रिया खुशी से चिल्लाते हुए घर में घुसी। मम्मी-मम्मी, “मेरे इंटर मीडिएट की परीक्षा में 98% मार्क्स आए हैं। मम्मी अब मैं मेडिकल की तैयारी करूंगी। मुझे नीट की परीक्षा क्लियर करनी हैं।”
मम्मी सुनते ही खुश होकर बोली,”भगवान का बहुत-बहुत धन्यवाद।
पर बेटा इसके लिए तो तुझे कोचिंग करनी पड़ेगी। यहाँ तो साधन भी नहीं है। बाहर जाना पड़ेगा। तेरे पापा तुझे बाहर पढ़ने की इजाजत नहीं देंगे। इसलिए तू यही किसी कॉलेज में एडमिशन ले ले।”
रिया उदास होकर मम्मी को समझाते हुए बोली,”मेरी सहेली शिप्रा भी जा रही है, कोचिंग के लिए। उसकी मम्मी भी साथ रहेंगी। मैं उनके साथ रह सकती हूँ।”
रिया ने अपने परिवार वालों को राजी कर लिया और शिप्रा के साथ दूसरे शहर पढ़ने आ गई। सुरक्षा की दृष्टि से शिप्रा की मम्मी भी उनके साथ आ गई।
रिया और शिप्रा साथ-साथ नीट की तैयारी करने लगी। रिया, शिप्रा की तुलना में अधिक होशियार थी। टेस्ट और कंपटीशन में रिया शिप्रा से अधिक अच्छा प्रदर्शन करती। शिप्रा की मम्मी रिया की सफलता को देख #ईर्ष्या से जलने लगी। वह रिया से द्वेष भावना रखने लगी।
प्रथम प्रयास में दोनों ही सहेलियाँ नीट की परीक्षा क्वालीफाई नहीं कर पाई।
अगले वर्ष दोनों सहेलियाँ जी जान से मेहनत कर रही थी। दोनों ने रात-रात भर जागकर तैयारियांँ की। दोनों एक दूसरे की मदद भी किया करती थी। दोनों बड़ी मेहनत करके परीक्षा देकर आई।
नीट का रिजल्ट आने वाला था। दोनों बच्चियों को ही मनोबल की जरूरत थी।
एक दिन नीट का रिजल्ट क्लियर हुआ। रिया ने नीट की परीक्षा अच्छे नंबर से क्वालीफाई कर ली। शिप्रा की कम रैंक आई। शिप्रा का चयन बीडीएस कॉलेज में हुआ।
शिप्रा की मम्मी को तो सुनते ही कांटों पर लोटने लगी। वह रिया को बुरा भला कहने लगी। शिप्रा की मम्मी सोचती हैं हमारी वजह से ही तो रिया कोचिंग कर पाई। अगर हम रिया को साथ नहीं लाते तो वह क्या कोचिंग कर पाती। हमारी वजह से ही रिया का नंबर मेडिकल में आया है।
तब शिप्रा अपनी मम्मी को समझाती है,”मम्मी रिया डिजर्व करती है।
रिया ने तो मेरी बहुत मदद की है। अगर आज मेरा एडमिशन बीडीएस में हुआ है तो इसका श्रेय भी रिया को ही जाता है। अन्यथा मैं तो इतने नंबर भी नहीं ला पाती।”
शिप्रा की मम्मी को अपनी गलती का एहसास होता है।
सभी बच्चों की प्रतिभा व भाग्य अलग-अलग होता है। हम तो मात्र निमित्त मात्र हैं। करने वाला तो भगवान है। अब शिप्रा की मम्मी को बात समझ में आ जाती है। वह अपने मन से द्वेष भावना हटाकर रिया को बधाइयाँ देने के लिए फोन मिलाने लगती हैं।
शिप्रा की समझदारी से रिश्ते में खटास मिट जाती है।
प्राची अग्रवाल
खुर्जा उत्तर प्रदेश
# ईर्ष्या से जलना मुहावरा आधारित लघु कथा