बाबू काका का दर्द – बालेश्वर गुप्ता  : Moral Stories in Hindi

New Project 38

बाबू काका क्या हुआ है आपको,इतने कमजोर?किसी डॉक्टर को दिखाया या नही?         बहुत क्षीण आवाज में बोले,बेटा कुछ नही बुखार आ गया था,कमजोरी के कारण उठा नही गया,डॉक्टर के पास कैसे जाता भला?        मुझे ही खबर भेज देते,मैं तो आ ही जाता।       तुम्हारा नंबर मिला ही नही,बुढापा है ना,पता नही कहाँ लिखा या रखा।      ओह, … Read more

*अंगना का फूल* – बालेश्वर गुप्ता   : Moral Stories in Hindi

New Project 35

  जगरु चाचा आज बेहद खुश थे, उनके पावँ जमीन पर पड़ ही नही रहे थे।अपनी खुशी का इजहार हर किसी को कैसे करे,उन्हें समझ नही आ रहा था।बस हर जानने वाले को रोक लेते और बताने लगते कि उनका मुन्ना आ रहा है, सुना तुमने मुन्ना यही आ रहा है,अब वो मेरे पास ही रहेगा।कहते … Read more

आन बान या अवसान – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 60

भैय्या-भैय्या, आज रक्षाबंधन है,क्या मैं आपको राखी बांध दूँ?        अरे,भैय्या-भैय्या पुकारती हो,तो फिर राखी क्यो नही बाँधोगी, इसमें पूछने वाली कौनसी बात है?ले बांध ना राखी?        शायद 1973-1974 का ही घटनाक्रम है,मेरे ही घर के एक पोर्शन में हमारे ही कस्बे के पास के एक गांव का किसान परिवार किराये पर रहने को आया।मेरे पिता … Read more

*निराला ठग* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 78

 मानसी, मेरे प्रेम की इतनी कड़ी परीक्षा मत लो।तुम जानती तो हो,माँ ने मुझे कितने कष्टों से पढ़ाया लिखाया है।साथ ही खुद्दारी से जीने के संस्कार भी तो दिये हैं।      तभी तो तुम्हे समझा रही हूं,मानस।तुम्हारी एक हां, हमारा जीवन संवार देगी।देख लेना माँ भी खुश ही होंगी।      मानसी न तुम मुझे समझ पा रही … Read more

पिघलती बर्फ – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 84

आज फिर शांति बुआ आनेवाली थी,मैं तो खुश था,पर मम्मी अशांत थी।शांति बुआ यूँ तो हर वर्ष 15-20दिनों के लिये आती ही थी,मेरी उनसे खूब पटती थी,मैं उनसे भगवान राम,कृष्ण लीला एवं रावण,कंस वध आदि आदि की कहानियां सुना करता,मुझे ये कहानियां सुनने में खूब मजा आता था,बुआ भी खूब चाव से सुनाती थी। उन्हें … Read more

 अपना धन-पराया धन – बालेश्वर गुप्ता  : Moral Stories in Hindi

New Project 77

 सुनो विवेक,मेरा रिज़र्वेशन कैंसल करा दो,मैं मम्मी के यहां नही जा रही हूँ। क्यों क्या हुआ शालिनी?तुमने ही तो कहा था,बहुत दिन हो गये, भैया भाभी,मम्मी के पास गये।तुम क्या देख नही रहे हो,माँ को परसो से बुखार है,भला ऐसे में मैं कैसे जा सकती हूँ? अरे माँ के पास तो शिखा आ जायेगी।उनकी बेटी … Read more

वरदान – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 47

    अरे बबुआ कब तक यूँ ही निट्ठल्ला  पड़ा रहेगा।घर से निकल, जा कही कोई  नौकरी वोकरी ढूंढ।      मैं क्या करूँ बापू?सब जगह दरख्वास्त भेज रहा हूं, पर नौकरी मिलना तो दूर,कोई इंटरव्यू को भी नही बुला रहा।        तो बबुआ एक काम कर तू नोयडा चला जा।वहां छीलेरा गावँ में तेरा चाचा रहवै है, वो तुझे  … Read more

*एक दूजे के लिये* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 37

 पूजा नही आयी ना, माँ?मन नही मानता वह इस प्रकार मुँह मोड़ लेगी।        बेटा, तू उसका ख्याल छोड़ दे।सपने सभी सच हो ये जरूरी तो नही।बस तू जल्द ठीक हो जा,बेटे।       मैं क्या करूँ माँ?पूजा का चेहरा मेरी आँखों के आगे से हटता ही नही।कहते कहते सचिन बिलख पड़ा।       माँ ने सचिन को अपने मे … Read more

नया सवेरा – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 56

 देखो सुजीत, पापा अब रिटायर हो गये हैं, मैं इस उम्र में अब उन्हें अपने पास रखना चाहता हूँ।यहां अकेले रहेंगे ये उचित नही होगा।    ठीक है भैय्या ऐसा करते हैं, पापा को आप अपने पास रख लो और मम्मी को मैं अपने साथ ले जाता हूँ।       नहीं-नहीं, दोनो अलग अलग कैसे रह सकते हैं,ये … Read more

*पहली मुस्कान*- बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 2024 04 29T215107.227

  बताओ ना चाचा मेरे साथ ही ऐसा सब क्यूँ होता है?अभागन हूँ ना,तभी तो?        अरे, नहीं-नहीं मेरी बच्ची,कौन कहता है तू अभागन है,देखना तेरे भाग से सब ईर्ष्या करेंगे।भगवान सब ठीक कर देंगे।        चाचा,मेरे मन को तस्सली दे रहो ना,जबकि आप जानते हो,मेरे आगे आगे मेरा दुर्भाग्य ही चलता है।चलना भी सीखा नही था कि … Read more

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