आज हमारी बहू पर हम को नाज है-मुकेश कुमार

अनीता एक पढ़ी-लिखी लड़की थी वह बनारस के “बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी” से एमएससी किया था रसायन विज्ञान मे उसकी रुचि शुरू से ही थी वह बड़ी होकर वैज्ञानिक बनना चाहती थी। लेकिन कहा जाता है कि कई सपने सिर्फ सपने ही बनकर रह जाते हैं।

अनीता जैसे ही एमएससी कंप्लीट किया उसके पिताजी ने अनीता के लिए लड़का देखना शुरु कर दिया था।  अनीता के पापा के एक दोस्त ने एक लड़के के बारे में बताया जो नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था । अनीता के पापा स्वभाव से  कुछ ज्यादा ही सीधे थे, उन्होंने अपने दोस्त की बातों पर ही विश्वास करके। उस लड़के से जिसका नाम प्रकाश था अनीता की शादी तय कर दी।  अनीता की मां कितनी बार अनीता के पापा से बोली जिस लड़के से आप अपनी लड़की की शादी कर रहे हो कम से कम नोएडा जाकर उसकी नौकरी और उसके घर के बारे में पता कर के तो आ जाओ।  

अनीता के पापा ने बोला वह मेरा बचपन का मित्र है वह हमसे कुछ भी झूठ नहीं बोलेगा मैं उस पर इतना विश्वास कर सकता हूं।  अनीता लेकिन अभी शादी करना नहीं चाहती थी लेकिन वह करें भी तो क्या करें घरवालों की जिद के आगे झुकना पड़ा और आखिर में उसकी शादी हो गई। शादी के बाद  अगले कुछ दिनों बाद ही नोएडा चली आई।



नोएडा आने के बाद अनीता को पता चला प्रकाश जिस घर में रहते हैं यह घर इनका अपना नहीं है बल्कि ये किराए का है उन्होंने झूठ कहा था कि नोएडा में इनका अपना खुद का फ्लैट है।  लड़का भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं था बल्कि एक सॉफ्टवेयर कंपनी में ही अकाउंटेंट का जॉब करता था।

जब से अनीता को यह सब बात पता चला वह यह सारी बात अपने माता-पिता को बता दिया।  अनीता की मां को जब यह बात पता चला तो अनीता के पापा को खूब डांटा और बोली देख लिया विश्वास करने का नतीजा मैंने तो शुरु से ही कहा था कि एक बार जाकर लड़के के नौकरी और उसके घर के बारे में पता कर के आओ लेकिन तुम्हें तो अपने दोस्त पर इतना ज्यादा भरोसा था कि तुमने हमारी बात को अनसुनी कर दिया था।

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क्या हम अपनी बेटी को  इसीलिए इतना पढ़ाया था कि उसकी शादी हम एक साधारण से लड़के से कर दें।  अनीता के पापा ने बस इतना ही कहा देखो हमारी इतनी औकात नहीं थी कि हम बहुत ज्यादा दहेज देकर एक अच्छे लड़के से शादी कर सके।  जैसा भी है लड़का कमाता तो है फिर हमारी बेटी भी पढ़ी लिखी है वह भी कुछ कर लेगी जिंदगी अच्छी से कट जाएगी।

अनीता को जब यह बात पता चली वह शाम को जैसे ही प्रकाश घर पर आया अनीता ने लड़ना शुरू कर दी कि आप लोगों ने हमारे पापा से झूठ क्यों बोला कि आप सॉफ्टवेयर इंजीनियर हो और नोएडा में आपका अपना खुद का मकान है।



प्रकाश बोला देखो अनीता हमें नहीं पता कि  तुम्हारे पापा को हमारे बारे में महेश अंकल ने क्या बताया है क्योंकि हमें हमारे बारे में महेश अंकल  को अच्छी तरह से पता है कि मैं एक कंपनी में जूनियर अकाउंटेंट हूं और यहां पर किराए के मकान में हम रहते हैं।  इसमें हमारा कोई दोष नहीं है। फिर तुम्हारे पापा को भी तो आ कर एक बार पता करना चाहिए था अब हम इसमें क्या कर सकते हैं हमें तो यही पता था कि तुम लोग हमारे से रिश्ते के लिए राजी हो।

अनीता अब करें तो क्या करें अब तो प्रकाश से उसकी शादी हो गई थी।  वैसे प्रकाश भले ही पैसे कम कमाता था लेकिन अनीता की इज्जत बहुत करता था वह इसलिए करता था कि अनीता उससे ज्यादा पढ़ी लिखी थी प्रकाश तो सिर्फ  12वीं पास था। घर में पैसे की तंगी के कारण उसने अपनी पढ़ाई कंटिन्यू नहीं किया था और उसी समय से जॉब करने लगा था।

एक दिन अनीता ने प्रकाश से किसी प्राइवेट स्कूल में टीचर की जॉब करने के लिए कहा।  उसने बोला कि देखो प्रकाश मैंने अपनी पढ़ाई इसलिए नहीं की थी कि मैं अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ खाना बनाने और खाने में गुजार दूंगी।

प्रकाश बोला देखो अनीता मुझे तुम्हारे पढ़ाई करने या जॉब करने से कोई एतराज नहीं है लेकिन फिर भी हम एक बार सुबह मम्मी पापा से बात कर लेंगे अगर वह तैयार हो गए तो मुझे कोई एतराज नहीं है।

सुबह होते ही अनीता के सास ससुर और इसके पति  प्रकाश सब नाश्ता करने के लिए बैठे थे। तभी अनीता ने प्रकाश को इशारा किया अपने जॉब के बारे में बात करने के लिए।

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प्रकाश ने धीरे से बात शुरू किया उसने बोला कि मम्मी आखिर अनीता भी इतनी पढ़ी-लिखी है और दिन में अकेले रह रह कर बोर हो जाती है क्यों  ना स्कूल में पढ़ने चली जाए। अनीता का भी मन लग जाएगा और कुछ पैसे भी घर में आ जाएंगे।

इतना सुनते ही अनीता की सास आग बबूला हो गई और उसने बोलना शुरू कर दिया कि देखो बेटा हम कोई दिल्ली वाले नहीं है जो अपनी बहू बेटियों को जॉब करवाएं हमारे  खानदान की लड़कियां जॉब नहीं करती हैं।

अगर तुम जॉब करने जाओगी तो जितने भी हमारे जानने वाले रिश्तेदार हैं वह हमें क्या कहेंगे एक लड़की को भी यह लोग नहीं खिला सकते हैं अपने बहु से जॉब करवाने लगे नहीं बहू नहीं ऐसा नहीं हो सकता है।

अनीता बोली मम्मी जी अब पहले वाला जमाना नहीं रहा लड़कियां पता नहीं आज के जमाने में क्या क्या कर रही है कोई मेट्रो चला रहा है कोई हवाई जहाज चला रहा है और फिर मैं भी कोई गलत काम नहीं कर रही हूं।

देखो बहू  मैंने तुमको एक बार मना कर दिया तो मना कर दिया हमारे घर की कोई भी बेटी या बहू जॉब करने नहीं जाती है और ना ही तुम जाओगी।

प्रकाश चुपचाप नाश्ता कर कर अपने ऑफिस चला गया।  ऑफिस पहुंचकर उसने अनीता को फोन किया और बोला दिल छोटा मत करो अब बताओ मैं क्या कर सकता हूं मैंने तुम्हारे कहने पर मम्मी से बात किया वह मना कर रही है तो मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता हूँ।



अनीता का मन बिल्कुल  अशांत था। वह अपनी पूरी जिंदगी एक छोटे से इस घर  में नहीं बिताना चाहती उसे अपनी जिंदगी में बहुत कुछ करना था उसके सपने बहुत बड़े थे वह एक वैज्ञानिक बनना चाहती थी अपने शोध के द्वारा ऐसा चीज करना चाहती थी इससे समाज और देश का भला हो।   

अनीता का मन ठीक नहीं था तो उसने अपनी मां को फोन लगाकर यहां की सारी बात बताई उसके सास राजी नहीं है उसे बाहर जॉब करने जाने देने के लिए।  अनीता की मां ने बस इतना ही कहा कि देखो बेटी अब हम कुछ नहीं कर सकते हैं अब वह ससुराल ही तुम्हारा घर है और वहां पर ऐसा कुछ मत करो जिससे हमारी कोई बदनामी हो अगर तुम्हारे सास ससुर को जॉब करना नहीं पसंद है तो कोई बात नहीं हम भी तो घर में रहते हैं धीरे-धीरे तुम्हें भी घर में रहने की आदत हो जाएगी।

धीरे-धीरे समय के साथ अनीता ने भी अपने दिल को समझा लिया था अब यही उसकी छोटी सी दुनिया है इसी में जीना है और इसी में मरना है।  वक्त के साथ ही अनीता एक छोटी सी बच्ची की मां भी बन गई थी धीरे-धीरे वह बच्ची अब 5 साल की हो गई थी।

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अब बारी आई उसे स्कूल में नाम लिखवाने की।  अनीता अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजना चाहती थी लेकिन प्रकाश की कमाई इतनी नहीं थी कि वह प्राइवेट स्कूल की फीस भर सके  उसने अनीता को सरकारी स्कूल में दाखिला करवाने की बात कही।



अनीता यह बात सुनकर बहुत ज्यादा गुस्सा हो गई वह अपनी बेटी की जिंदगी खराब नहीं करना चाहती थी।  अनीता बोली मेरी जिंदगी तो खराब हो ही गई लेकिन मैं अपनी बच्ची की जिंदगी खराब नहीं करने दूंगी चाहे कुछ भी हो जाए तुम्हारी कमाई नहीं है तो मैं जॉब करूंगी लेकिन मैं अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ आऊंगी।

प्रकाश बोला अनीता जिद नहीं करते  तुम भी तो सरकारी स्कूल में पढ़ी हुई हो तो क्या तुम पढ़ने में तेज नहीं हो।

अनीता बोली  मेरी बात और है  इसका मतलब यह तो नहीं है कि हम अपने बच्चे की जिंदगी को नर्क बना दें।  मैं मेहनत करूंगी जो भी करना है करूंगी लेकिन अपने बच्चों को हायर एजुकेशन दूंगी।

अगले दिन अनीता ने अपनी सासू मां से बोला मम्मी उस समय तो मैंने आपकी बात मान लिया था और मैंने जॉब नहीं किया था लेकिन मैं अब आपकी बात नहीं मानूंगी क्योंकि मुझे अब की बार सवाल मेरे जिंदगी का नहीं बल्कि मेरे बच्चे की जिंदगी का है और इसके लिए मैं कुछ भी कर सकती।

अनीता के सास ने जवाब दिया कि अनीता अगर या लड़का होता तो बात अलग था जन्म दिया है तुमने लड़की और उसको तुम इतना पढ़ाने की बात कर रही हो लड़की है ज्यादा पढ़ लिख कर भी क्या करेगी आखिर जाना है तो उसके किसी और के घर ही है।

अनीता इस बार किसी की नहीं सुनने वाली थी क्योंकि यह फैसला सिर्फ और सिर्फ अपने बच्चे के लिए लिया था क्योंकि यह उसके बच्चे की जिंदगी का सवाल था।



उसने कई  ऑनलाइन स्कूल की वेबसाइट पर अपने रिज्यूम अपडेट कर दिया था।  एक महीने बाद नोएडा के ही एक स्कूल से कॉल आया 12वीं क्लास में केमिस्ट्री पढ़ाने के लिए। अनीता बहुत खुश हुई और अगले दिन ही इंटरव्यू देने के लिए चली गई क्योंकि उसे शुरू से ही केमिस्ट्री में रूचि था इस वजह से उसका सिलेक्शन उसे स्कूल में भेजे केमिस्ट्री टीचर हो गया था।

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कुछ दिनों बाद ही अनीता अपने स्कूल में एक फेमस टीचर बन गई थी क्योंकि वह बच्चों को सिर्फ पढ़ाती ही नहीं थी बल्कि उन्हें जिंदगी में कुछ अलग हटके करने के तौर-तरीके भी सिखाती थी।

लेकिन दोस्तों एक औरत बाहर चाहे वह कुछ भी बन जाए लेक्चरार, इंजीनियर, डॉक्टर लेकिन घर में तो एक मां, पत्नी  और एक बहु ही होती है।

अनीता के जॉब जाने के फैसले को लेकर अनीता के सास बहुत नाराज थी इस वजह से वह अबअनीता से बात करना छोड़ दिया था।  यहां तक कि वह अनीता की बनाई हुई खाना भी नहीं खाती थी वह अपना खाना खुद बनाती थी और खुद खाती थी।

लेकिन इस बार अनीता भी अपनी जिद्द पर अड़ी थी क्योंकि वह इन सब बातों से के चलते अपने बेटी की जिंदगी को बर्बाद नहीं कर सकती थी।

एक हाउसवाइफ को नौकरी करना और घर के बीच सारा काम करना आसान नहीं होता है यह मैने’ज करना बहुत ही मुश्किल काम होता है इस वजह से ज्यादतर  स्त्रियां घर पर ही रह जाती हैं ।

समय के साथ ही धीरे-धीरे अपने पढ़ाई के बल पर अनीता उसी स्कूल में प्रिंसिपल बन गई थी। अनीता की बेटी नैंसी भी अब 10th का  एग्जाम देने वाली थी।



अगले साल अनीता की बेटी ने बोर्ड एग्जाम दिया और वह पूरे यूपी में टॉप की यह न्यूज़ अगले दिन न्यूज़पेपर में और टीवी पर आना शुरू हो गया था।  सुबह जब अनीता के सास में टीवी चालू किया तो उसने अपने नातिन की फोटो न्यूज़ चैनल पर देखकर 1 मिनट के लिए दाङ रह गई फिर TV देखना शुरु कर दिया जब उसको पता चला यह मेरी नातिन पूरे राज्य भर में बोर्ड में टॉप आई है।  बहुत खुश हुई। अनीता की तरफ देखते हुए बस इतना ही कहा कि आखिर नातिन किसकी है।

इसके पहले अनीता के सास कभी भी उसकी बेटी नैंसी से सीधे मुंह बात भी नहीं करती थी उनका साफ कहना था कि लड़की को इतना पढ़ा-लिखा करने से क्या फायदा आखिर तो उसे जाना किसी और के घर ही है और चूल्हा चौका बर्तन करना है।  लेकिन उन्हें नहीं पता था कि आप जमाना बदल चुका है आजकल की लड़कियां एक साथ दोनों काम बहुत आसानी से कर लेती है वह अपने बाहर का काम यानी जॉब भी कर लेती हैं और अपने घर का काम भी दोनों एक साथ प्यार से मैनेज कर लेती है।

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अनीता की सास  जब शाम को पार्क में घूमने के लिए गए तो उनकी सारी दोस्त सहेलियों ने उनको को घेर लिया और बोला तुम्हारी नातिन पूरे राज्य में बोर्ड में टॉप की है एक बड़ी वाली पार्टी तो बनता है। अनीता की सास ने कहा हां हां क्यों नहीं।

बृजेश को भी अनीता के जॉब  करने वाले फैसले पर आज गर्व हो रहा था आज वह यह महसूस कर रहा था कि आज अगर अनीता जॉब करने नहीं जाती तो हमारी बेटी कभी भी पूरे राज्य में टॉप नहीं करती क्योंकि हमारे पास इतना पैसा नहीं था कि मैं अपनी बेटी को इतने अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिए भेज सकता था।

अगले कुछ दिनों के बाद अनीता के पति बृजेश का जन्मदिन था वैसे तो बृजेश अपना जन्मदिन नहीं मनाता था लेकिन इस साल उसकी बेटी पूरे राज्य में टॉप की थी इस वजह से उसने अपना जन्मदिन भी मनाया और अपनी बेटी के टॉप होने का सेलिब्रेशन भी किया।



यह दिन ब्रजेश के लिए और भी खास था.। अनीता अपने पति बृजेश को एक बहुत ही अनोखा और कीमती गिफ्ट देना चाहती थी इस गिफ्ट के लिए उसने कई सालों से मेहनत कर रही थी आखिर वह सपना भी पूरा हो ही गया था।  यह सपना था अपना खुद का एक छोटा सा फ्लैट खरीदने का। अनीता ने अपने जॉब के पैसे इकठ्ठेकर उससे एक नोएडा में ही छोटा सा फ्लैट ले लिया था लेकिन इसकी जानकारी उसने किसी को नहीं दी थी वह सोचती थी बृजेश के जन्मदिन के दिन मैं यह सरप्राइज गिफ्ट दूंगी।

अनीता  की सास उस दिन अपने आप को रोक नहीं पाई उन्होंने जन्मदिन के पार्टी में  सब को एक बार शांत होने को कहा और उन्होंने अपने बहू को अपने पास बुलाया और सबके सामने बोला कि आज मुझे अपनी बहू अनीता पर गर्व हो रहा है मैंने तो अपने बहू के सपने को कुचलने का काम किया था मैं इसे मना किया था कहीं पर भी जॉब करने से लेकिन इसने अपने हौसला नहीं खोया और आज एक सफल गृहिणी सफल टीचर सफल मां और सफल पत्नी है।  

अगर आप चाहें तो घर और बाहर दोनों अच्छी तरह से मैनेज कर सकते हैं जो हमारी बहू ने कर दिखाया है आज हमारी बहू पर हम को नाज है।

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