ससुराल के चार दिन – माता प्रसाद दुबे : hindi Stories

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hindi Stories : रवि की रेलवे में नौकरी लगने के बाद वह लखनऊ शहर में रेलवे कालोनी में अकेले ही रहता था, कुछ दिन तक उसके पास उसकी मां शांति देवी,बहन पायल,व भाई राजेश,बारी-बारी से उसके पास आकर रहते थे,और वापस गांव अपने घर चले जाते थे, रवि का मन भी गांव में ही रमा … Read more

सच्चाई का आईना – माता प्रसाद दुबे : hindi kahaniya

hindi kahaniya  : रात के आठ बज रहे थे। प्रकाश सोफे पर उदास बैठा अपने अतीत के बारे में सोच रहा था। उसके मन में उथल-पुथल मची हुई थी। उसकी मनोदशा शून्य हो रही थी। अपनी पत्नी गीता की जिद और अक्खड़ रवैये के कारण वह असहाय हो गया था। “चलिए खाना तैयार है” उसकी … Read more

घुटन – माता प्रसाद दुबे : Moral stories in hindi

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Moral stories in hindi  : घर में पार्टी चल रही थी..डीजे की धुन पर घर के सभी लोग मेहमानों के साथ थिरक रहे थे..उस आलीशान घर के एक कमरे में जीवन के सत्तर बसंत देख चुके रामदयाल जी कमरे में बैठे ख्यालों में खोये हुए थे..नौकरी से सेवानिवृत्त होने के पश्चात वह घर पर ही … Read more

बदनुमा दाग – माता प्रसाद दुबे : Moral stories in hindi

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Moral stories in hindi : रामप्रसाद कस्बे के ईमानदार पढ़ें लिखे शरीफ आदमी थे,खेती उनका मुख्य पेशा था, कस्बे में उन्होंने एक दुकान भी खोल रखी थी,वे हमेशा दूसरों की मदद किया करते थे,पत्नी शांति देवी बड़ा बेटा प्रभात बेटी मालती बहू गीता नन्हा पोता अरूण उनके हंसते खेलते परिवार के सदस्य थे,सभी एक दूसरे … Read more

घमंडी चेहरा – माता प्रसाद दुबे : Short Hindi Kahani

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सुबह के आठ बज रहे थे,काम वाली बाई की राह देखते हुए रागिनी गुस्से से लाल पीली हो रही थी,घर का सारा काम काम वाली बाई के देर से आने की वजह से काफी देर से होता था,रागिनी खुद कुछ भी नहीं करती थी,वह हमेशा अपने चेहरे की खूबसूरती निहारतीं रहती थी,वह खुद को किसी … Read more

एन, जी,ओ, –  माता प्रसाद दुबे

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रात के बारह बज रहे थे। गीता कमरे में गुमसुम उदास बैठी बार-बार खिड़की से बाहर की ओर देख रही थी। उसका पति रवि अभी तक घर वापस नहीं आया था। उसे अपनी जिंदगी में सिर्फ घनघोर अंधेरा ही दिखाई दे रहा था।दो साल पहले ही उसकी और रवि की शादी हुई थी। एक साल … Read more

स्वार्थी बेटा – माता प्रसाद दुबे Moral Stories in Hindi

दो दिन गांव में बिताने के बाद रवि वापस घर आ रहा था। उसे अपनी अम्मा की चिंता हो रही थी। जिसे वह ईश्वर की तरह पूजता था। जो दमा की बीमारी से पीड़ित थी। उसके बड़े भाई किशन भाभी सीमा व पांच साल का भतीजा अंकित उसकी अम्मा पुष्पा देवी के पास घर पर … Read more

सौतेली माॅ॑ – माता प्रसाद दुबे

रमादेवी गुमसुम उदास बैठी कमरे की दीवार पर लगी तस्वीर को एकटक देख रही थी। एक साल पहले का,आज वही दिन था..जिस दिन रवि के पापा एक दुर्घटना में परलोक सिधार गए थे। पैंतीस वर्ष तक रेलवे में गार्ड के पद पर ईमानदारी से कार्य करते हुए कुछ महीनों बाद ही वे सेवानिवृत्त होने वाले … Read more

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