पूर्णमासी की रजनी – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi
अरे तेजू ये क्या तेरी बिटिया है? हां, बाबूजी मैं बापू की बिटिया ही हूँ।बापू आज घर पर ही खाने का टिफिन भूल बआये थे,इसीलिए मैं टिफिन ले आयी। अच्छा किया बेटा।तुम तो पढ़ी लिखी लगती हो? हां,बाबूजी पढ़ी लिखी तो हूँ,इंटर पास किया है,मैंने, आगे भी पढ़ना चाहती थी,पर पढ़ न सकी,बी.ए. प्राईवेट करूँगी। … Read more