स्वाभिमान – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 36

  एक बात बोलूं राजीव,मैं चाहती हूं हम अपने घर मे अपने कस्बे में ही शिफ्ट कर ले।मेरा मन यहां नही लगता।मुन्ना के स्कूल की बस तो अब वहां भी आने लगी है,हमारा मुन्ना अब स्कूल बस से स्कूल आ सकता है।         अचानक शिवि के मुख से ये बात सुन राजीव हक्का बक्का रह गया।शिवि क्या … Read more

*हत्या एक विश्वास की* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 60

     अमावस की रात, कड़ाके की ठंड दिसंबर का सर्द महीना, सब अपने अपने घरों में रजाइयों में लिपटे बंद, ऐसे घनेरे अंधेरे में सन्नाटे को चीरती रुदन की आवाज ने पूरी गली को झकझोर दिया।कोई न कोई तो अनहोनी हुई है, तभी तो इतनी सर्दी में भी यह रुदन।गली के अधिकांश लोगों की निद्रा के … Read more

आशियाना – बालेश्वर गुप्ता   : Moral Stories in Hindi

New Project 44

  जानती हो गुड़िया की माँ,हमारी गुड़िया सचमुच में लक्ष्मी है,इसका घर मे आना हुआ उधर मालिक ने बहुत कम कीमत पर वो छोटा सा प्लाट दे दिया।अब हम धीरे धीरे अपना घर बना लेंगे।हमारी गुड़िया बहुत भागवान है,री।      अरे ये तो बहुत ही अच्छा हो गया।अब हमारा भी घर हो जायेगा।कब से अपने घर का … Read more

*फटे में टांग अड़ाना* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 50

    हरिया आज फिर मेरे पास आया और फिर पुरानी व्यथा सुनाने लगा कि कैसे उसका भाई और भतीजा उसके जमीन के चक को हड़पने की चाल चल रहे है।मेरी समझ नही आ रहा था कैसे उसकी मदद करूँ?फिर भी मुझे उसकी बात सुन उससे सहानुभूति होती।       एक दिन मैं स्वयं गावँ के पटवारी के पास … Read more

*समय चक्र* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 59

  रोशन लाल एक मेहनती और ईमानदार व्यक्ति थे।उनके दो बेटे थे-रमाकांत और सूर्यकांत।सामान्य सी परचून की दुकान से रोशन लाल ने अपने दोनो बेटों की अच्छी परवरिश की और उनकी पढ़ाई लिखाई में कोई कमी न आने दी।दोनो बेटे अपने पिता की मेहनत लगन से अनभिज्ञ तो थे नही,सो पढ़ाई से बचे समय मे पिता … Read more

सूनी कलाई पर राखी – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 84

    ताशकंद में अपने प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का निधन हो गया था,उनका पार्थिव शरीर भारत अगले दिन यानि 12 जनवरी 1966 को लाया जा रहा था,हवाई अड्डे से उनकी शव यात्रा प्रारंभ होनी थी।मार्ग में दोनो ओर हजारों की संख्या में लोग अश्रुपूरित श्रंद्धाजलि देने एवम उनके अंतिम दर्शन को खड़े थे।मेरठ से 16 … Read more

*गंगा स्नान* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 98

जुहार बड़े सरकार।  अरे,गिरधर बड़ा आदमी हो गया है,अब तेरा इधर आना ही नही होता।अब भी बुलाने पर ही आया है।      सरकार, आप तो जाने है,मुन्ना शहर में नौकरी करने लगा है,उसके पास भी जाना लगा रहता है,और यहां भी सरकार आप की मेहरबानी से मिले जमीन के टुकड़े में बुआई,निडाई में लगना पड़ता है, … Read more

*करमजला* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 42

अरे करम जले कुछ तो सोचा होता,सारे कस्बे में थू थू हो रही है।हमे तो तूने कही मुँह दिखाने लायक भी नही छोड़ा।        माँ, क्या कह रही तू,तुझे क्या अपने राजू पर जरा भी यकीन नही है, क्या मैं ऐसा कोई काम करूंगा जिसे हम पर धब्बा लगे?      तो बता क्या आजकल तू उस हरिजन … Read more

खिंचाव माटी का – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 86

 तेजस जी के बहनोई सुनील अमेरिका में जॉब करते थे।जब कभी भारत आते तो तेजस जी से भी मिलने आते।खूब सारे अमेरिकन गिफ्ट भी लाते।तेजस जी को किसी चीज की कमी नही थी खुद सम्पन्न थे,पर जब सुनील अमेरिकन गिफ्ट लाते तो उनमें एक हीन भावना घर जाती।एक कशिश दिल मे उठ जाती कि वे … Read more

*लौटता वजूद* – बालेश्वर गुप्ता  : Moral Stories in Hindi

New Project 100

  सच कहूं सुचि, मैं शादी करना ही नही चाहती।मेरे मन मे हमेशा एक डर सा बैठा रहता है, मैं भयभीत रहती हूं।        शालू कैसी बहकी बहकी बाते कर रही हो।तुम्हे किस बात का डर?अरे शादी तो एक दिन सभी को करनी ही होती है।        सुचि की बात सुनकर शालू चुप हो गयी।वो अपने मन की … Read more

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