एक बार फिर (भाग 2 ) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

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प्रिया अपनी फ्रैंड कविता से मिलने जाती है। रास्ते में एक जगह गाड़ी खड़ी करके जंगली गुलाब की झाड़ी को देखने लगती है। तभी पीछे से कोई आवाज देता है अब आगे- ऐ मैडम! बीच रास्ते में गाड़ी क्यों रोक दी। वैसे ही इतना संकरा रास्ता है। लगता है कि आप किसी की जान लेकर … Read more

एक बार फिर भाग 1 – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

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Moral stories in hindi  : वो मेरा पहला प्यार था। शायद आखिरी भी जिसे मैंने खुद से ज्यादा चाहा था दी। ये कहते हुए प्रिया का स्वर बुझ गया। निभा ने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया प्यार से उसकी ठोड़ी ऊपर उठाते हुए कहा पगली! तू इतनी खूबसूरत है। कामयाब है पहले की … Read more

जन्म का नहीं दिल का रिश्ता – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

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Moral stories in hindi  : मैं शिवानी आज आपके सामने अपनी जिंदगी की किताब से जुड़ा एक पन्ना खोल रही हूं जो बहुत खूबसूरती से ईश्वर द्वारा लिखा गया है। मैं अपने मां-पापा के चार बच्चों में सबसे बड़ी थी। मध्यम वर्गीय परिवार, खूब बड़ा,तीन मामा, मौसी नानी- नाना और पापा की फॅमिली में पापा … Read more

अम्मा – रचना कंडवाल

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श्याम लाल जी सुबह फ्रेश हो कंधे पर तौलिया डाल कर नहाने बाथरूम में प्रवेश करने ही वाले थे। अम्मा जो अभी अच्छी भली बाहर बरामदे में बैठकर धूप सेंक रही थी उनके करूण क्रंदन ने उन्हें बाहर आने पर मजबूर कर दिया। श्यामू ओ श्यामू ! बाहर निकल तेरे घर में मेरा गुजारा नहीं … Read more

“सुजाता”( स्वाभिमान और संघर्ष) – रचना कंडवाल : Moral Story In Hindi

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सुजाता ने आज दस साल बाद दोबारा “बसेरा” में कदम रखा था। ये वही “बसेरा” था जहां कभी वह दुल्हन बन कर आई थी। ये कभी उसका घर हुआ करता था। उसके ससुर रिटायर्ड जज अविनाश शर्मा की कोठी उसके पति आइपीएस निशांत शर्मा का घर। घर में शोक पसरा हुआ था, मृत शरीर को … Read more

सिर्फ तुम और कुछ नहीं” –  रचना कंडवाल

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ओहो! मेजर साहब हमारी और आपकी शादी को कितने साल हो गये हैं?? बताइए न?? ऐसा कहते हुए कल्पना  मुस्कुरा उठी। मेजर धीरेन्द्र प्रताप सिंह झुंझलाहट भरी नजरों से उसे देख कर अपना फोन अटेंड करने लगे। फोन बंद करते ही उसकी ओर मुखातिब हुए और डपटते हुए बोले। अभी इस कैलकुलेशन का वक्त नहीं … Read more

हाऊस वाइफ – रचना कंडवाल 

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अरे भई रीमा नाश्ता तैयार हो गया क्या? मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है।अमर ने बेडरूम से आवाज दी।रीमा बाबू जी को दलिया उनके रुम में दे कर बाहर आई। तो अमर ने उसे गुस्से से घूरा जल्दी से हाथ नहीं चला सकती हो। रीमा ने उसी शांत भाव से कहा अभी लाती … Read more

वापसी ( रिश्तों की)  आखिरी भाग-5 –  रचना कंडवाल

अब तक आपने पढ़ा कि बरखा सुनिधि को‌ उसके पापा के बारे में बताती है जिसे सुनकर सुनिधि दंग रह जाती है। उसके मन में अपनी मॉम के लिए नफरत भर जाती है। वह रियलाइज करती है कि उसके सास-ससुर और पति विपुल उसे कितना प्यार करते हैं। जिसे वह सास की टोका-टाकी समझती है … Read more

किसका घर/ माता पिता का या बेटे का – रचना कंडवाल

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“पापा नया घर बिल्कुल तैयार हो चुका है। सोच रहा हूं कि वहां दीपावली पर शिफ्ट कर लूं।” सिद्धार्थ ने अपने पापा गोविंद प्रसाद जी से कहा। सिद्धार्थ गोविंद जी और सुधा का इकलौता बेटा है। सुधा वहीं पर बैठी मूकदर्शक बनी चुपचाप सुन रही है। पिछले कुछ दिनों से उसने किसी भी बात पर … Read more

वापसी ( रिश्तों की) भाग–4 – रचना कंडवाल

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि बरखा अपनी बेटी सुनिधि को उसके पिता के बारे में बताती है। कि बाइस साल पहले उन दोनों के बीच क्या हुआ था?? उनके अलग होने की वजह क्या थी?? सुनिधि पूछती है कि क्या आपने उनसे दोबारा मिलने की कोशिश की?? अब आगे– नहीं कभी नहीं। वो सिहर … Read more

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