सफेद झूठ – सिम्मी नाथ
रूपम हंसमुख और मिलनसार शिक्षिका है , किंतु उसे अपनी झूठी तारीफ की बहुत बुरी लत है ।
उसकी इस आदत से उसके साथ की सभी शिक्षिकाएं परेशान रहती थीं ,आइए उसकी इस लत से जुड़ी कथा सुनती हूँ। बस में चढ़ते ही मधु मिस ने कहा वाह! आज तो आपने बड़ी सुंदर साड़ी पहनी हैं , इतराते हुए उसने जवाब दिया अरे हां, जानती हैं , ये मद्रास से मेरा भाई लाया था , 7 000 की है , सामने बैठी पूनम कही तो कुछ नहीं पर मुस्करा दी । हद तो तब हो गई जब रूपम ने फोन उठाकर कहा,अच्छा बैंक में तुम्हारी नौकरी लग गई , वाह! भाई तुमने तो आज खुश कर दिया, उसकी न जाने कितनी झूठी बातें होतीं,तभी फोन बज उठा ,सभी की नजरें अकस्मात उधर उठ गई, ये झूठ मूठ का बात कर रही थी , हे भगवान ! कितना झूठ बोलती है , ये सोचकर
सभी ने एक दूसरे की ओर देखा ,और मुस्करा दिए , तभी रूपम ने कहा ,वो बीच में मेरे हसबेंड का फोन आ गया , वो दिल्ली पहुंच गए , इतना सुनना था कि सभी हंस पड़े , क्योंकि हसबेंड तो आज स्कूल अपनी बिटिया का रिजल्ट लेने आए थे । ये तो सफ़ेद झूठ बोलती है, भाई ।
सिम्मी नाथ, स्वरचित
राँची,झारखंड
सफेद झूठ – मंजू ओमर
पवन जी आप अपनी दिनचर्या को बदलिए ।सुबह। 9, 10के बीच नाश्ता करिए और दोपहर को 1,से 2 के बीच खाना खाएं ।और रात को भी नौ बजे से पहले खाना खा ले और ज्यादा गरिष्ठ खाना न खाएं । डाक्टर साहब पवन की पत्नी से भी बोले आप इनकी दिनचर्या का ख्याल रखिए नहीं तो ऐ ऐसे ही बीमार होते रहेंगे । क्या बताए डाक्टर साहब कितनी बार समझा चुकी हूं इनको लेकिन ये सुनते ही नहीं है । तभी बीच में पवन जी बोल पड़े नहीं डाक्टर साहब ऐसा नहीं है रात को ये समय पर खाना बनाती ही नहीं है ।अब बस भी करो पवन कितना सफेद झूठ बोलते हो ।शरम आनी चाहिए ।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
27 मार्च
कर्मों का प्रभाव – प्राची अग्रवाल
माधुरी की आदत थी कि घर से कुछ भी सामान गुम होता या रूपए पैसे का हेर फेर होता वह सबसे पहले नाम घर के नौकर चाकरों पर ही रखती। उसकी इस हरकत का सबसे ज्यादा प्रभाव उसके खुद के बच्चों पर पड़ा। घर से ₹10000 गायब थे। बेटा रात भर घर से गायब था दोस्त के यहां पढ़ाई का बहाना करके। माधुरी अच्छी तरीके से समझ रही थी पैसे बेटे ने ही लिए हैं क्योंकि उसने इंस्टाग्राम पर बेटे की दोस्तों के साथ डिस्को और पब के फोटो देखे थे।
उसने बेटे से सख़्ती से कहा तो उसके बेटे ने सफेद झूठ बोलते हुए कहा सफाई वाली आंटी ने लिए होंगे पैसे। माधुरी सक पका कर रह गई।
अपने कर्मों का प्रभाव सबसे अधिक खुद की औलादों पर ही पड़ता है।
प्राची अग्रवाल
खुर्जा बुलंदशहर उत्तर प्रदेश
(हरीश का झूठ ) – जया शर्मा प्रियंवदा
स्कूल से आते ही एक सुंदर सा पेन मां को दिखाते हुए हरीश ने कहा देखो मम्मी यह पैन मेरे दोस्त ने मुझे दिया है ,इसी तरह शाम को खेलकर वापस आए हरीश ने हाथ में फुटबॉल लिए हुए कहा दोस्तों ने मुझे फुटबॉल रखने को दी है, मां देख रही थी कि हरीश पहले तो कभी कभार ही कुछ चीज लाता था और अब तो यह रोज ही स्कूल से कुछ-कुछ नया लेकर आ जाता है और किसी दोस्त के द्वारा दी हुई बताकर कहता मेरे दोस्त मुझे बहुत प्यार करते हैं इसीलिए मुझे बहुत सारे गिफ्ट देते हैं ।
मां ने मन ही मन कुछ सोचा और स्कूल की पीटीएम में जाते समय कुछ चीज अपने बैग में रखलीं और क्लास में टीचर से बातचीत करते हुए वह चीजें टीचर को दिखाते हुए पूछा आपकी क्लास के बच्चे इतने महंगे महंगे गिफ्ट हरीश को क्यों देते हैं, मां के इस प्रश्न को सुनकर टीचर हैरान हो गई और हरीश ने डर के मारे अपनी निगाहें झुका लीं टीचर ने उन चीजों को देखकर कहा ,मैडम यह गिफ्ट में नहीं बल्कि चुराई गई हैं बच्चे रोज शिकायत करते हैं कि कभी किसी का कुछ गायब कभी किसी का कुछ , टीचर और मां को बात समझते देर ना लगी दोनों ने ही हरीश को बहुत डांटा आज हरीश का झूठ सबके सामने आ चुका था।
जया शर्मा प्रियंवदा
सफ़ेद झूठ – रंजीता पाण्डेय
सोना घर के काम कर रही थी। तभी विमल (सोना का पति)का कॉल आया , सोना ने फ़ोन उठाया, बोली अब क्या हो गया? अभी तो निकले हो घर से क्या छूट गया? मैडम जी मैं सर के आफिस से बोल रहा हूं। विमल सर की तवियत बहुत खराब हो गयी है ,हम लोग उनको सिटी हॉस्पिटल ले के जा रहे है आप वही आ जाओ,सोना काम धाम छोड़ भागती हुई हॉस्पिटल पहुँच गयी। डॉक्टर ने बोला , विमल जी का बी पी बहुत ज्यादा हो गया था,लगता हैं, बी पी की दवा नही खा रहे थे? जिस कारण हार्ड अटैक आ गया है,वो तो अच्छा हुआ ,ऑफिस वाले टाइम से ले के आ गये। और इनकी जान बच गई। जाइये आप मिल लीजिये। विमल ने सोना को देखते ही बोला ,मुझे माफ़ कर दो , मुझसे गलती हो गयी, मैं अब दवा जरूर खाऊंगा। मैं बार बार तुमसे” सफेद झूठ”बोल देता की, मैंने दवा खा लिया है,।सोना ने बोला जाने दो , झूठ बोलने का नतीजा देख लिया ना। मैं रोज बोलती थी , दवा खा लो, नास्ता कर लो। लेकिन आपको अपने काम के चक्कर मे ,मेरी बातें फालतू लगती थी ,। बार बार झूठ बोल देते ,की खा लिया हूँ । काम करने के लिए पहले स्वस्थ रहना जरूरी है । विमल ने मुस्कुराते हुये बोला, ,अब गलती नही होगी,सोना जी, आप से झूठ नही बोलूँगा।
रंजीता पाण्डेय
सुंदर सत्य – संगीता त्रिपाठी
“मेरी लड़की घर के हर काम में निपुण है ,”रमाकांत जी ने लड़के वालों से बोला ।
रिश्ता पक्का हो गया ,लड़की देखने में अच्छी और गुणों में भी आगे है ।
लेकिन जब विभा ससुराल पहुंची तो उसके अनगढ़ हाथों की बनी रसोई खा कर ससुराल वालों को समझ में आ गया , समधी जी ने सफेद झूठ बोला ।
लेकिन विभा ने हौसला नहीं खोया , तानों और कटाक्षों के भी जवाब न देती ,भले हो वे उसके दिल में घाव करते ,धीरे – धीरे सब चीज में पारंगत हो गई ,अपनी लगन से सफेद झूठ को सुंदर सत्य में बदल दी ।
—-संगीता त्रिपाठी
#सफेद झूठ
सफेद झूठ – डॉ ऋतु अग्रवाल
नेहा पिछले कुछ दिनों से नोटिस कर रही थी कि दीप्ति न जाने फोन पर किससे लगातार बातें करती रहती है। एक दिन दीप्ति ने नेहा को एक लड़के से फोन पर यह कहते सुना कि कल मैं घर से माँ के कुछ गहने लेकर आ जाऊँगी और तुम उन्हें बेचकर अपना क़र्ज़ उतार देना। दीप्ति ने इस बारे में अपनी सास को बताया तो नेहा ने अपनी सारी कॉल हिस्ट्री डिलीट कर शोर मचा दिया कि दीप्ति उसे बदनाम करना चाहती है। नेहा की बात पर सभी ने विश्वास कर लिया क्योंकि वह घर की बेटी थी और दीप्ति घर की बहू। नेहा के सफेद झूठ ने दीप्ति को हमेशा के लिए ससुराल वालों की निग़ाहों में गिरा दिया।
स्वरचित
डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ, उत्तर प्रदेश
#गागर में सागर
सफ़ेद झूठ – निमिषा गोस्वामी
बालकनी में टहलते हुए रीतिका कभी अपनी साड़ी का पल्लू उंगली में लपेटती तो कभी घड़ी की तरफ देखती। साढ़े नौ बज गए अभी तक शिखा बेटी नहीं आई। तभी कार की आवाज सुनाई दी उसने बालकनी से नीचे झांका तो देखा शिखा गाड़ी से नीचे उतरी और गाड़ी में बैठे शख्स से बाय-बाय करती हुई अंदर की और भागी। रीतिका झट से नीचे आईं और दरवाजा खोलते ही शिखा से पूछने लगी इतनी देर क्यों लगा दी और किसके साथ आई हो। शिखा ने कहा किसी के साथ नहीं टैक्सी से आईं हूं । शिखा के इस सफेद झूठ से रीतिका हैरान थी।पर वह शांत रही। सुबह नाश्त करते हुए उसने बेटी को बड़े प्यार से समझाया।बेटा समय बहुत खराब है किसी पर भरोसा नहीं करना। शिखा समझ गई थी कि मां ने उसे मनोज के साथ देख लिया फिर भी नहीं डांटा वह अपने झूठ पर बहुत शर्मिन्दा हुई और मां से माफ़ी मांगी।
निमिषा गोस्वामी
कालपी जिला जालौन उत्तर प्रदेश
मौलिक एवं स्वरचित
#नाटक – हेमलता गुप्ता
सुधा.. मैंने टेबल पर दो लड्डू रखे थे कहां गए? तभी बेटी बोली… पापा हो सकता है कामवाली आंटी ले गई हो! यह तो बहुत गड़बड़ हो गई मैंने तो उसमें चूहे मारने की दवा मिलाई थी ताकि अपने घर के चूहे उसे खाकर बाहर भाग जाए! नहीं पापा… ऐसा नहीं हो सकता आप मुझे जल्दी से अस्पताल ले चलो क्योंकि वह लड्डू मैंने हीं खाए थे, मैंने ही झूठ बोला था! मुझे पता था बेटा कई दिनों से तुम कोई भी चीज उठा लेती हो और सफेद झूठ बोल देती हो कि तुमने नहीं लिया आज तुम्हारा झूठ पकड़ने के लिए ही मैंने यह नाटक किया था लड्डू में कोई दवा नहीं थी! पापा की बात सुनकर नेहा ने फैसला किया आज के बाद को कभी झूठ नहीं बोलेगी!
हेमलता गुप्ता स्वरचित
प्रतियोगिता गागर में सागर (#सफेद झूठ)
सफेद झूठ – खुशी
मनीषा को बाते बनाने का बड़ा शौक था उसमें वो कई बार झूठ भी बोल जाती।एक बार उसकी मौसी की बेटी की शादी थी।उसे बनारस जाना था वो सोच रहीं थी कि कपड़े और गहनों का इंतजाम कहा से करे ।तभी उसकी पड़ोसन नम्रता आई उसने उसे अपनी परेशानी बताई नम्रता बोली तू गहने कपड़े मुझ से लेले मेरे भाई की पिछले महीने शादी थी तो मैने तब खरीदे थे।मनीषा नम्रता के घर गई नम्रता से दो लहंगे और उससे मैचिंग ज्वेलरी ले ली।तभी नम्रता की सास ने बुलाया तो वो सब ऐसे ही छोड़ बाहर आ गई उसी बीच मनीषा ने उसका एक और सेट उठा लिया और नम्रता के आते ही चली गई।वापस आने पर जब नम्रता को उसने सामान लौटाया तो नम्रता ने उससे उस सेट का भी पूछा।मनीषा सफेद झूठ बोल गई मैने तो बस दो लिए थे वो दे रही हूँ।नम्रता बोली सिर्फ तुम्हे मैने ज्वैलरी दिखाई थी और तब से वो गायब है।मनीषा चिल्लाने लगीं तुम मुझे चोर कह रही हो।तुमने कहा था इसलिए मैने ज्वैलरी ली और अब नम्रता का पति राजेश बोला अब बात बढ़ाने का फायदा ही क्या है।नम्रता अपना सा मुंह ले कर घर आ गई और मनीषा अपने झूठ पर मुस्कुरा रही थीं।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी