बेटी अब से ससुराल ही तेरा घर है अब तो तू यहां की मेहमान है – मनीषा सिंह। : Moral Stories in Hindi

New Project 78

स्टेशन छोड़ते ही गाड़ी धीरे-धीरे तेज होती जा रही थी ज्यों -ज्यों गाड़ी तेज रफ्तार पकड़ रही थी त्यों -त्यों सरस्वती की आंखों से मां-बाप ओझल होते जा रहे थे। आशु थमने का नाम नहीं ले रही थी मन मारकर अपनी सीट पर जाकर बैठ गई।   अपनी और बच्चों की छुट्टियां खत्म होने के बाद … Read more

मेरे साथ ऐसा व्यवहार करोगे कभी सपने में भी नहीं सोचा था – मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

New Project 72

भाभी —! क्या –आप कुछ देर चिंटू को संभालेंगी?? परू का आज वैक्सीनेशन है इसलिए उसे डॉक्टर के पास लेकर जाना है धूप ज्यादा है सो चिंटू की तबीयत ना खराब हो जाए। ‘मैं वैक्सीन दिला कर जल्द से जल्द आने की कोशिश करूंगी।’  अवनी अपनी भाभी निहारिका से बोली । हां -हां दीदी !आप … Read more

गुरुर – मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

New Project 36

शालिनी जी एक सिंगल मदर थी तथा केंद्रीय विद्यालय में हिंदी की शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं।  दो बेटियां अवंतिका और अनुराधा उनकी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा थीं । अब चुकी सिंगल मदर थीं तो घर की सारी जिम्मेदारियां उनको निभानी थी।  शालिनी जी  बेटियों की शिक्षा में कोई कसर नहीं रहने देना … Read more

रिश्तो की डोरी टूटे ना – मनीषा सिंह। Moral Stories in Hindi

New Project 42

“शीतल—- तुम्हें मेरे जज्बात से खेलने का हक किसने दिया?  मेरे साथ ये प्यार का नाटक किस लिए ?  क्यों इतने दिनों से मुझे इस भ्रम में रखा कि मैं दुनिया का सबसे खुशनसीब हूं जिसे तुम मिली थी? कहां गए तुम्हारे कसम, जो तुमने साथ जीने- मरने के खाए थे? मुझे तो घिन आती … Read more

ऐसे शब्द सुनकर मेरा खून खौल गया-मनीषा सिंह : Moral stories in hindi

New Project 2024 04 29T105042.754

मानसी की शादी की तैयारी पूरे जोर- शोर से चल रही थी! मानसी के पिता अजीत जी बेटी के हर एक डिमांड को पूरी करने में लगे हुए थे। मानसी 22 साल की हो चुकी थी ।  तथा एम ए की पढ़ाई कर रही थी। ये शादी कुछ हटकर थी । दोनों तरफ के परिवार … Read more

बेरंग से रिश्तों में रंग भरने का समय आ गया है-मनीषा सिंह : Moral stories in hindi

New Project 67 1

झांसी से दिल्ली जा रही बस के पास एक बुजुर्ग महिला इधर-उधर नजरे दौड़ाते हुए पहुंची और कंडक्टर जो सभी यात्रियों का टिकट बना रहा था, से बोली बेटा यह बस दिल्ली तक ही जाती है ना? ” हां मां जी”! कंडक्टर में उस बूढी महिला के तरफ देखकर दूसरे यात्री से बोला अरे भैया … Read more

जिंदगी सुख कम दुख ज्यादा देती है – मनीषा सिंह: Moral stories in hindi

कड़ाके की ठंड पड़ रही थी रात के 11:00 बज चुके थे।  तेजस्विनी अपनी 2 साल की बेटी राहा को सूलाकर हाल में  ही इधर-उधर चक्कर काट रही थी । उसकी नजर बार-बार दीवाल पर लटकी  घड़ी की ओर जा रही थी। आशु 35 साल का युवक जो किसी सरकारी ऑफिस में ऊंचे पद पर … Read more

औकात – मनीषा सिंह : Moral stories in hindi

New Project 2024 05 05T225422.575

“मां _! मुंह मीठा कीजिए ।पैर छूकर शैलेश मिठाई अपनी मां के मुंह में डालते बोला  “बता तो सही की किस खुशी में मिठाई खिलाई जा रही है!   मालती जी बेटे के सर पर हाथ रखते बोली  “मां आज फाइनली मैं लेक्चरर के लिए सेलेक्ट हो गया   कई सालों से मेरी कोशिश थी इस जॉब … Read more

बंद करो अपना नाटक – मनीषा सिंह : Moral stories in hindi

New Project 41

“प्रतिज्ञा बेटा स्नान कर ले— कई दिन हो गए तुमने स्नान नहीं किया ठंड भी कम हो गई है जा स्नान कर ले—- ।मैने गीजर  ऑन कर दिया है ! फिर हम इकट्ठे ही नाश्ता करेंगे,! जल्दी जा  अब—–। अंबिका जी नाश्ता की प्लेट लगाते हुए  बोली । प्रतिज्ञा बूझे मन से टॉवल ले स्नान … Read more

समयचक्र- मनीषा सिंह : Moral stories in hindi

New Project 45

रामानंद जी रजिस्ट्री ऑफिस में किरानी की नौकरी करते थे। घर में पत्नी और दो बेटी लता और किरण थी। इनके अलावा दो बेटे अरुण और वरुण जो अभी स्कूल की पढ़ाई कर रहे थे। बेटियां बेटों से बड़ी थी इसलिए इनकी शादी करनी थी। तनख्वाह इतनी थी जितनी में घर चल सके। “अजी सुनते … Read more

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