तुम आज भी मेरे मन में जिंदा हो! – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय : Moral Stories in Hindi

New Project 41

ट्रेन से उतरकर मैं बस पकड़ने के लिए ऑटो कर लिया था।  आज मैं अपने पुराने दिन को जीना चाहता था, उसी पुरानी वर्षों, पुरानी दिनों को ,,,जिनकी याद मुझे बहुत ही ज्यादा मीठी लग रही थी!  सामने बस स्टैंड था।  अनगिनत बसें खड़ी थीं। दलाल और बस कंडक्टर आकर जगह का नाम लेकर बुला … Read more

नहीं भैया हम चोर नहीं हैं!! – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय : Moral Stories in Hindi

New Project 34

“बड़े भैया बुआ जी नहीं रहीं !”यह कहकर बल्लू फूट-फूट कर रोने लगा। “अरे कब हुआ ,,, क्या हुआ अचानक ?” “कल तक ठीक थी बड़े भैया रात में अचानक की सांस लेने में कुछ ज्यादा ही तकलीफ होने लगी और देखते ही देखते बल्लू आगे कुछ नहीं कर पाया। वह फूट-फूट का रोने लगा। … Read more

बाबुल तेरे आंगन की मैं तो एक चिरैया…!! : Moral Stories in Hindi

New Project 66

“जय दुर्गा मां!,आज हमारे घर लक्ष्मी आईं हैं आपको प्रणाम!”दस साल की राधा मंदिर में अपनी गोद में गाय की एक छोटी सी बछिया को लेकर भगवती के दर्शन कराने लेकर आई थी। जैसे ही घंटी बजाकर वह बाहर निकली उसके पिता पंडित उमाकांत जी उसके सामने आ गए। उन्होंने राधा को बछिया के साथ … Read more

बहन तो बहन ही होती है – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय  : Moral Stories in Hindi

New Project 67 1

“शशांक रिद्धि आने वाली है रक्षाबंधन पर! कितने दिन हो गए हैं उसे देखे हुए! ये रक्षाबंधन तो खिल ही उठेगा उसके आने से।” मां ने खुशी से यह खबर सुनाते हुए कहा तो एकबारगी से मैं जितना खुश हुआ उतना ही शौक्ड भी। तबतक सुधा तीन कप चाय लेकर आई और कहा “अम्मा जी … Read more

अब कैसी नाराजगी – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय : Moral Stories in Hindi

New Project 86

सन् 1980, 8 फुट की ऊंचाई ,लंबा चौड़ा शरीर घनी घनी मूंछें और कंधे तक झूलते हुए बाल ,यह पहचान थी रघुनाथपुर की लाला जी की।लाला अमरनाथ सिंह जी कहने को तो पहलवान थे मगर कई गांव के मालिक थे।उनके पैतृक गांव रघुनाथपुर में तो उनकी तूती बोलती थी।तीन बेटे और एक बेटी का उनका … Read more

मुझे हक है…! – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय  : Moral Stories in Hindi

New Project 68

शाम से ही रिचा अनमनी सी हो रही थी। एक खबर जो उसे सुकून से रहने नहीं दे रही थी । उसे अभी ऑफिस से घर  लौटे ज्यादा समय नहीं हुआ था।वह अपने बिस्तर पर लेटी हुई खिड़की से बाहर देख रही थी। मौसम बहुत ही खुशनुमा था। बाहर बादल और हल्की-हल्की बारिश हो रही … Read more

मैं आपसे जुदा नहीं बाबूजी – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय  : Moral Stories in Hindi

New Project 59

“बाबूजी आप समझने की कोशिश कीजिए। मैं आपको सलाह नहीं दे रही हूं बस बता रही हूं आप जो कर रहे हैं वह गलत है। इसमें उसकी क्या गलती है। वह तो बच्ची है अभी! अभी दिन ही कितने हुए हैं उसके शादी को?”बड़ी बहू मंजूषा को यह कहते हुए जब सुना तो  मनोहर बाबू … Read more

ऐसी भी क्या ग़लती! – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय : Moral Stories in Hindi

New Project 41

घर में अशांति मची हुई थी।सबके अपने अपने बोल थे। रीमा बुआ अलग मुंह फुलाकर बैठी हुई थी। उधर बड़ी चाची का पारा वैसे भी चढ़ा हुआ था। बाबाजी गुस्से में गर्म हुए जा रहे थे और अम्मा का तो कहना ही क्या!हाई बीपी की मरीज उसपर सबके तलवार उनके ही सिर पर लटक रहे … Read more

कलंक नहीं ये प्यार है – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय  : Moral Stories in Hindi

New Project 2024 04 29T104946.819

एनडीआरएफ की टीम मुस्तैदी से ड्यूटी पर तैनात थी। अचानक ही एक ग्लेशियर का टुकड़ा फिसल कर नदी में आ गिरा था और सुस्त सी बहने वाली उस पहाड़ी नदी में बाढ़ आ गई थी। इतना पानी भर गया था कि आनन फानन में आर्मी और एनडीआरएफ की टीम को वहां तैनात करना पड़ गया … Read more

मां कहां गई – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय : Moral Stories in Hindi

New Project 6

सामने नीम का पेड़ खड़ा लहरा रहा था। ऐसा लग रहा था कि वह कह रहा हो “आओ बेटा तुम्हें अपनी आगोश में ले लूं ।तुम्हें चिंता करने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है।” बस अपनी कुछ उम्मीद को लेकर मैंने मायके के दहलीज में कदम रखे थे यह सोचकर कि शायद मेरे कदम रखते … Read more

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