सीमालोघन रामू का – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 57

  हे, पार्वती,तू तो चली गयी,और मुझे छोड़ गयी, इस जलालत भरे जीवन भोगने को।मैं इतना कमजोर क्यूँ हूँ, जो मरने से डर जाता हूँ।      पत्नी के फोटो के सामने खड़े शंकरलाल, ऐसे ही अक्सर अपनी पीड़ा अपनी स्वर्गीय पत्नी के फोटो के सामने व्यक्त करते रहते।बिल्कुल चुपचाप कमरे को बंद करके।पर कमरे की खिड़की से … Read more

नयी कहानी – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 47

  अरे,ये कौन है,किसने मेरी आँखें बंद की है।ये तो मेरा शैतान बच्चा लगता है।        हूँ-हूँ, दादू आप मुझे हर बार पहचान लेते हैं।क्या आपके पीछे भी आंखे हैं?       मेरे बच्चे, दादू के चारो तरफ आंखे हैं, पर वे तुझे ही देख पाती है।     दादू दादू आज तो आपको मुझे कोई कहानी सुनानी ही पड़ेगी।और हां … Read more

जीवन का जहर – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 50

 जीवन है अगर तो जहर पीना ही पड़ेगा         मदर इंडिया फ़िल्म का यह गाना कानो में गूंज रहा था,और सरला की जीभ पर तो आज मानो सरस्वती मां विराजित हो गयी थी,बहुत ही कम बोलने वाली सरला को इतना मुखर पहले कभी भी किसी ने नही देखा था।       देखो मैं मानती हूं बुरे समय मे … Read more

*नयी सुबह* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 49

अरे, बहन तुम तो प्रैग्नेंट हो,कैसे ऊपर की बर्थ पर चढ़ोगी,तुम्हे कोशिश भी नही करनी चाहिये।देखो मेरी बर्थ नीचे वाली है, तुम इस पर लेट जाओ,मैं ऊपर चली जाती हूँ।      बहन जी आपकी बड़ी मेहरबानी, मैं कहते झिझक रही थी।      आपके पति साथ नही आये।आपको सामान आदि रखने उठाने में परेशानी नही होगी क्या?         मैं … Read more

स्वयं की कीमत का समझना – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 98

 अरे अंशू पिछले एक सप्ताह से  तुम ऑफिस आ ही नही रहे हो, क्या बात है?सब ठीक तो है हाँ अंकल सब ठीक है,वो मैंने आपकी वाली कंपनी को छोड़ दिया है,त्याग पत्र कुरियर कर दिया है,मिल जायेगा। लेकिन बात क्या हुई?अगर वेतन की बात है तो मैं डायरेक्टर साहब से बात करता हूँ,तुम  कल … Read more

किस्मत मुट्ठी में – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 99

मेरी बात मान ले यशोदा, जब खसम ही दगा दे गया तो तू भी किसी के साथ बैठ जा।कम से कम तेरा तथा इस नन्ही जान का पेट तो भरता रहेगा। क्या कह रही हो बुआ,आदमी लंपट निकल गया तो क्या मैं भी वेश्या बन जाऊं?ऐसे ही किसी के साथ बैठ जाऊं।बुआ भगवान ने पेट … Read more

सुहानी पवन – बालेश्वर गुप्ता   : Moral Stories in Hindi

New Project 44

पापा पापा, क्या मम्मी कभी नही आयेंगी, भगवान के घर ही रहेगी? हाँ मेरी बच्ची,तेरी मां को भगवान ने अपनी बेटी बना लिया है ना,वो अब नही भेजेंगे।पर तू ऐसा क्यों पूछती है, मैं हूँ ना। पर पापा, सब ऐसा क्यूँ कहते हैं, मैं पैदा होते ही माँ को खा गयी?भला बच्चे माँ को खाते … Read more

नमकहराम – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 56

 1960 के दशक में मेरे घर मे काम करने के लिये मेरे पिता ने दुर्गा नामक अधेड़ व्यक्ति को नियुक्त किया था।मेरे पिता का ईंटो के भट्टो का व्यापार था,सामाजिक होने के कारण घर पर काफी लोगो का आवागमन रहता था, इसलिये मेरे पिता ने अपने विश्वासपात्र दुर्गा को भट्टे पर मजदूरी करने से हटाकर … Read more

भेड़ की खाल में भेड़िया – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 49

अंकल आपको शर्म आनी चाहिये।पापा आप पर कितना विश्वास करते हैं, और आप—-?छी.. मुझे तो आपसे घिन आ रही है।खबरदार जो आप  अब मेरे पास आये ।         रोहित को चिंता थी,अपनी बड़ी होती बेटी शुभ्रा की।जब तक वह उनके पास रह कर पढ़ रही थी तो वे बेफिक्र थे, पर जब अब वह अपनी उच्च … Read more

दुराव – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 77

पीछे से भैय्या भैय्या की जानी पहचानी आवाज सुन शंकर ठिठक कर रुक गया, अरे ये आवाज तो पलक की है।शंकर का अनुमान सही था,पलक ही शंकर को पुकार रही थी। शंकर भैय्या, मैं कब से आपको ढूंढ रही हूं,रुआँसी पलक  बोली।क्या बात है,पलक,सब ठीक तो है,परेशान सी लग रही हो? शंकर और मनु दोनो … Read more

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