आख़िर कब तक चुप रहती निशा , पिछले 25 सालों से चुप ही तो है लेकिन आज उसने अपने पिता के ख़िलाफ़ न सिर्फ़ आवाज़ उठाई बल्कि अपनी माँ पर उठता हुआ पिता का हाथ भी पकड़ कर झटक दिया।
25 की हो गई है निशा लेकिन आज तक उसने कभी पिता का रूप नहीं देखा कि कैसा होता है पिता. बचपन से लेकर आज तक पिता का एक ही रूप देखा , जल्लाद वाला रूप जो कभी आशीर्वाद के लिए तो अपना हाथ उठा नहीं पाया , लेकिन उसकी माँ को जानवरों की तरह मारने पीटने के लिए दिन में 10 बार अपना हाथ उठाते हुए ज़रा भी नहीं झिझकता था।
शुरू शुरू में तो दादा दादी ने भी अपने बेटे को रोकने समझाने की कोशिश की लेकिन पिता ने उन्हें भी लताड़ कर चुप करा दिया , और दादा दादी की मौत के बाद तो पिता ने और भी ज़्यादा माँ को मारना पीटना शुरू कर दिया और दिन रात शराब में डूबा रहा। नाते रिश्तेदारों यहां तक कि माँ के मायके वालों ने भी रिश्ता रखने से इंकार कर दिया।
माँ ने किसी तरह मेहनत मजदूरी करके निशा को पढ़ाया लिखाया , लोगों के कपडे सिले और मेहनत से कमाए पैसों से माँ घर चलाती और निशा की पढाई के लिए पिता से पैसे छुपा छुपा के रखती। माँ पिता की हज़ार मार खा लेती लेकिन शराब के लिए पिता को निशा की पढ़ाई के लिए छुपाये पैसे न देती।
अब निशा बड़ी होने लगी थी, पिता के हाथों माँ की ये दुर्दशा उससे बर्दाश्त नहीं होती वो पिता को रोकने की कोशिश करती लेकिन माँ अपना वास्ता देकर उसे रोक देती क्योंकि माँ निशा का ध्यान सिर्फ पढ़ाई की और देना चाहती थी, इसलिए माँ ने इंतेज़ाम करके निशा को आगे पढ़ने के लिए शहर के कॉलेज भेज दिया , वही हॉस्टल में रहकर निशा पढ़ाई करने लगी और बचे हुए टाइम में पार्ट टाइम जॉब भी करने लगी और अपनी पढ़ाई का खर्चा ख़ुद उठाने लगी।
पढाई पूरी होने के बाद निशा वापस घर आ गई लेकिन उसने देखा उसका पिता आज भी वही जल्लाद है। बेटी को देखकर माँ की आँखें और दिल को जहाँ एक सुकून मिला वहीं पिता को तो कोई मतलब ही नहीं था।
निशा की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी और अब माँ को निशा की शादी की फ़िक्र होने लगी थी लेकिन निशा ने ये कहकर इंकार कर दिया कि “माँ, मैं तेरे कहने से पढ़ने के लिए बाहर चली गई थी लेकिन शादी करके हमेशा के लिए तुझे यहाँ इस हाल में छोड़कर नहीं जा सकती। माँ के पास रहने के लिए निशा ने गाँव से थोड़ी दूर बने एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी कर ली।
निशा के स्कूल में सब निशा को पसंद करने लगे क्योंकि निशा सबसे बड़ी ही विनम्रता से बात करती थी और बड़ों के साथ साथ बच्चे भी निशा से बेहद प्यार करते थे। निशा की क़ाबिलियत और स्वभाव देखकर निशा के स्कूल के मालिक अशोक ने उसके आगे शादी का प्रस्ताव रखा। अशोक ने ये स्कूल अपनी माँ की याद में बनवाया था।
निशा अशोक को पसंद तो करती थी लेकिन माँ को छोड़कर जाने का विचार ही उसे डरा देता था। अशोक के बार बार पूछने पर उसने सारी बात अशोक को बताई तो अशोक ने निशा से कहा कि “निशा , मैंने अपनी माँ को खो दिया , मैंने उन्हीं की याद में ये स्कूल बनवाया है क्योंकि वो एक टीचर थी ,मैं एक बहुत अमीर घर से ताल्लुक रखता हूँ लेकिन ये स्कूल ही मेरा सब कुछ है , मैं ख़ुद को ख़ुशनसीब समझूंगा अगर तुम मुझसे शादी कर लो और मुझे मेरी माँ से एक बार फ़िर मिला दो”
मैं कुछ समझी नहीं। आप क्या कह रहे हैं, निशा ने आश्चर्य से अशोक से पूछा।
निशा, क्या हम शादी के बाद माँ को अपने साथ नहीं रख सकते , पत्नी के साथ मुझे एक माँ भी मिल जाएगी।
अशोक, क्या आप सच कह रहे हैं , निशा ने पूछा
हां, एकदम सच। अब तुम जाओ और माँ को ये ख़ुशख़बरी सुना दो कि कल मैं अपनी माँ के पास आ रहा हूँ , अपनी माँ और उसकी बेटी को हमेशा के लिए उनके नए घर ले जाने के लिए।, अशोक ने निशा को हाथ पकड़कर भरोसा दिलाते हुए कहा.
कल ही , निशा ने पूछा तो अशोक बोला हाँ, कल ही हम सादी सी शादी करेंगे और माँ को उस क़ैद से आज़ादी दिलाएंगे , सादी सी शादी के लिए इसलिए बोल रहा हूँ क्योंकि धूमधाम से शादी में काफ़ी दिन लग जायेंगे और तब तक तुम्हे अपने साथ नहीं रख सकता क्योंकि समाज की सोच से हम नहीं लड़ सकते और मुझे किसी भी तरह कल के कल अपनी माँ को उस क़ैद से निकालना है , अशोक ने गंभीर होते हुए कहा तो निशा उसके गले लग गई और उसे शादी का वादा देकर घर आ गई।
निशा ने घर आकर माँ को सारी बात बताई तो बेटी के शादी का फ़ैसला सुनकर माँ बहुत खुश हुई लेकिन ख़ुद बेटी के साथ रहने के लिए वो हिचकिचाने लगी तो निशा ने माँ से कह दिया कि ठीक है अगर तुम साथ रहने को नहीं मान रही तो मैं कभी शादी नहीं करुँगी और तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाउंगी , ये अब तुम पर है। अशोक ने भी फ़ोन करके माँ को अपनी माँ बनने का वास्ता दिया तो माँ ने हाँ कर दी।
क्या कहा तूने, कल इसकी शादी है और तू इसके साथ इसके ससुराल जाकर रहेगी , अपनी पति को छोड़कर। माँ के ऊपर हाथ उठाते हुए पिता ने चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया , जिसे सुनकर निशा उनके कमरे में आ गई.
आज निशा के अंदर न जाने कहाँ से इतनी ताक़त आ गई कि उसने पिता का हाथ पकड़ कर ज़ोरदार धक्का दिया , “पिता जी , आज के बाद माँ आपके ज़ुल्मों सितम से आज़ाद है, क्योंकि आज माँ को बचाने के लिए सिर्फ़ उसकी बेटी ही नहीं उसका बेटा अशोक भी आ गया है , अब अगर तुमने माँ को गाली दी या उस पर हाथ उठाया तो हम पुलिस में शिकायत दर्ज़ करवाकर जेल भिजवा देंगे तुम्हें , और कल माँ मेरे साथ जा रही है , अगर तुमने उसे रोकने की कोशिश की तो अच्छा नहीं होगा “आज निशा ने माँ के साथ होते इस अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई।
चलो माँ , जब तुम इस आदमी को घर में नहीं दिखोगी , और ये मकान जिसे तुमने घर बनाया था , इसे काटने को आएगा तब इसे तुम्हारी कमी का अहसास होगा तब इसका नशा उतरेगा।
इतना कहकर निशा माँ को लेकर अपने कमरे में चली गई ,आज निशा का ये रौद्र रूप देखकर उसका पिता घबरा गया और उसकी हिम्मत नहीं हुई की वो कुछ बोल सके।
अगले दिन अशोक अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ निशा के घर शादी के लिए आ गया ।
निशा और उसकी माँ की नज़रें घर में चारों तरफ़ उसके पिता को ढूंढ रही थी लेकिन उस का पिता तो शराब के नशे में धुत पड़ा था , निशा का कन्यादान भी उसने नहीं किया , आख़िरकार ये फ़र्ज़ भी माँ को ही निभाना पड़ा।
अशोक निशा को सादे तरीक़े से ब्याह कर अपने घर ले गया और साथ ले गया अपनी माँ को। सारे रास्ते निशा माँ का हाथ थामे ये ही सोचती रही कि आज तक उसमें हिम्मत नहीं थी कि माँ के लिए आवाज़ उठा सके लेकिन आज उसने माँ के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई , इतनी हिम्मत उसे सिर्फ़ और सिर्फ़ अशोक के प्यार से ही मिली है , वो अशोक की तरफ़ देखकर धीरे से मुस्कुरा दी। दूसरी तरफ़ मां के दिल को तसल्ली थी कि उस की बेटी को एक इंसान ब्याह कर ले जा रहा है , कोई जानवर नहीं।
जैसे मेरे लिए मेरी बेटी को आवाज़ उठाने पर मजबूर होना पड़ा वैसे मेरी बेटी के बच्चों को अपनी माँ के लिए पिता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी ,ये सोचते हुए माँ ने दिल ही दिल में ईश्वर का शुक्रिया अदा किया और बेटी और दामाद को ढेरों आशीर्वाद दे डाले।
– शनाया अहम