प्यार बोझ नहीं बनेगा…रश्मि झा मिश्रा : Moral stories in hindi

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पूर्णिमा की चांदनी… पूरे आकाश पर फैली हुई थी… हल्की-हल्की ठंडी हवा के झोंके… साथ में मस्त चांदनी… राधिका खिड़की खोले बस निहारे जा रही थी… वह जैसे खो सी गई थी… हजार द्वंदों से उलझे हुए मन पर… जैसे यह चांदनी रात की ठंडी हवा अमृत वर्षा कर रही हो… कहीं दूर से हरि … Read more

औकात नहीं भूला…रश्मि झा मिश्रा : Moral stories in hindi

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वह शायद भिखारी ही था… एक पैर से लंगड़ा… अपनी बैसाखी टेकता… स्टेशन पर खड़ी गाड़ियों के पास हाथ फैला रहा था… कभी एक-दो खिड़कियों पर कुछ मिल भी जाता… कभी सिक्का.… कभी रोटी… कभी सड़े गले फल… सबको झोलियों में डालता हुआ फिर दूसरी खिड़की के पास पहुंच जाता था… कुछ सभ्य लोग मुंह … Read more

यह नाटक नहीं है – रश्मि झा मिश्रा  : Moral stories in hindi

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अभी कुछ ही महीने हुए थे आद्या को ससुराल आए… बढ़िया पढ़ा लिखा परिवार था… आद्या ने भी बढ़िया डिग्री ली हुई थी… सब कुछ में होशियार लड़की… पर पता नहीं क्यों… जब से ससुराल में आई थी… उसे लगता हर वक्त सासू मां उससे चिढ़ी रहती हैं… वह चाहे उन्हें खुश करने के कितने … Read more

आती हूं… – रश्मि झा मिश्रा : Moral stories in hindi

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“सोहा… सोहा… 6:30 हो गए… उठो… उठो ना…” अमित ने धीरे से सोहा की बांह हिला कर सोए सोए ही कहा….! ” क्या 6:30 हो गए… अलार्म नहीं बजी क्या…!” ” पता नहीं… मेरी भी अभी ही आंख खुली.… फोन देखा तो 6:30 हो गए थे…!” ” अरे अमित अच्छा किया आपने उठा दिया… आज … Read more

समयचक्र यही है…रश्मि झा मिश्रा : Moral stories in hindi

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आज से कोई चालीस पचास साल पहले तक… शादियां घर के बड़े ही पूरी तरह तय करते थे… लड़के लड़कियों को बस तैयार होकर मंडप में बैठना होता था… खासकर बड़े घरानों में तो शादी से पहले एक दूसरे को देखना… नाक कटाने वाली बात होती थी…और यदि किसी तरह देख भी लिया… तो उसे … Read more

तीन बेटों की अम्मा…रश्मि झा मिश्रा : Moral stories in hindi

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कितनी ठसक में रहती थी अम्मा…. आखिर तीन बेटों की मां जो थी… अपनी जवानी के दिनों में जब पान चबाती… सर ढके… शान से मटकती निकलती.. तो रमा काकी अक्सर टोक ही देती थी.…” क्या दीदी सुबह-सुबह कहां होली… हम तो अभी तक चौके बर्तन से ही ना उबरे… नहाना धोना ना हुआ… और … Read more

तू बेचारी नहीं है….. रश्मि झा मिश्रा : Moral stories in hindi

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अभी उम्र ही क्या हुई थी उसकी… बीस की ही तो थी.. चुलबुली.. अल्हड़.. संजीवनी.. लेकिन अपने कामों के प्रति बिल्कुल सजग थी वह.… जो काम उसे मिल जाता.. वह कभी अधूरा नहीं रहता था…!  भैया की शादी थी.. पूरा घर संभालना था.. और ऐसे में हर जुबान पर एक ही नाम रहता था.. संजीवनी..! … Read more

शर्मसार – रश्मि झा मिश्रा। : Moral stories in hindi

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भैया आपको जरा भी शर्म नहीं आई… ऐसे आने में… देखिए सब कितना कुछ लाए हैं… कितने महंगे महंगे गिफ्ट… गहने.. कपड़े.. और आप क्या सिर्फ चांदी की मठिया और कपड़े लेकर आ गए… क्या कहूंगी मैं सबको… कैसे दिखाऊंगी… अब तो शर्मसार करना बंद करिए… हमेशा से आपका वही रोना रहा है….!  नीता अपने … Read more

खिलाफ… – रश्मि झा मिश्रा : Moral stories in hindi

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शीला ने सधे शब्दों में पूछा…” उम्र क्या है तुम्हारी..?” “… जी आंटी.. 17 साल..!” रिशु लगभग मिमियाता हुआ बोला..  “…और निशी तुम्हारी.. 15 है ना.. हां तो क्या तुम लोगों को अभी शादी करनी है…!” ” नहीं मां ऐसा नहीं है…!”  “फिर क्या है… क्या चाहते हो.. ऐसे तो पढ़ाई लिखाई.. घर परिवार.. कुछ … Read more

बीमार होने से फर्क पड़ता है… रश्मि झा मिश्रा  : Moral stories in hindi

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“अरे मां…! कितनी बार कहा है… इतनी सुबह मत नहाया करो.. तुम हो कि तुम्हें कुछ सुनाई ही नहीं देता… क्या जरूरत है.. ठंडी में इतनी सुबह हड़़बड़ हड़़बड़ करने की… आराम से सब चले जाएं.. तब नहा लो.. धूप निकलने दो.. तब नहाओ….!” आदर्श अपनी मां रमा जी को लगभग डांटते हुए ही.. इतना … Read more

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