रॉन्ग नंबर – संध्या त्रिपाठी : Moral stories in hindi

    अरे ये काम के बीच में किसका फोन आ गया….?? अभी सवेरे सवेरे किसको इतनी फुर्सत भी होती है जो टाइम बेटाइम फोन करते रहते हैं…! अननोन नंबर का कॉल देखकर कावेरी को लगा …कमल ने फिर कुछ ऑनलाइन मंगाया होगा.. वे लोग ही डिलीवरी से पहले कॉल करते हैं…।

      अनमने ढंग से फोन उठाकर कावेरी ने हेलो कहा..उधर से आवाज आई… मैं आशीष…. बिना सोचे समझे कावेरी ने सॉरी..” रॉन्ग नंबर ” बोला ….उधर से फौरन जवाब आया …रॉन्ग नंबर नहीं मैं आशीष बोल रहा हूँ…आपके घर के बाहर खड़ा हूँ…प्लीज दरवाजा खोलिए ….!

       आशीष ….?? कावेरी के मुंह से कुछ आवाज ही नहीं निकल पाई …. पहचानी सी आवाज….संयुक्त परिवार सास ससुर की मौजूदगी से कावेरी थोड़ी असमंजस में थी.. क्या सोचेंगे…? क्या मैं जो बताऊंगी वो आसानी से मान जाएंगे ?… वो इसी ऊहापोह की स्थिति में… अपने दुपट्टे को ठीक करते हुए…. माथे पर जल्दी से बिंदिया लगाया …जो खाना बनाते वक्त पसीने की वजह से गिर गया था ….! खुद को सहज बनाने की नाकामयाब कोशिश करती हुई दरवाजे की ओर बढ़ी…।

        दरवाजा खोलते ही एक आकर्षक व्यक्तित्व वाला व्यक्ति आशीष और उसकी धर्मपत्नी सामने खड़े थे… माहौल को अनुकूल बनाने की कोशिश में आशीष ने ही पहल की… अंदर चले…?? हां हां आओ आशीष अंदर आओ ….! देखा अनू मैंने कहा था ना …कावेरी वैसे ही होगी बिल्कुल नहीं बदली होगी… घर उसका पर अंदर आने के लिए भी मुझे ही बोलना पड़ा… आशीष ने पत्नी अनु से कहा और सभी हंस पड़े…।

      अरे यार इतने दिनों बाद तुम्हें मेरा फोन नंबर… घर का एड्रेस ये सब कहां से मिला…?? आश्चर्य मिश्रित खुशी से कावेरी ने पूछ ही लिया…! बताता हूं यार …पहले अंदर तो चले.. खड़े ही खड़े सारी बातें जानना चाहती हो क्या कावेरी…?? आशीष ने उत्साहित होते हुए कहा…।

       कावेरी आशीष के साथ अनु के आने से थोड़ी आश्वस्त थी ..कम से कम आशीष पत्नी सहित आया है तो सास ससुर को यह बातें आसानी से पच जाएगी…।

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 बहू कौन है…? अंदर से सासू माँ की आवाज आई …हां माँ जी आई …बैठो आशीष मैं पानी लेकर आती हूं …ऐसा कहकर कावेरी अंदर गई… सासू माँ से बताया …हमारे मोहल्ले में रहने वाला और मेरा सहपाठी है आशीष…. अपनी पत्नी के साथ आए हैं… पानी गिलास में डालते हुए कावेरी ने सासू माँ को बताया… सासु माँ ने भी आशीष और अनु के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी ….दरअसल बहू का पड़ोसी के साथ-साथ सहपाठी भी था तो इज्जत का सवाल जो था…।

 बातों का सिलसिला जारी रहा… इसी बीच आशीष ने पूछ लिया… तुम्हारे हैंडसम पतिदेव कब आएंगे…?? उनसे भी मिल लेता..। कावेरी कुछ कह पाती इससे पहले ही सासु माँ ने ही तुरंत कहा.. अरे वो अभी तक आ जाता है.. पर आज उनके बड़े बाॅस दिल्ली से आने वाले हैं… अभी तक पहुंचे नहीं है …उन्हीं के इंतजार में है …।

       सासु माँ की बातें सुनकर आशीष को बड़ा अच्छा लगा कितना अच्छा परिवार है एक दूसरे का पूरा ख्याल रखते हैं… कभी-कभी माता-पिता के साथ रहना भी कितना सुखद होता है…।

    बातों के बीच में ही आशीष ने अपना फोन निकाला और फोन पर धीरे से कुछ कहा ….। कुछ ही देर में कावेरी के पति कमल भी घर आ गए.. अंदर आते ही…. सर आप …?? दोनों हाथ जोड़ आशीष के सामने खड़ा हो गया कमल …। वो अभी कुछ देर पहले अननोन नंबर से फोन.. आपका ही था …मैं अननोन नंबर के इस फोन पर खुश हुआ कि …कोई तो है जिसे मेरी परवाह है …और मुझे घर जाने को बोल रहा है… वरना ना जाने कितनी देर और इंतजार करना पड़ता…। सर आपने ही कहा था.. आज बॉस नहीं आएंगे घर जाइए…। आश्चर्य से अपने ही घर में अपने बॉस को बैठे देखकर और इस तरह व्यवहार कुशलता देख कर कमल की खुशी का ठिकाना ना रहा…।

 ओह… वहां बैठे सभी को वस्तुस्थिति समझने में देर ना लगी… आशीष ही थे जो कमल के कंपनी के डिप्टी डायरेक्टर हैं….और यही आज दिल्ली से रायपुर आने वाले थे …! क्योंकि आशीष के बचपन की यादें रायपुर से जुड़ी हुई है वहीं पढ़ाई लिखाई हुई है …और कुछ अनमोल यादें जो आशीष जिंदगी भर नहीं भुला सकते…।

 आशीष की सौतेली माँ थी… जो आशीष के ऊपर पैसे खर्च नहीं करना चाहती थी …। आशीष के पिता की बिल्कुल भी नहीं चलती थी.. वो चाहते थे आशीष उनकी दुकान में मदद करें …! पर आशीष पढ़ लिख कर अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहता था …आए दिन घर के किचकिच से तंग आ चुका था आशीष..! किसी तरह 12वीं तक पढ़ाई की …पर आगे की पढ़ाई के लिए उसके माँ पिताजी तैयार नहीं थे….!

       एक दिन मायूस होकर अपने आगे की पढ़ाई ना करने की असमर्थता आशीष ने कावेरी से साँझा की …। कावरी ने उसे समझाया..

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प्रोत्साहित किया …प्राइवेट परीक्षा देने की सलाह दी …और तो और आर्थिक मदद भी की …। हालांकि कावेरी के घर वाले भी कावेरी को सलाह देते थे कि दूसरों के पारिवारिक मामलों में ज्यादा हस्तक्षेप ठीक नहीं है …पर कावेरी तर्क वितर्क कर … किसी की जिंदगी बनने का वास्ता बताकर.. परिवार की सहमति से आशीष की मदद की थी…।

    बदले में आशीष की सौतेली मां ने ना जाने कितने चारित्रिक आरोप कावेरी और आशीष को लेकर लगा दिए थे …जिससे कावेरी की काफी बदनामी भी हुई थी…. और आशीष की माँ ने आशीष को कावेरी से ना मिलने की सख्त हिदायत दी थी…।

 समय बीतता गया …प्राइवेट परीक्षा देकर आशीष ने ग्रेजुएशन पूरी की और उसके बाद हार ना मानकर प्रतियोगी परीक्षा देते रहा … अन्ततः आयकर विभाग में आशीष की नियुक्ति हो गई …इसी दरम्यान आशीष ने अपने पसंद की लड़की अनु से शादी कर ली…।

 इधर कावेरी की भी कमल से शादी हो गई थी …अपने-अपने गृहस्थी में सब व्यस्त हो गए …पर इतनी व्यस्तता के बीच भी आशीष कावेरी के योगदान को भुला नहीं पाया था… उसे हमेशा लगता आज वो जो कुछ भी है उसके पीछे कहीं ना कहीं कावेरी का भी महत्वपूर्ण योगदान है..। अक्सर अनु से कावेरी की बातें करता था ..उसकी तारीफ करता…!

 उसकी बातों से अनु को कभी बुरा नहीं लगता या जलन नहीं होती… क्योंकि आशीष की बातों में कावेरी के लिए… एक इज्जत ..प्यार और बहुत सारा अपनापन था …जिसे शायद अनु ने भाँप लिया था…।

     जब आशीष को पता चला कि उसे दफ्तर के काम के सिलसिले में वहीं जाना है जहां उसका बचपन बीता है …उसकी बचपन की यादें फिर से ताजा होकर हिलोरे मारने लगी… अनु भी समझ चुकी थी …आशीष यदि एक बार कावेरी से मिलें और उनके योगदान के लिए धन्यवाद बोल सकें तो वह बहुत खुश होंगें…।

     आशीष मैं भी तुम्हारे शहर में जाना चाहती हूं… जहां तुम्हारा बचपन बीता है …और कावरी से भी मिलना चाहती हूं …! अनु ने अपनी इच्छा जाहिर की …पर अनु कावेरी की शादी हो गई है कहां है कुछ पता नहीं है कैसे मिलेंगे … आशीष ने कहा …अनु ने ही सलाह दी… कावेरी का मायके वहीं है.. घर में कोई ना कोई तो होंगें… जिससे कावेरी का एड्रेस मिल जाएगा.. अब आशीष की आंखों में भी एक चमक थी…।

 जैसे ही कावेरी के मायके.. आशीष और अनु पहुंचे ..आशीष को देखते ही कावेरी की माँ ने कहा.. आशीष बेटा …?? अरे आप पहचान गई आंटी …?? तेरे घुंघराले बाल कैसे भूल सकती हूं बेटा …?? आ बैठ…। आंटी ने काफी आवभगत की… और कावेरी और कमल का एड्रेस और फोन नम्बर भी दिया…।

 सर मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था… जिनकी कावेरी इतनी तारीफ करती थी… वो इंसान आप हैं….। कावेरी तुम्हें जानने की बहुत लालसा थी ना कि.. आशीष का क्या हुआ ….अब खुश… इतने बड़े अधिकारी हैं आशीष सर …और तुम्हारे पति के बाॅस भी..।

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     ये सर – सर क्या लगा रखा है कमल.. ऑफिस की बातें ऑफिस में..! आशीष ने झेंपते हुए कहा …और आज जो कुछ भी हूं इसमें कावेरी का भी बहुत ज्यादा योगदान है …। आज वही माँ जो मुझे आगे पढ़ा नहीं रही थीं… कावेरी को भला बुरा कह रही थीं… अब वही कावेरी का धन्यवाद करते नहीं थकतीं हैं…।

    सच में आशीष कुछ रिश्तों का नाम ना होते हुए भी वो बड़े नामी रिश्ते होते हैं …। लड़की ..लड़का ..का रिश्ता सिर्फ प्यार और दोस्ती का ही नहीं होता कुछ रिश्ते और भावनाएं इतने सच्चे और उत्कृष्ट होते हैं कि उन्हें किसी नाम में बांधकर उनका दायरा सीमित करना नाइंसाफी होगी…..आपके और कावेरी के इस सच्चे रिश्ते को मैंने महसूस किया है आशीष…और मुझे आपके इस बेनाम रिश्ते पर गर्व है …अनु ने भावनाओं में बहकर अपने मन की बात कह डाली…।

और अब ये रॉन्ग नंबर से फोन आता रहेगा हंसते हुए आशीष ने कहा…

 सच में दोस्तों कभी कभी रॉन्ग नंबर या अननोन नंबर से आए फोन भी बड़े यादगार बन जाते हैं…!

# बेटियां जन्म दिवस प्रतियोगिता  (छठवीं कहानी)

( स्वरचित मौलिक एवं सर्वाधिकार  सुरक्षित अप्रकाशित रचना)

  संध्या त्रिपाठी

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