कुटील चाल (भाग-8) – अविनाश स आठल्ये : Moral stories in hindi

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अनुराधा का आज पूरा दिन ऑफिस में सहकर्मियों और शुभ चिंतकों की बधाइयां लेते हुए गुज़रा, कुमार सर किसी अन्य कार्य में व्यस्त होने के कारण उसे ट्रेंनिग देने नहीं आ सके थे, इसलिए शाम को ऑफिस खत्म होते-होते उसने अपने ऑफिस के फ़ोन से ही घर में पिताजी से बात की उसके पिता वीरेश्वर … Read more

कुटील चाल (भाग-7) – अविनाश स आठल्ये : Moral stories in hindi

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इंस्पेक्टर विनोद कुशवाहा और कुमार सर, अनुराधा के साथ ही कमिश्नर साहेब के निर्देशानुसार उनके गाज़ियाबाद में बने अस्थाई कमिश्नर ऑफिस में ही आ गए थे, दरअसल कमिश्नर साहेब का हेड क्वार्टर तो मेरठ में था, परंतु केंद्र सरकार के द्वारा निर्देशित अति गोपनीय ऑपरेशन के क्रियान्वयन के लिए उन्होंने अस्थाई तौर पर एक कार्यालय … Read more

कुटील चाल (भाग-6) – अविनाश स आठल्ये : Moral stories in hindi

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अनुराधा यूँ ही बेड पर लेटे-लेटे कुमार सर के बारे में सोचते हुए कब सो गई उसे पता ही न चला, सुबह जल्दी जल्दी तैयार होकर वह ऑफिस जाने को निकली ही थी, तभी उसे याद आया कि कल उसने अपने पापा को शाम को तो फ़ोन ही नहीं किया था, पिछले दो वर्ष में … Read more

कुटील चाल (भाग-5) – अविनाश स आठल्ये : Moral stories in hindi

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जिस तरह अच्छे दिन जल्दी गुज़र जाते हैं उसी तरह बुरा वक्त भी निकल ही जाता है, अनुराधा के बिना भी वीरेश्वर मिश्रा, उनके मित्र भास्कर राव त्रिवेदी और सुलक्षणा का वक्त भी लखनऊ में उनके “ओल्ड होम” में वृद्धजनों की सेवा एवम् अन्य समाजसेवी कार्य करते हुए धीरे धीरे बीत रहा था, त्यौहारों में … Read more

कुटील चाल (भाग-4) – अविनाश स आठल्ये : Moral stories in hindi

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घर आकर अगले दिन सुलक्षणा ने भास्कर राव त्रिवेदी जी को नोएडा जाने की बात याद दिलाई , तो वह सीधा वीरेश्वर मिश्रा के कमरे में चले गए, और बोले दोस्त हमें यहां आए हुए लगभग 20-25 दिन हो चुके हैं, कभी लगा ही नहीं की हम अपने घर में नहीं है, और बेटी अनुराधा … Read more

कुटील चाल (भाग-3) – अविनाश स आठल्ये : Moral stories in hindi

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दूसरे दिन जब भास्कर राव त्रिवेदी पत्नी सुलक्षणा के साथ, वीरेश्वर मिश्रा से अपने घर दिल्ली में वापस जाने की इजाज़त मांगने के लिए उनके कमरे में गए, तो देखा कि वीरेश्वर मिश्रा अभी-अभी आए एक टेलीग्राम को पढ़ रहे थे। उनकी आँखों में आँसू देखकर किसी अनहोनी कि आशंका से भास्कर राव त्रिवेदी ने … Read more

कुटील चाल (भाग-2) – अविनाश स आठल्ये : Moral stories in hindi

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भरे हुए मन से अरविंद अपने घर पहुंचता है, वह गुस्से से माँ की तऱफ नफ़रत भरी निगाह से देख रहा था, उसने ऑफिस से घर आकर शाम की चाय भी नहीं पी,अनमने ढंग से खाना खाकर अरविंद एक पलँग पर लेट गया, वह परेशान सा एक टक कमरे की छत को देख रहा था, … Read more

कुटील चाल – अविनाश स आठल्ये : Moral stories in hindi

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भास्कर राव त्रिवेदी जी इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जज के पद पर आसीन थे, उनकी ईमानदारी ही उनकी दौलत थी, उनके कार्यकाल के दौरान ही उन्हें करोड़ों रुपए की रिश्वत के ऑफर मिले होंगे उनको, फिर भी कभी कोई उनको सच्चे फ़ैसले से नहीं डिगा पाया, छोटा सा परिवार था उनका, पतिव्रता पत्नी सुलक्षणा और … Read more

तर्पण – अविनाश स आठल्ये : Moral Stories in Hindi

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Moral Stories in Hindi : पिताजी का “विधि विधान से पण्डित जी की मदद से तर्पण करके, अतुल ऑफिस जाने के लिये अपनी कार स्टार्ट कर ही रहा था कि माँ ने उसे रोककर एक पैकेट देकर बोला.. बेटा, तू  ही ऑफिस जा रहा तो यह केले और बिस्कुट के पैकेट लेते जा, रास्ते में … Read more

वो बुला रही है मुझे” (अंतिम भाग ) – अविनाश स आठल्ये : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : मित्रों कल पोस्ट की हुई इस कहानी में आपने पढ़ा कि नन्हा बालक माधव अपने पिता की सीख “यह पेड़ हमारा साथी बनकर आजीवन साथ देगा” को मन में गाँठ बानकर रख लेता है, वह उस पेड़ की अच्छे से देखभाल करता है, 12-13 वर्षों में माधव युवा हो चुका … Read more

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