ये जीवन है… – लतिका श्रीवास्तव  : Moral Stories in Hindi

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मम्मी जी बहुत हुआ …अब आपके इतने कठिन काम करने के दिन गए …चलिए हम लोगों के साथ रहिए अब आराम से नाती पोतों का सुख लीजिए…. पारस की चहकती हुई आवाज से सुधा चौंक गई।गहराती शाम में वह अपनी बुटीक शॉप के शटर गिरा रही थी तभी पीछे से अपने दामाद की आवाज सुन … Read more

गलफुल्लो – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

New Project 49

निम्मी बेटा आजा देख थाली लग गई है भूख लगी होगी जिद नहीं करते बेटा जल्दी आ….मां की लगातार आती आवाजों को अनसुनी करती निम्मी अपने कोपभबन से टस से मस नहीं हुई।पहले मुझे नया मोबाइल दिलाओ तभी खाना खाऊंगी गाल फुला कर चिल्ला उठी।अच्छा ठीक है मोबाइल दिला देंगे आज मेरी रानी बिटिया.. अबकी … Read more

प्रतिशोध पिता से – लतिका श्रीवास्तव   : Moral Stories in Hindi

New Project 99

गणपति बप्पा मोरिया….बप्पा को अपने हाथों में अपने कंधों में उठाए स्थापना के लिए घर ले जाते उत्साही भक्तों की बुलंद आवाजे आसमान छू रही थीं पटाखों की तेज आवाजें कान के पर्दे फाड़े दे रहीं थीं उमड़ता हुआ जनसमुदाय विशाल सड़कों को संकरी किए दे रहा था…। लेकिन कैब में बैठे अविनाश के कानों … Read more

कचरे का डिब्बा – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

New Project 65 1

मां देख मैं क्या लाया हूं.. वीनू ने चहकते हुए कहा तो मुनिया बर्तन रगड़ते पलट कर देखने लगी क्या है री इत्ता चहक रहा है देखा तो वीनू के हाथ में एक अधखाया सेब फल था जो सड़ गया था।कहां से लाया किसका जूठा है .. मुनिया हाथ का काम छोड़ कर खड़ी हो … Read more

मुफ्त की मार – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

New Project 55

सौरभ की शादी पक्की हो गई  पीयूष के बड़े चाचा का फोन आया था घर में बड़ा उत्साह व्याप्त था शादी में जाना था सबको। पीयूष ने मुझसे कहा सुन आलोक तू भी चल हम लोगो के साथ।यहां अकेला क्या करेगा आखिर सौरभ ने तुझे भी तो निमंत्रित किया है मेरा तो भाई है पर … Read more

छतरी – लतिका श्रीवास्तव   : Moral Stories in Hindi

New Project 50

नहीं …..हमारे खानदान में ऐसा कभी  नहीं हुआ और जब तक मैं जिंदा हूं मैं किसी को ऐसा करने नही दूंगा.. हमेशा की तरह मैंने गुर्रा कर सबको चुप कराने की कोशिश कर दी थी। लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग दिखी मुझे ।आज पहली बार अपने घर में अपनी बात का विरोध करने के … Read more

जिद – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

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मुझे भी किसी हिल स्टेशन पर घुमाने ले चलो मां की दस दिनों से जारी यह जिद समझ से परे थी।पता नहीं अचानक मां पर ये घूमने जाने का भूत कैसे सवार हो गया था लेकिन इस भूत भगाने के चक्कर में पिता जी के सारे तंत्र मंत्र बेकार हुए जा रहे थे। हमेशा की … Read more

अभिनय की कसौटी – लतिका श्रीवास्तव  : Moral Stories in Hindi

New Project 88

आज फिर ढाक के वही तीन पात …नौकरी नहीं …!! कितनी एडियां रगड़ी कितनी मिन्नतें की पर बिना सिफारिश बिना ऊंची पहुंच के आज के जमाने में मुझे कौन नौकरी दे देगा।प्रतिभा है मेरे अंदर आखिर तीन वर्षो तक लगातार  पूरे कॉलेज का बेस्ट एक्टर मुझे ही चयनित किया जाता रहा है स्कूल में भी … Read more

पुलकन – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

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अरे भई श्रीमती जी कहां हैं आप लीजिए मॉर्निंग टी हाजिर है सुबोध जी ने चाय की केतली टिकोजी सहित लाकर बेड की साइड टेबल पर रख दी। शामली जी  वाश रूम से निकल रहीं थीं…! अरे सॉरी मुझे उठने में देर हो गई मैं बनाती ना आप क्यूं बना लाए कुछ शर्मिंदगी के एहसास … Read more

परिधान – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

New Project 11

.. तुमने कुछ कहा ही नहीं इतनी सुंदर ड्रेस मैने पहनी है …तुम्हारा ध्यान कीधर रहता है सुमेर…. रिया कुछ नाराज हो गई थीऔर आखिरी के शब्दो को कहने की तीव्रता इतनी अधिक थी कि रेस्तरां में कई लोग पलट कर उसकी ओर देखने लगे थे। यह सुंदर ड्रेस उसने कल ही खरीदी थी कल्पना … Read more

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