गुरूर. – निभा राजीव “निर्वी” : Moral Stories in Hindi

New Project 91

पीहू और कुहू ने सुनंदा जी को प्यार से सहारा देते हुए गाड़ी में बैठाया और दोनों उनके अगल-बगल बैठ गईं। शीघ्र ही गाड़ी ने रफ्तार पकड़ ली। सुनंदा जी के शरीर का बायाँ लकवाग्रस्त भाग निश्चेष्ट पड़ा हुआ था और वह कांपते हुए दाएं हाथ से अपनी भींगी आंखों को पोंछने का प्रयास कर … Read more

अनूठी पहल – निभा राजीव “निर्वी” : Moral stories in hindi

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“-तुम ऐसा सोच भी कैसे सकती हो मीरा! गलती से भी दोबारा ऐसी बात अपनी जुबान पर मत लाना! और माँ को भी पता नहीं क्या सूझी.. कम से कम उन्हें तो सोचना चाहिए था कि…” “बस करो विवेक! माँ को कुछ मत कहना… यह निर्णय माँ का नहीं बल्कि मेरा है…” मीरा का स्वर … Read more

पहल – निभा राजीव “निर्वी” : Moral stories in hindi

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व्यवसायी जानकी दास जी के दोनों पुत्रों रमेश जी और सुरेश जी में आपस में बहुत मेल भाव था। बड़े पुत्र रमेश जी की पत्नी नंदिनी भी छोटे पुत्र दिनेश जी के लिए पुत्रवत भाव रखती थी और सब में आपस में बहुत ही स्नेह था। दोनों देवरानी जेठानी भी बहुत प्रेम भाव से रहती … Read more

नई बहारें – निभा राजीव “निर्वी” : Moral stories in hindi

पार्टी बस शुरू ही होने वाली थी। आईपीएस अधिकारी अंजलि तैयार हो चुकी थी। चौड़े बॉर्डर की पीली वाली साड़ी में उनका सांवला सलोना रूप दमक कर और भी निखर रहा था। उसने अपना पर्नेल नेकलेस पहना और अपने आप को आईने में देखा तो अचानक अतीत के पृष्ठ खुलकर उसकी आंखों के सामने फड़फड़ाने … Read more

दूरदर्शिता – निभा राजीव “निर्वी”  : Moral stories in hindi

“-अरी बहू! अगर तुम दोनों मां बेटी की गुटर गूं खत्म हो गई हो तो अब जाकर उसे स्कूल के लिए बस स्टॉप पर छोड़कर आओ…वापस आकर आगे भी कुछ काम करने हैं या नहीं। तुम्हारा आधा समय तो इसे पहुंचाने और लाने में ही बीत जाता है…. और फिर हड़बड़ी में जैसा तैसा काम … Read more

जब जागो तभी सवेरा – निभा राजीव “निर्वी” : Moral stories in hindi

सत्रह वर्षीया रिया ने पुलक कर स्मिता के गले में बाहें डालकर कहा,”- पता है दीदी… आप मेरे साथ मेरे कमरे में रहोगी। माँ ने आपके रहने का प्रबंध मेरे ही कमरे में करवाया है। कितना मजा आएगा ना। हम दोनों देर रात तक खूब सारी बातें करेंगे!”                   उसकी मासूमियत पर मुस्कुरा पड़ी स्मिता और … Read more

आकाश कुसुम – निभा राजीव “निर्वी” : Moral stories in hindi

विनय ने नई नवेली चमचमाती कार का दरवाजा खोल कर रघुनंदन बाबू और जानकी जी से कहा, “- आइए माँ और बाबूजी! बैठिए इसमें! हर्षातिरेक से रघुनंदन बाबू का कंठ रूंध गया। फिर उन्होंने भरे गले से पुत्र विनय से कहा,  “- बेटा पहले तू बैठ न! तूने अपने परिश्रम की गाढ़ी कमाई से आज … Read more

बदलाव – निभा राजीव “निर्वी”  : Moral stories in hindi

New Project 41

नई नवेली बहुरानी गरिमा सास विमला जी के लिए चाय लेकर आई ही थी कि उसे देखते ही विमला जी बिफर पड़ीं और वहीं से बैठे-बैठे बड़ी बहू नीला को आवाज देते हुए कहा, “- यह क्या है नीला बहू! तुमने मुझे कप में चाय क्यों भिजवाई? तुम्हें पता है ना कि मैं कांच के … Read more

फैसला – निभा राजीव “निर्वी”: Moral stories in hindi

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रणधीर जी दौड़ भाग कर विवाह का सारा काम और प्रबंध देखने में पूरे मनोयोग से लगे हुए थे! खुशी उनके चेहरे से जैसे छलकी जा रही थी और होती भी क्यों नहीं, आखिर उनके इकलौती बिटिया नेहा का विवाह जो था। रिश्तेदारों से घिरी हुई सजी-धजी नेहा बिल्कुल आज जैसे देवी माँ का स्वरूप … Read more

आत्मसम्मान – निभा राजीव “निर्वी”

best hindi kahani

ऋषि दवाइयों की दुकान पर सर दर्द की दवा लेने पहुंचा। वहाँ पहले से ही एक छरहरी सी सुंदर युवती खड़ी थी। ऋषि ने जब दवा का नाम कहा तो केमिस्ट ने कहा- “सॉरी सर, उस दवा की तो हमारे पास एक ही पत्ती थी, जो मैंने इन मैडम को दे दी है।” ऋषि ने … Read more

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