तेरहवीं – दिक्षा बागदरे : Moral Stories in Hindi

New Project 49

विभा आज दीपिका की तेरहवीं पर आई थी। मन बहुत भारी हो रखा था। तभी उसने कुछ महिलाओं को बातचीत करते सुना।  कोई दीपिका की मौत को लेकर कयास लगा रही थी। तो कोई उसके चरित्र को लेकर सवाल उठा रही थी।  तो कोई उसकी शिक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगा रही थी???? यह सब सुनकर … Read more

उम्र के आखिरी पड़ाव की कीमत – दिक्षा बागदरे : Moral Stories in Hindi

New Project 60

“वक्त बहुत महत्वपूर्ण होता है, कब वह हाथों से रेत की तरफ फिसल जाए पता ही नहीं चलता।”  “समय अपनी गति से आगे ही बढ़ता जाता है और हम उम्र के उस पड़ाव पर आकर खड़े हो जाते हैं जहां से वापस पीछे जाना नामुमकिन होता है।” शालिनी जी के यह शब्द सभागृह में गूंज … Read more

संस्कार और सम्मान – दिक्षा बागदरे : Moral Stories in Hindi

New Project 49

रितिका का मन कल शाम से ही बहुत खिन्न है। मन में बहुत ही उथल-पुथल मची हुई है। वह समझ ही नहीं पा रही थी कि उससे कहां चूक हो गई ?? जिन्हें वह इतना सम्मान देती थी, अपना समझती थी। आज उन्होंने ही उसके संस्कारों पर उंगली उठा दी थी। रितिका शुरू से ही … Read more

साक्षात्कार (इंटरव्यू) – दिक्षा बागदरे : Moral Stories in Hindi

New Project 58

रुचि आज जॉब इंटरव्यू की तैयारी कर रही थी। मगर उसका मन बहुत घबरा रहा था। पिछले 6 महीनों से वह अलग-अलग जगह पर कई कंपनीयों में  इंटरव्यू दे चुकी थी।  पहले दो चरणों में लिखित परीक्षाओं में पास हो जाती थी। तीसरे चरण में साक्षात्कार तो उसके अच्छे ही होते थे। परंतु परिणाम बिल्कुल … Read more

बेटी का घर- दिक्षा बागदरे : Moral Stories in Hindi

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रागिनी पिछले दो दिनों से बहुत परेशान थी। उसे यह समझ ही नहीं आ रहा था, उसे अत्यधिक प्रेम करने वाली मां का व्यवहार इतना कैसे बदल गया। पिछले दो दिनों से प्रतिभा जी रागिनी से ठीक से बात तक नहीं कर रही थी। आज तो मां के शब्द उसके कानों में सीसे की तरह … Read more

सहायिका – दिक्षा बागदरे : Moral Stories in Hindi

New Project 47

सीमा जी अपने पति राघव जी के साथ दिल्ली में रहती थी। उनका एक पुश्तैनी घर उज्जैन में भी था। साल भर में एक-दो बार घर की देखभाल और स्थान परिवर्तन के मद्देनजर नजर वे लोग उज्जैन आया करते थे। बहुत दिनों से घर बंद होने के कारण घर में गंदगी बहुत हो जाती थी। … Read more

लेखिका – दिक्षा बागदरे : Moral Stories in Hindi

New Project 44

#गुरुर  लेखिका आज अनिका के पांव जमीन पर नहीं पड़ रहे हैं। वह सोच रही है कि वह कहां थी और कहां पहुंच गई है।  उसने कभी नहीं सोचा था कि उसका लेखन उसे इस मुकाम पर ले जाएगा। अनिका को कहानी पढ़ने का बहुत शौक रहा है। वह बचपन से ही नंदन, देवपुत्र आदि … Read more

परिणाम- दिक्षा बागदरे : Moral Stories in Hindi

New Project 72

राहुल सर पकड़ कर बैठा हुआ था और बहुत रो रहा था। उसे दिन में तारे नजर आ रहे थे। घर में हर कोई उसे समझा कर हार चुका था।  सौम्या जो कि राहुल की मां थी वह एक चाइल्ड काउंसलर थी। और कहते हैं ना कि डॉक्टर कभी अपने घर वालों  का इलाज नहीं … Read more

अंतिम सांस – दिक्षा बागदरे : Moral Stories in Hindi

New Project 96

आज सुबह से ही घर में बहुत ही कलह पूर्ण वातावरण बना हुआ है। सिया का सर बहुत भारी हो रहा था। मन में बहुत से  वैचारिक उतार-चढ़ाव चल रहे थे।  15 वर्ष पूर्व सिया का अंतर्जातीय प्रेम विवाह हुआ था यश के साथ।   यश और सिया दोनों ही जानते थे कि इस विवाह को … Read more

दादी जी और मैं – दिक्षा बागदरे: Moral Stories in Hindi

New Project 96

दादी जी कहती थी मैं राधिका जी को। वह एक सरकारी स्कूल मै शिक्षिका थी। मेरा शुरू से ही स्वभाव रहा है कि मैं अपने आसपास बाजार में महिलाओं से, बच्चों से  सामान्य बातचीत कर ही लेती हूं। इसका मतलब यह नहीं कि मैं हर किसी से बात कर लेती हूं पर हां  विशेष तौर … Read more

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