नियति का रंग – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 50

 देखो मनीष,कुसुम मेरी बहू है,पर जब वह वंश बढ़ाने में सक्षम नही है,मुझे पोता नही दे सकती,मां ही नही बन सकती तो कुछ तो सोचना पड़ेगा ना।वह घर मे रहे मुझे आपत्ति नही,पर तुझे दूसरा ब्याह करना ही पड़ेगा।समझ रहा है ना तू? मैं सब समझ रहा हूँ माँ, तुम्हारा आशय यह है कि जिस … Read more

जिंदगी रोबोट सी – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 84

बेटी अब ससुराल ही तेरा घर है, मायके में तो तू मेहमान है-यही कहा था ना माँ। जिसके साथ गठबंधन कर रिश्ता जोड़ा था, वह तो हर दूसरे दिन चोटी पकड़कर घर से निकल जाने की धौंस देता है, बता ना मां तू किस घर की बात कर रही थी? क्या ऐसा ही होता है … Read more

आशंकित आंखे – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 100

 भैय्या मैंने आपका सूटकेस ऊपर के कमरे में रख दिया है,आप और भाभी वही आराम करना। अरे ठीक है अन्नू,अपना घर है,कही भी कैसे भी रहे,क्या फर्क पड़ता है।बाबूजी के जाने के बाद उनकी याद तो यहां आकर आती ही है, पर अन्नू तेरा प्यार और सम्मान पाकर यहाँ अपनापन लगता है।      बंसीधर जी के … Read more

अपना अपना धर्म – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 69

अपना नाम सुन वीरेन ठिठक गया।दरवाजा खुला था,सो पहले की तरह वह अंदर चला गया।धीरेंद्र अपनी पत्नी को समझा रहा था, देखो वीरेन की नौकरी भी कोविड के समय चली गयी है, इस समय बेरोजगार है,जरूरतमंद है,पता नही मिलते ही क्या डिमांड कर दे,मैं तो इसीलिये उससे मिलने से कतराता हूँ।ध्यान रखना मेरे पीछे आये … Read more

ईश्वर दृष्टि – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 44

 आधुनिक व्यापारिक गुर सिखाते हुए शांतिशरण अपने पुत्र  हेमंत के साथ हरिद्वार पहुँचे।हर की पौड़ी पर भरपूर गंगा स्नान के बाद वही सामने मोहन पूरी वाले के यहां बाप बेटे हलवा पूरी का नाश्ता करने पहुँचे।पहले बेटा हेमंत ने आगे बढ़कर हलवा पूरी ली और एक ओर खड़ा होकर खाने लगा।उसके बाद में पिता शांतिशरण … Read more

अर्पिता का अर्पण – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 11

 देखो बेटा जिससे तुम शादी करना चाहते हो वह न तो हमारी बिरादरी की है,न हमारे प्रदेश की।और तो और उसकी भाषा भी हमारी हिंदी नही है।रीति रिवाज सब अलग।कैसे परिवार में एडजस्ट हो पायेगी, अरे परिवार की भी छोड़ तेरे साथ ही कैसे निभेगी?        ऐसा कुछ भी नही माँ, एक बार अर्पिता से मिल … Read more

सॉफ्ट टारगेट – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

New Project 41

विद्यासागर जी पुराने जमीदार थे।कभी उनकी तूती बोलती थी।शान शौकत तो थी ही,साथ ही विद्यासागर जी का रूवाब बेइंतिहा था।जिधर से निकल जाते थे,उधर ही उनकी रियाया सर झुका कर खड़ी हो जाती।इतना होने पर भी विद्यासागर जी रहम दिल थे,अपनी रियाया के प्रति हमदर्दी रखते थे। जमीदारी उन्मूलन के बाद सब रुतबा खत्म,बस मजदूरी … Read more

बंद आंखों से बहते आंसू – बालेश्वर गुप्ता Moral Stories in Hindi

New Project 68

हतप्रभ सी यशोदा कभी तो अपने बेटे राजू की ओर तो कभी उसके साथ आयी सोनी को देख रही थी।वे उससे आशीर्वाद मांग रहे थे,पर यशोदा तो मानो पथ्थर की हो गयी थी।        राजू और सोनी की मुलाकात ऐसे ही अचानक राजू के आफिस में ही हो गयी थी।सोनी नगर के उद्योग पति सेठ हीरालाल … Read more

माधवी का पुनर्जन्म – बालेश्वर गुप्ता Moral Stories in Hindi

New Project 58

    मेरठ से बृजघाट गंगा की दूरी मात्र 55 किलोमीटर है।पिछले वर्ष से आनंद जी के घुटनो में जो समस्या पैदा हुई तो उनका चलना ही दूभर हो गया।दुकान पर भी मुश्किल से ही जा पाते।घर के आंगन में चारपाई पर लेटे रहते थे।बृजघाट जाने के लिये आनंद जी ने टैक्सी की,स्टिक की सहायता से घर … Read more

खुशनुमा बयार – बालेश्वर गुप्ता Moral Stories in Hindi

New Project 58

मानसी-मानसी, खुश खबरी, कल पापा हमारे पास आ रहे है,तीन दिन रहेंगे।ओह, पापा, आपने हमे माफ कर दिया,इससे बढ़कर हमारे लिये कुछ भी नही।      क्यों, राजेश क्या अब मेरी बिरादरी बदल गयी है जो दो वर्ष पहले मुझे ताना देकर सुनाई गई थी,या अब अपने बेटे से कुछ जरूरत आन पड़ी है?        ये कैसा रिएक्शन … Read more

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