खूबसूरत धोखा – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

राजा एक सात वर्षीय  बच्चा अपने पिता से स्मार्टफोन की  फरमाइश कर रहा है। पापा मुझे स्मार्टफोन ही चाहिये।

पर बेटा तुम अभी बहुत छोटे हो ऐसा फोन लेकर  क्या करोगे। तुम्हे बात ही करनी है तो अभी जो फोन तुम्हारे पास है वही ठीक है।

नहीं पापा मुझे स्मार्ट फोन ही चाहिए उसमें 

बहुत सारे फीचर्स होते हैं जो मुझे काम में लेने हैं ।लाख समझाने के बाद भी राजा नहीं माना अपनी  जिद पर अड़ा रहा और स्मार्ट फोन लेकर ही  माना।ये तो एक बानगी है उसे जब भी जारुरत होती, ऐसी ही जिद कर अपनी इच्छीत बस्तु ले लेता।

वह  निहायत जिद्दी, अनुशासनहीन बच्चा था।बडों का निरादर करना, अपने संगी साथियों  का मजाक उडाना उसका शगल था।

माता पिता उसके व्यवहार से दुखी थे वे उसे समझाने का  अथक प्रयास करते किन्तु उसे न सुनना था तो नहीं सुनता मातापिता यह सोचकर तसल्ली कर लेते अभी बच्चा है,बड़े होने पर सम‌झ जायेगा।

 जैसे जैसे वह बड़ा होता गया उसकी मनमानियां और बाढ़ती गईं । पैसों की उसे कोई कीमत नहीं थी। वह सोचता इतना पैसा है तो पापा के पास थोडा खर्च  लूंगा तो क्या हो जाएगा।

आये दिन दोस्तों को पार्टी देता।  खूब खर्च करता । इसी लालच  में दोस्त उसे घेरे रहते कोई सच्ची दोस्ती नहीं थी केवल खाने पीने, मौज मस्ती का लालच था । 

स्कूलिंग कर कालेज पहुंचा तो उसका खर्च करने का स्तर और बढ गया। पढने में  उसका मन नहीं लगता। दोस्तों और गर्लफ्रेंड के साथ घूमता रहता। गर्लफ्रेंड को मंहगे मंहगे उपहार देता ।

 माता पिता समझाते बेटा  नहीं पढ़ना है

तो कोई बात नहीं,अब तुम बड़े हो गए हो 

समय और पैसों की  कीमत समझो। ऐसे खर्च करोगे तो कुबेर का खजाना भी खाली  हो जाएगा | मेरे काम में हाथ बंटाओ। पर नहीं  उसके ऊपर तो मौज-मस्ती  का जुनून सवार था।  और एक दिन गले में फूल मालाएं डाले एक लड़की को साथ लाकर दरवाजे पर खड़ा हो गया,माँ अपनी बहू का स्वागत नहीं करोगी।

यह सुन माता-पिता हक्के-बक्के रह गए क्या कहा तूने शादी कर ली और हमसे पूछा भी नहीं।

पापा इसमें पूछने की कौनसी बात थी पूजा पसन्द थी सो मैंने शादी करली रहना तो  मुझे है इसके साथ ।

मरता क्या न करता। बहू को घर में स्वागत कर  लाया गया। थोडे दिन तो घूमने फिरने में निकल गये।

अब पापा ने कहा तुम मेरे साथ ऑफिस ज्वाइन करो और काम सीखो।

 ठीक है पापा आप जैसा कहें।

 कुछ दिन तो पापा के साथ गया फिर धीरे-धीरे उसने जाना बन्द कर दिया। पूजा  को  साथ ले घूमना, दोस्तों के साथ पार्टी करना ।समय असमय पीकर घर आना।

माता -पिता को समझ  नहीं आ रहा था कि उसे पटरी पर कैसे लाया जाये। दोनों दुखी  रहते। उनका जमा-जमाया  इलेक्ट्रॉनिक सामानों का विजनेस था। अच्छा मुनाफे में चल रहा था। समय के साथ वे अब कमजोर होते  जा रहे थे ।उन्हें मजबूत हाथों के साथ की जरूरत थी, किन्तु बेटा था जो दोनों हाथ से लुटाने पर तुला था।उससे कोई सहायता की उम्मीद दूर दूर तक नहीं  दिखाई दे रही थी।

पूजा के कहने पर एक दिन वह बोला -पापा  प्रापर्टी मेरे नाम  कर दो। इस सबका  इकलौता  वारिस तो में ही हूं।

यह सुन पिता  धक से रह गये। बोले हां तुम ही इकलौते बारिस हो तो तुम्हें क्या जल्दी है अपने नाम कराने की, हमारे बाद तो यह सब तुम्हारा  ही है।

असल में बात ये है कि पूजा चाहती है कि  ये सब उसके नाम हो सो आपतो करने से रहे,  जब मेरे नाम हो जाएगी तो में उसके नाम  कर दूँगा।

अरे मिट्टी के माधो यह प्रापर्टी मैंने अपनी मेहनत से इसलिए नहींं बनाई है कि दूसरों को दान कर दूं । यह मुझे कोई विरासत में नहीं  मिली है । मेरी जिन्दगी भर की मेहनत है। तुम्हें इतना ही शौक है पूजा के नाम प्रापर्टी करने का, तो कमाओ और उसे दो हमें कोई परेशानी नहीं है।

पापा आप ऐसा कैसे कर सकते हैं मेरे साथ  मैं आपका बेटा हूं।

 हां बेटे हो इसीलिए आज तक तुम्हारी हर जयज – ना जायज इच्छा पूरी करी। पर अब पानी सिर से ऊपर निकल गया  है सो ये इच्छा तुम्हारी पूरी नहीं होगी। रहना है तो रहो अन्यथा अपनी पत्नी को लेकर घर से  चले जाओ ।

पापा मैं कहाँ जाऊंगा मेरे पास तो काम और दाम कुछ भी नहीं है।

यह सोचना तुम्हारा काम है मैं कुछ मदद नहीं कर सकता। तुम्हें पन्द्रह दिनों की मोहलत देता हूं,इतने दिनों में अपना इंतजाम कर घर से निकल जाओ।

 मां बोली इतना कठोर कदम  मत उठाओ 

कहां जाएगा बेटा है हमारा।

काश ये कदम मैंने पहले ही उठा लिया होता तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता।अब जो मैं कर रहा हूं होने दो तुम बीच में रुकावट मत डालो। मैं भी पिता हूं उसका, कुछ सोच समझकर ही निर्णय ले रहा हूं।

 जैसे ही पूजा को पता चला कि प्रापर्टी उसके नाम नहीं हो रही है और घर से भी  निकाल जा रहा है वह सर्तक हो गई। और जितना पैसा बाहने से  ले सकती थी उतना उससे निकलवाने लगी और खूब सारे गहने  तो थे ही  उसके पास,सब ले कह कर गई कि मैं अपनी बहन से दो दिन मिलकर आती हूं ।

अपने वायफ्रेंड के साथ चली गई।जब चार  दिन हो गए  लौटकर नहीं  आई तो वह वैचेन हो  सामान  उलटने पलटने लगा। तभी तकिये के गिलाफ में से एक पेपर गिर गया, पढ़ते  ही उसके होश उड गये लिखा था  राजा मैं कोई तुमसे प्यार-व्यार नहीं करती।

मैं तो सिर्फ तुम्हारे पास तुम्हारी जायदाद के चक्कर में आई थी।जब तुम्हारे पापा उसे तुम्हारे नाम ही नहीं कर रहे तो तुम मुझे क्या दोगे। इसलिए मैंने सोचा ज्यादा समय नष्ट  न करते हुऐ जो मेरे हाथ में था  उसे ले में  जा रही हूं  अपने ब्वायफ्रेंड के साथ  तुम मेरी तरफ से आजाद हो । मैं  तुम्हारे साथ अलग रह कर गरीबी में जीवन नहीं गुजार सकती।

पत्र लिए वह पलंग पर बैठा था। उसने दो तीन बार नहीं बल्कि पांच  छह बार उस पत्र को  पढ़ा ।उसका सिर चकरा रहा था। ऐसा लग रहा था कि जमीन उसके पाँव के नीचे से खिसक गई।वह अपने को निहायत एकाकी महसूस कर रहा था , जैसे कोई उसका सब-कुछ ठग ले गया हो। मन से टूट गया और अब उसे माता-पिता की एक -एक  समझाइश याद आ रही थी।

तभी उसे कमरे  से बाहर न आते देख माता-पिता उसके  कमरे में गए जहाँ वह जडवत पत्र हाथ में लिए बैठा था। 

पापा के पूछने पर क्या हुआ है बेटा उसने 

चुपचाप पत्र उनकी तरफ बढ़ा दिया।पत्र  पढ़ते ही एक झटका तो उन्हें भी लगा ऐसा उन्होंने दिखाया फिर बोले चलो करोडों से लाखों पर ही बीती ।अब तो तुम इंसान को समझ गए या नहीं कि कौन तुम्हारा सच्चा हितेषी है और कौन  तुम्हें धोखा दे रहा है। मैं तुम्हारी बात से कि प्रापर्टी पूजा के नाम करनी है समझ गया था  कि ये लडकी सिर्फ तुम्हारे पैसे देखकर आई है कोई  तुम्हारी सच्ची साथी नहीं है इसलिए मैंने ये कड़ा कदम उठाया था और नतीजा सामने  है जायदाद मिलते न देख जो मिला ले रफूचक्कर हो बई। 

फिर भी यदि तुम मिलना चाहते हो तो मेरे साथ चलो। वे उसे लेकर पुलिस स्टेशन गए, जहां लाकअप में पूजा एवं उसका बॉयफ्रेंड थे।वह हैरानी से पापा की ओर देखने लगा।

तब वे बोले जब मुझे शक हो गया था तभी पुलिस में कम्पलेन कर उस पर नजर रखी और जैसे ही रात को वह घर से निकली मैंने पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने पीछा कर दोनों को पकड़ लिया।

पापा आज जिन्दगी ने मुझे सबक सीखा 

दिया ।जो बात आप और माँ मुझे बचपन से सिखाना चाह रहे थे और मेरी समझ में नहीं आ रही थी आज इस धोखे ने मुझे सिखा दी। मां में बहुता बुरा हूँ, मैंने अपने जीवन का अमूल्य समय, पापा का पैसा बहुत बर्बाद किया उसकी कीमत नहीं जानी  न ही मैंने आप लोगों जैसे सच्चे इंसान को पहचाना ,पूजा जैसी लड़की पर भरोसा कर आपका, आपकी इच्छाओं का अपमान किया। बस आजसे सब खत्म। अब आप जैसा कहेंगे  वैसा ही होगा ये मेरा  आपसे वादा है। पिछली  गल्तीयों के लिए एक बार मुझे माफ कर दें, अब में आपको एक अच्छा  बेटा बन कर दिखाऊंगा। 

अब वह पापा के साथ ऑफिस जाता । मन  लगा कर काम सीखता। कुछ  ही महीनों में  वह काम में पारंगत हो गया। 

अब माता-पिता को उसकी शादी की चिंता हुई। एक सुशील, संस्कारी लड़की अपनी ही बिरादरी  की  ढूंढ उन्होंने उसकी धूमधाम से  शादी कर दी। अब पूरा परिवार सुखमय जीवन बिता रहा है।

शिव कुमारी शुक्ला

14-6-24

स्व रचित मौलिक एवं अप्रकाशित

साप्ताहिक शब्द  कीमत

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