मेरे पापा मेरा गुरुर हैं – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

New Project 94

“बेटी,बड़ी हो रही है अभी भी आप उसके साथ बच्चों की तरह आंख मिचौनी खेलते रहते हैं।”रमा झल्लाते हुए बोली। “रमा,यही तो समय है जितना अपनी बेटी का साथ लाड लगा सकूं उसके साथ मस्ती कर सकूं।बड़ी होकर तो ये अपने ससुराल चली जाएगी।क्या पता फिर इससे मिलने के लिए भी तरस जाऊं।”सुरेश जी कहते … Read more

रिश्तों की डोर ना हो कभी कमजोर – कमलेश आहूजा: Moral Stories in Hindi

New Project 41

नेहा की माँ का देहांत हो गया था।तेरहवीं की रस्म करके अभी अपने घर आई थी कि भाभी का फोन आ गया  -“हैलो दीदी,आपसे एक बात पूछनी थी प्लीज बुरा नहीं मानना।” “हां रीना,पूछो क्या बात पूछनी है?” “दीदी मम्मी जी की दो सोने की चूड़ियां एक गले की चैन,एक जोड़ी टॉप्स और कान की … Read more

एक नई शुरुआत-कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

New Project 35

“माँ आपसे कितनी बार कहा है,कि बात बात पर पूजा से बहस ना किया करो।लेकिन आप मानती नहीं रोज क्लेश करती रहती हो।”सोमिल गुस्सा होते हुए रमा से बोला। “तू तो हर बार मुझे ही गलत समझता है और बहु को कुछ नहीं कहता।मैंने इसे मायके वालों को फोन करते सुना था,कि मेरी सास कोई … Read more

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