आइने गुजरा हुआ वक्त नहीं बताया करते…पता नहीं ये अच्छी बात है या बुरी..पर ये तो पक्का है कि आइना अगर अतीत को सहेजता रहता तो अपना विविधताओं से भरा रूप भले ही नजर आता, पर अपने ही अलग अलग उन अवतारों में उलझकर इंसान ये निश्चय ही नहीं कर पाता कि उसका असली चेहरा कौन सा है…और बजाय जीवन में खुशियां और चैन तलाशने के वो खुद का असली चेहरा ही ढूंढता रहा जाता..तो एक तरह से अच्छा ही है आइना जो सिर्फ आज में जीने की सलाह देता है अतीत क्या था,कैसा था उससे क्या लेना देना..सही ही तो है जीवन तो वर्तमान पर ही चलता है —आइने के आगे खड़ी होकर अरूंधती अपने बाल तो सुलझा रही थी..पर खुद सोच में उलझी थी।
दीदी..कितना टाइम लगा रही हो चलो ना वो इंतजार कर रहे हैं–चंदना आकर कह गई।
अं.. हां हां आ रही हूं दो मिनट में–सोच को वहीं विराम देकर अरूंधती ने बालों की ढीली चोटी गूंथ कर,हल्का काम्पेक्ट का टच चेहरे पर दिया..छोटी सी बिंदी और नेचुरल शेड का लिपस्टिक लगाकर दो तीन मिनट में रेडी हो गई वो..।
उसी की उम्र के आसपास का होगा विमल…”कमल” से मिलता जुलता सा ही…भाई है तो..झलक तो आएगी ही।पर विमल की मुस्कान बिल्कुल कमल जैसी ही थी..वही मुस्कान जिसपर वो कभी मर मिटी थी..।
पढ़ने में बेहद होशियार अरूंधती ने जीवन में कभी किसी को तवज्जो दिया ही नहीं था स्वयं पर इतना दंभ रखती थी वो..पर काॅलेज के उस पहले दिन,कमल की पहली झलक और मुस्कुराहट ने पलक झपकते ही मानों उस दंभ को ही नहीं उसका सर्वस्व छीन लिया उससे… जाने क्या था उसमें,उस मुस्कान में,उस पल में…।
दोनों करीब आते गए…पढ़ाई लिखाई खेलकूद प्रतियोगिता में कभी ना हारने वाली अरूंधती..कमल पर अपना सबकुछ वार गई।तीन सालों की पढ़ाई में तीस जन्मों का प्यार हो गया दोनों में…पहली नजर का प्रेम, मंदिर में शादी.. उन्हें तो हमेशा यही लगता कि वो एक दूसरे के लिए ही बने हैं..इसी सोच में कब एक दूसरे के हो गए पता भी नहीं चला।
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कमल…अभी अभी हमारी पढ़ाई पूरी हुई है..साल भर तो लग जाएंगे नौकरी पाने में.. इसलिए मैं चाहती हूं कि अभी ये बच्चा नहीं आए दुनिया में–अपने अंदर एक नन्ही दस्तक पाते ही उसने कहा था कमल से।
अरू…ऐसी बात जुबां पर क्या सोच में भी मत लाना,हमने मंदिर में शादी की है ये बच्चा हमारे प्रेम की निशानी है.. मैं जा रहा हूं घर और तुम भी तैयार रहना। अपने घरवालों से बात कर मैं वापस आकर तुम्हारे घर भी जाऊंगा और हम समाज के सामने शादी कर हमेशा हमेशा के लिए एक हो जाएंगे.. सिर्फ सात दिन का समय दो मुझे अरू—अपने अपने घरों को जाते समय कमल ने उससे कहा था।
नहीं जानती थी अरू…कि हमेशा हमेशा के लिए एक होने वाला वो समय आएगा ही नहीं.. क्योंकि कमल अपने घर तो गया..पर उसके घर कभी नहीं आया..।
फोन पर अंतिम बात हुई जब वो ट्रेन से उतरकर बस में बैठ रहा था…फिर जो फोन स्विच ऑफ हुआ…पंद्रह दिनों तक ऑफ ही रहा..।
अनगिनत मैसेज और कॉल कर डाले उसने…पंद्रह दिन बाद जब उसका फोन ऑन हुआ तो बस इतना लिखा उसने…
सॉरी मुझे भूल जाना, मैं लाचार हूं !!!
उसके बाद फिर वो फ़ोन हमेशा के लिए बंद हो गया।
पर क्या इतना आसान था सब…कमल तो उसके अंदर भी सांस ले रहा था…एक महीने दुख में डूबे रहने के बाद उसे लगा कि ये महीना खत्म हो गया तो फिर वो ही नहीं उसका जीवन ही नहीं उसका परिवार और उनकी इज्जत भी खत्म हो जाएगी..।
रिजल्ट लेने के बहाने काॅलेज आकर पंद्रह दिनों के अंदर रोते रोते कमल की उस आखिरी निशानी को भी अलविदा कह दिया उसने…पता चला उसके आने के चार दिन पहले कमल का छोटा भाई आकर उसका रिजल्ट ले गया था।
फिर तो समय बीतता गया..प्यार मोहब्बत शादी ब्याह इन सबसे विश्वास पूरी तरह उठ गया था उसका..नौकरी और परिवार को समर्पित कर दिया पूरा जीवन..छोटे बड़े सब ब्याहे गए उसके सामने..पर वो कभी नहीं डिगी..मां भी चल बसी.. ।
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लाचार बुजुर्ग पिता अब उसकी जिम्मेदारी थे..एक आया चंदना थी,वो और पिता बस।
तीसवें जन्मदिन के दूसरे दिन..उसके फोन पर एक काॅल आया था..
हैलो..अरू… अरूंधती जी बात कर रही हैं
वर्षों बाद उस मिलती जुलती आवाज ने सर्वस्व कंपा दिया था अरूंधती का।
मैं विमल…आपसे मिलना चाहता हूं.. बहुत जरूरी है आप प्लीज इनकार नहीं करें..दस मिनट …बस इससे ज्यादा समय नहीं लूंगा आपका।
नहीं मना कर पाई अरूंधती और आज का दिन और सामने बैठा वो इंसान..
कहिए…क्या कहना था??
मेरे भैया थे वो..आपके मन में चल रहा होगा ना कि उन्होंने आपको धोखा दिया।
देखिए मैं अतीत की बखिया उधेड़ कर अपने आप को और परेशान नहीं करना चाहती..अगर उस बात के अलावा आप कुछ कहना चाहते हैं तो बता सकते हैं..वरना जा सकते हैं।
सीधे सीधे कहूं तो मैं आपसे शादी करना चाहता हूं।
अरूंधती जोरों से हंस पड़ी…
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कैसा मजाक है ये??…और आपलोगों ने मुझे समझ क्या रखा है दस साल पहले एक भाई आता है मेरे जीवन से खिलवाड़ कर चला जाता है,उसके जाने के छह साल बाद दूसरा भाई आता है और बिना किसी मुलाकात,प्रेम,पहचान के सीधे सीधे कहता है कि उसे मुझसे शादी करनी है…किस तरह का खेल खेल रहे हैं आपलोग… आपके उस कायर बुजदिल भाई से जाकर कहिए.. कमजोर बनाकर छोड़ गया था ना मुझे आज सामने आकर बात करें तो कहीं मुंह दिखाने,सर छिपाने लायक ना छोड़ूं उसे…है कहां वो अभी??
“ही इज़ नो मोर…”
क्षणभर को सुन्न पड़ गई अरूंधती।
घर जाते वक्त उनके बस का एक्सीडेंट हो गया था..सबको मामूली चोटें आईं पर भैया गंभीर रूप से घायल थे..सात दिन तक अस्पताल में संघर्ष करते रहे पर..।जबसे आपसे मिले थे सिर्फ आपकी ही बातें सुनाते थे मुझे,यहां तक कि उस हालात में भी आपकी ही फ़िक्र थी उन्हें …कह गए थे मुझसे आपका ध्यान रखने,वादा भी लिया था….पर मैं ही उनसे किया वादा नहीं निभा पाया…उतनी ताकत ही नही थी मुझमें..तब।
वो मैसेज???
मैंने ही किया था..उनके जाने के बाद..उनसे जोश में किया वादा निभा नहीं पाने के कारण पिछले छह साल से एक दिन भी चैन से नहीं जी पाया…कई बार सोचा आपसे मिलकर सारी बातें बता दूं कह दूं कि मैं आपका साथ नहीं निभा सकता..पर हिम्मत ही नहीं पड़ी..और भाई की वो ना खत्म होने वाली आपकी बातें, आपके बारे में लिखी डायरी,फोन पर आपके अनगिनत फोटो देखते देखते कब आप मुझे अच्छी लगने लगीं.. कब आपके प्यार में पड़ गया मुझे होश भी ना रहा…
जब होश आया तो लगा आपके बारे में पता कर लूं… कहीं आपकी शादी ना हो गई हो..पर जब आपके बारे में पता चला तो आपके प्रति इज्जत और प्रेम और बढ़ गया..मानों भाई आकर कह रहा हो– देखा मेरी अरू को..ऐसी ही है वो..!
खैर…अपना फोन नंबर छोड़कर जा रहूं हूं,जानता हूं ये फैसले ना आसान है,ना जल्दबाजी में लिए जाने वाले..पर ध्यान रखिएगा जिंदगी भी कहां आसान है? हां या ना के नतीजे पर पहुंचकर फोन कर दीजिएगा.. इंतजार रहेगा—कहकर निकल गया विमल
जड़वत सी फिर आइने के सामने जा खड़ी हुई अरूंधती…उसका वही वर्तमान मुरझाया सा रूप दिखाने लगा आइना…और मानों कह उठा उससे..आज में जीना सीखो अरूंधती…मेरी तरह बनो..साफ सुथरी पारदर्शी और इमानदार…।
अतीत और वर्तमान को मिलाने की कोशिश मत करो इनका विरोध सदियों से चलता आया है और चलता रहेगा..पर अतीत से प्रेम रखना,संजोना अच्छी बात है..पर जीना हमें वर्तमान में ही पड़ता है..मेरे इस मूलमंत्र को याद रखो,जियो और आगे बढ़ो अरूंधती..आगे बढ़ो..!!! कल और आज के विरोध में उलझकर अपने आने वाले कल के आगे अवरोध मत खड़ी करो…आगे बढ़ो…!
#विरोध
मीनू झा