सी तस्वीर उभर आती है—कलकतही की। कलकतही कोई और नहीं बल्कि एक चूडीहारिन थी।उसका छोटा सा टोकरा हरी,लाल,नीली,पीली,प्लेन और कामदार चूड़ियों से भरा रहता … Read more

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