“सुनो जी, टप्पू और अन्नू अब बड़े हो गये, मै सोच रही थी मै एक बुटीक खोल लेती हूँ घर में, कुछ आय भी हो जायेगा और समय भी कट जायेगा, “रूचि ने पति विकास को चाय का कप पकड़ाते कहा।
वक्र मुस्कान से रूचि को देखते विकास बोले “तुम और बुटीक….तुम्हारी किट्टी पार्टी, सहेलियां और टी. वी. सीरियल का क्या होगा….,रहने दो यार क्यों पैसा और वक्त बरबाद करोगी, इससे अच्छा घर में ध्यान लगाओ “
पति की बात सुन रूचि आहत हो गई पर कुछ बोली नहीं।रूचि मध्यवय की महिला है,बच्चे थोड़े बड़े हो गये और पति थोड़ा व्यस्त , बिचारी गृहणी जो सबसे व्यस्त रहती थी,अब थोड़ा सा खाली हो जाती।रूचि को बड़ा मन था पढ़ -लिख कर नौकरी करें, पर मायके में माँ ने कहा -“देखो लल्ली मुझे और तीन लड़कियाँ की शादी करनी है, तुम ये सपना अपने घर जा कर पूरा करना,”। आँखों में ढेरों ख्वाब लिये रूचि ससुराल आई, सोचा पति से कह अपनी पढ़ाई पूरी कर नौकरी का सपना जरूर पूरा करुँगी, पर सोचा हुआ कहाँ पूरा होता है।
पगफेरे के बाद लौटते हुये पति को अपनी इच्छा से अवगत कराया, पति बोले “मुझे कोई एतराज नहीं है, तुम मम्मी से पूछ लो “।
सासु माँ से पूछा, तो वो वैसे भी कम दहेज मिलने से चिढ़ी थी, पढ़ाई की बात सुन और भड़क गई।”तुम्हारे पिता ने कुछ दिया नहीं, मैंने तो सोचा था जो दहेज मिलेगा उसे संजना की शादी निपट जायेगी पर यहाँ तो खाली हाथ ही आ गई ….,और तुम यहाँ अपनी पढ़ाई का खर्चा करवाओगी, , इतना ही शौक था तो मायके से ही पढ़ कर आती या अपनी फीस का पैसा मांग लो अपनी माँ से “।
स्त्री ही स्त्री की दुश्मन होती है, पहली बार समझ में आया। उधर माँ ने अपने खर्चे से पल्ला झाड़ लिया और यहाँ सासु माँ…। रूचि ने सासु माँ से बोला “माँ, फीस तो विकास देंगे आपको थोड़ी न देना….,”। बस फिर क्या था घर में तूफ़ान आ गया “कल की आई लड़की अभी से अपना -पराया करने लगी, विकास का पैसा सिर्फ उसका हो गया,कैसे मुँह उठा बोल दी -विकास देंगे फीस…., अरे अभी यहाँ भी दो लड़कियाँ बैठी है उन्हें पढ़ाऊंगी, शादी -ब्याह करुँगी भविष्य बनाउंगी या तुम्हे पढ़ाऊंगी, अब तुम्हारा कौन सा भविष्य बनना है, हो तो गई शादी तुम्हारी “।
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विकास और बाबू जी ने बड़ी मुश्किल से सासु माँ को शांत कराया। रात विकास ने कह दिया -देखो रूचि ये पढ़ाई -वढ़ाई का सपना भूल जाओ, अभी संजना और रंजना भी पढ़ रही फिर उनकी शादी …. मेरे बस में नहीं है तुम्हारी पढ़ाई…। रूचि सोच में पड़ गई बेटियों की पढ़ाई के लिये पैसा है, तो बहू क्यों नहीं पढ़ सकती, ये कैसा अन्याय है।सोच ही दोगली है..।न वो घर अपना, न ये घर… फिर कौन सा अपना घर है ….??
कुछ समय बाद रूचि एक बेटे, एक बेटी दो जुड़वा बच्चों की माँ बन सब कुछ भूल गई। अब रुचि की प्राथमिकता बदल गई थी। बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने लगी, जिससे कम से कम उनके सपने पूरे हो..। हाँ जितना वो टप्पू को टोकती उतना अन्नू को भी। अन्नू पढ़ाई में ज्यादा होशियार थी। रूचि बच्चों के बड़े होने के बाद, कुछ पैसे कमाने के लिये हाथ -पैर मारने लगी। उसकी सहेली बोली तू नौकरी ढूढ़ना छोड़ बुटीक खोल ले..। रूचि को बात जँच गई, तभी विकास से कहा। विकास से कई सपोर्ट न पा रूचि चुप हो गई…।
सासु माँ के कहने पर विकास ने रूचि से कहा -टप्पू की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दिया करो, अन्नू का क्या, कल को पढ़ -लिख कर ससुराल चली जायेगी, हमारे लिये थोड़ी न करेंगी। कुछ दिन बाद अन्नू का मेडिकल में सिलेक्शन हो गया और टप्पू का इंजीनियरिंग में। मेडिकल की पढ़ाई का खर्चा देखते हुये विकास अन्नू से बोले -“मेडिकल की पढ़ाई छोड़ तू कुछ और कर ले, मेरे पास इतना पैसा नहीं है जो तेरी शादी में भी खर्च करू और तेरी पढ़ाई में भी “। रसोई में खाना बनाती रूचि के कानों में जब बात पड़ी तो दनदानाते हुये बाहर आई “अन्नू मेडिकल ही करेंगी, ये उसका ख्वाब है, उसे मै जरूर पूरा करुँगी, ये अन्याय मै नहीं होने दूंगी, लड़की है तो उसके सपनों की कोई कीमत नहीं “।
“मेरे पास तो नहीं है, तुम्हारे पास है तो करा लो अन्नू को मेडिकल,”कह विकास गुस्से से चले गये।
अगले दिन अन्नू को ले रूचि निकल पड़ी, दो दिन बाद थकी -हारी लौटी तो विकास ने पूछा -हो गया एडमिशन “।
“हाँ “कह रूचि हाथ -मुँह धोने चली गई। लौट कर आई तो विकास ने पूछा -“पैसे कहाँ से मिले “।
“मै अपने गहने बेच आई और अन्नू को एडमिशन दिला दिया, मेरे गहने तो मेरे बच्चे ही है “कह रूचि चाय बनाने लगी।
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सदा की शांत रूचि बोली -माँ जैसे इसबार फीस का इंतजाम हुआ वैसे आगे भी होगा, मै ये अन्याय नहीं होने दूंगी जो मेरे था हुआ। मै बेटी को उसके सपने पूरे कर आत्मनिर्भर बना कर ही ससुराल भेजूंगी जिससे वहाँ उसके सपने अधूरे न रहे “। रूचि की बात सुन सन्नाटा छा गया।
विकास रूचि के पास आ बोले -रूचि, तुमने मेरी ऑंखें खोल दी, बेटा -बेटी दोनों को पढ़ाई का समान हक़ है, किसी एक के लिये दूसरे का हक़ क्यों छीना जाये…., तुम निश्चिंत रहो, अन्नू की डॉक्टरी की पढ़ाई में कोई व्यवधान नहीं आयेगा, बेटी है वो मेरी, अपने इस घर से अपने सपने पूरे करेंगी, हाँ तुम अपना बुटीक का काम शुरू कर दो,”
” वो तो मै अपनी सहेली सरला के साथ शुरु कर दी हुई पर अभी शुरुआत हुई है “रूचि ने थोड़ा मायूसी से कहा।
.”कोई बात नहीं बिजनेस धीरे -धीरे आगे बढ़ता है “कह विकास ने रूचि को प्रोत्साहित किया। रूचि की लगन और मेहनत से इतने साल बाद रूचि को उसका हक़ मिल गया…।
….. संगीता त्रिपाठी
#अन्याय
(GKK S)