अगर बहू नौकरी करें बुरा क्या है-Mukesh Kumar

शाम के 5 बज रहे थे ममता जी टीवी देख रही थीं तभी उनकी बहू चंचल ने कहा “मां जी  मैं बाजार जा रही हूं सब्जी खरीदने तब तक आप इस चावल में से कंकड़ पत्थर चुन लीजिए।”  बहू के जाते ही ममता जी ने चावल से कंकड़ चुनना शुरू कर दिया था तभी दरवाजे पर घंटी बजी ममता जी ने बोला दरवाजा खुला है अंदर आ जाओ।

दरवाजा खुलते ही ममता जी ने बोला अरे शीतल तुम तुम अचानक कैसे? शीतल ममता जी की ननद थी।

शीतल ने बताया अरे भाभी क्या बताऊं “आई थी मैं अपना इलाज कराने और सोचा था इलाज कराकर शाम को ही वापस गाँव चली जाऊंगी लेकिन डॉक्टर ने कल सुबह फिर आने को बोला है और सुबह-सुबह पता नहीं क्या जांच करने को बोला है तो मैंने सोचा अब फिर यहां से गांव जाऊंगी और आने में काफी समय लग जाएगा तो सोचा यही रुक जाती हूं।

 ममता जी बोली कि तुमने फोन क्यों नहीं किया मेरी बहुत चंचल तुम्हें लेने चली जाती।  शीतल बोली अरे भाभी अब मैं कहां किसको परेशान करती मैंने सोचा अपना ही घर है कोई ढूंढना तो है नहीं मैंने सीधा रिक्शा लिया और आ गई।



भाभी यह बताओ आपकी बहु शीतल नहीं दिख रही है कहां गई है।  अरे अभी कुछ देर पहले ही बाजार गई है सब्जी खरीदने के लिए। तो मैंने सोचा कि चावल में से कंकड़ चुन लेती हूं ताकि बहू को ज्यादा परेशानी नहीं हो अब मुझसे खड़ा होकर कोई काम तो होता नहीं। जितना हो सके बहू की मदद कर देती हूं।

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शीतल बोली “भाभी आप भी ना क्या? पूरी जिंदगी काम ही करती रहेंगी यह सब तो आजकल की बहुओं की चोचलें हैं कोई ना कोई काम के बहाने सास को उलझाये रखो।  भाभी मैं आपसे कह दे रही हूं कि आप इन बहुओं को झांसे को समझा करो और चुपचाप घर में रहा करो आख़िर बहू किस लिए ब्याह कर लाई हो जब खुद ही करना है तो।  इसका क्या भरोसा कल को कहने लगे कि कि मैं नौकरी करूंगी और घर का काम आप से करवाने लगेगी।

भाभी अभी से ही सजग हो जाइए नहीं तो बहुत पछताना पड़ेगा आपको पता है कि नहीं मेरी बहू भी नौकरी करती थी लेकिन जब उसका बच्चा हुआ तो मैं तो बिल्कुल भी उसकी सहायता नहीं करती थी।  वह सोचती थी कि बच्चा छोड़ कर नौकरी करने चले जाए और मैं क्या उसके बच्चे की दाई हूं जो दिन भर उसके बच्चे का लैट्रिन धोती रहूं मैंने भी मना कर दिया और मैं उसे अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी।  पूरी जिंदगी काम करते रहेंगे आखिर बेटा इसी लिए तो पैदा करता है की जब उसका ब्याह होग और बहू आएगी तो थोड़ा आराम मिलेगा।

ममता जी बोली “शीतल तुमने यह बहुत ही गलत किया जो तुमने अपने बहु की नौकरी छुड़वा दी।  आखिर तुम भी उसकी दादी लगती थी अब दादी अपने पोते की सेवा नहीं करेगी तो कौन करेगी और जहां तक रही मेरी बहू का सवाल तो यह भी बेचारी सुबह से लेकर रात के 11बजे तक लगी रहती है सुबह उठते ही पूरे घर की साफ-सफाई करना फिर बच्चों को जगा कर उनको फ्रेश कराना और उनको स्कूल भेजकर नाश्ता बनाती है।  फिर साहिल के लिए नाश्ता तैयार कर ऑफिस भेजती है फिर उसके बाद मेरी और तुम्हारे भैया की सेवा में लग जाती है। उसके बाद अपने एलएलबी की तैयारी करती है फिर दोपहर में खाना बनाना बच्चों को स्कूल से लेकर आना कितना कुछ नहीं करती है और फिर भी तुम कहती हो बहु कुछ नहीं करती है।



मैं तो  भगवान की शुक्र मनाऊंगी कि मुझे इतनी संस्कारी बहू मिली है जो कभी भी अपनी मां से मुझे कम नहीं समझती है बहू के शादी से पहले तो तुम्हें पता ही है कि जब मेरा पैर टूट गया था तो डॉक्टर ने साफ मना कर दिया था कि मैं पूरी जिंदगी अब चल नहीं पाऊंगी लेकिन बहू ने इतना सेवा किया कि आज मैं पूरी तरह से तो नहीं लेकिन थोड़ा बहुत तो चल ही लेती हूं कि अपना नित्य क्रिया कर्म तो कर लेती हूं।

शीतल बोली भाभी लगता है कि चंचल ने आपको अपने मोह-पास में फंसा ही लिया है मैं तो कहती हूं कि आप उसके  चिकनी-चुपड़ी बातों में ना आए तो ही अच्छा है। मैंने तो अपनी बेटी को भी इसीलिए ज्यादा पढ़ाया नहीं कि बेटियों को कौन सा नौकरी करना होता है ससुराल जाएगी घर का ही तो काम करना है बस दसवीं पास कराया है मैंने।

ममता जी बोली कि भाई देखो तुम्हारी बेटी है तुम्हारी मर्जी  पदाओ या नहीं लेकिन मैं तो लड़कियों को बहुत पढ़ाना चाहती हूं मैं तो अपनी बहू को एलएलबी पढ़ा रही हूं और मुझे वकील बनने का बहुत शौक था मैं तो अपनी शौक पूरा नहीं कर पाई लेकिन मैं अपनी बहू को वकील ज़रूर बनाऊंगी।  देखो शीतल रिश्ते हमेशा समझदारी से चलते हैं अगर तुम अपने बहू को ज्यादा रोक- टोक करोगी तो वह भी तुम्हारी इज्जत नहीं करेगी और फिर लोग कहते हैं कि सास कभी मां नहीं बन सकती है तो कैसे बनेगी मां जब तुम माँ वाले काम ही नहीं करोगी।

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तभी  चंचल बाजार से सब्जी लेकर आ गई।  देखा कि घर पर उसके पति के बुआ शीतल आई हुई थी उसने अपने बुआ का पैर छुआ और बोला अरे बुआ जी आप कब आईं  एक फोन तो कर देती स्टेशन आपको लेने आ जाती।

इतने पर शीतल भड़क गई और बोली ऐसी बात कर रही हो बहू जैसे यह मेरा घर ही नहीं है क्या मेरा घर देखा हुआ नहीं है। चंचल बोली नहीं बुआ जी मैंने कब कहा कि आपका घर नहीं है पहले तो यह आपका घर है बाद में मेरा आपकी आसानी के लिए मैंने बोला।  चंचल बोली “चाय-पानी लेकर आती हूं बुआ जी।”



चंचल के जाते ही शीतल ने अपनी भाभी ममता से कहां देखा  भाभी इसे कैसी बात कर रही है ऐसा लग रहा है जैसे यह मेरा घर ही नहीं हो मेरी शादी क्या हो गई यह तो मेरा मायका ही छुड़ाना चाहती है।  ममता जी बोली शीतल बहु का मतलब यह नहीं था वह तो तुमसे प्यार से ही पूछ रही थी।

समय बीता और एलएलबी का रिजल्ट आ गया और चंचल अच्छे नंबरों से एलएलबी पास हुई थी घर में सब खुश थे चंचल के पति महेश भी और ममता जी तो कुछ ज्यादा ही खुश थी क्योंकि आज चंचल अपने सासू मां का सपना जो पूरा करने जा रही थी।  कुछ दिनों के बाद ही चंचल शहर के मशहूर वकील के साथ काम करना शुरू कर दिया था और धीरे-धीरे अपने काबिलियत की वजह से कई सारे केस जीत गई और शहर में चंचल का नाम होता गया।

कुछ सालों के प्रैक्टिस के बाद चंचल ने अपना खुद का ही ला फर्म खोल लिया था और अपने अंडर में जूनियर वकील को भी रख लिया था।  चंचल का शहर में अच्छा खासा नाम हो गया था चंचल बहुत कम ही कोई केस हारती थी।

एक  दिन चंचल जब कोर्ट से घर आई तो देखी कि उसकी बुआ शीतल आई हुई थी और वह बहुत ही रो रही थी पता चला कि शीतल की बेटी को ससुराल वालों ने बहुत बुरी तरह से मारपीट कर घर से निकाल दिया है और वह उसे अपने ससुराल में भी रहने नहीं दे रहे हैं।  चंचल एक अच्छा वकील थी इस वजह से शीतल यहां आई हुई थी।

चंचल ने अपनी बुआ शीतल को हिम्मत दिया और बोला था आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं मैं रोशनी को उसका हक दिलवा के रहूंगी।

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अगले दिन ही चंचल ने रोशनी को थाने ले जाकर एफ आई आर दर्ज करवाया और उसके ससुराल वाले पर हत्या का केस फाइल करवाई।चंचल ने ऐसा कोशिश की कि रोशनी का घर ना उजड़े इसके लिए उसने सबसे पहले तो रोशनी के पति विवेक से बात की और उसको मामला बताया कि तुम क्या चाहते हो रोशनी को तुम अपने साथ रखना चाहते हो या नहीं।   



रोशनी का पति विवेक बोला भाभी मैं रोशनी से बहुत प्यार करता हूं और रोशनी को अपने साथ रखता हूं लेकिन मेरी मां और बहने उसे बहुत ही प्रताड़ित करती हैं मैं जब नौकरी करने चला जाता हूं तो उसे बहुत मारते-पीटते हैं मुझे समझ नहीं आता है क्या करूं।

चंचल को जब यह बात समझ आ गई कि विवेक रोशनी को बहुत पसंद करता है तो उसने उसके घर वालों पर केस दर्ज किया और विवेक को एक अलग  घर लेकर रोशनी के साथ रहने की सलाह दी। और ऐसा ही हुआ विवेक अपनी पत्नी रोशनी के साथ अलग रहने लगा और उनका जीवन खुशी-खुशी में बिताने लगा।  अब रोशनी भी अपनी जिंदगी खुशी से गुजारने लगी।

जब सब कुछ नॉर्मल हो गया तो शीतल यानी चंचल की बुआ एक दिन  अपने मायके आई और चंचल को शुक्रिया अदा किया और कहा की बेटी आज तुम नहीं होती तो मेरी बेटी का घर उजड़ गया होता तुम्हारे कारण ही रोशनी आज फिर से अपनी खुशी-खुशी जिंदगी गुजार रही है । उसने अपने भाभी ममता जी को भी शुक्रिया अदा की भाभी काश मैं भी आज अपनी बेटी को पढ़ाई होती तो वह भी कुछ ना कुछ कर रही होती और अपने पैरों पर खड़ा होती लेकिन मैं आज एक बात यहां से सीखकर जा रही हूं। मैं अपनी बहू को वह सब आजादी दूंगी जो वो करना चाहती है

ममता जी ने शीतल को गले लगाया और कहा चलो कोई बात नहीं देर से ही सही यह बात तुम्हें समझ तो आई क्यों की बहू और बेटी में कोई अंतर नहीं है अगर बहू को भी पंख लगाओगे तो बहू भी उतना ही उड़ेगी जितनी की बेटी।  

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