“अब कन्या की मांग में सिंदूर भरो” जैसे ही पंडित ने दूल्हे अमित से कहा तो वह अपनी दुल्हन अंजलि की मांग में सिंदूर भरने लगा था अमित को अपनी बेटी अंजलि की मांग में सिंदूर भरते देख उसकी मम्मी सुनैना की आंखें सजल हो गई थी दुल्हन के वेश में उसकी बेटी अंजलि बेहद खूबसूरत लग रही थी मनपसंद वर मिलने के कारण उसका चेहरा खुशी से चमक रहा था जिसे देखकर सुनैना को कुछ समय पहले की याद आ गई थी जब शिक्षा पूरी करने के बाद अंजलि की नई-नई नौकरी लगी थी
अंजलि उनकी इकलौती बेटी थी जिसका एक ही अरमान था कि पहले उसका मकान बने फिर उसकी शादी ऐसे व्यक्ति से हो जो पढ़ा लिखा और अपने पैरों पर खड़ा हो मकान बनने के पीछे कारण यह था कि उनका मकान काफी पुराना और जर्जर अवस्था में हो गया था जिसके कारण बारिश के मौसम में उनके मकान में काफी पानी भर जाता था जिसमें नाली का गंदा पानी भी मिल जाता था जिसे साफ करने में उसे और उसकी मम्मी को काफी परेशानी उठानी पड़ती थी अंजलि ने अपने पापा सुमित से जब मकान बनाने के बारे में कहा था उसके पापा सुमित जो एक बड़ी कंपनी में ऊंची पोस्ट पर काम करके अच्छा वेतन पाते थे बोले”पहले तुम्हारी शादी होगी फिर मकान बनेगा मेरे एक परिचित ने तुम्हारे लिए एक लड़का बताया है मै कल हीं तुम्हारे चाचा और फूफा के साथ उसे देखने जाऊंगा।“
पापा की बात सुनकर अंजलि खामोश हो गई थी क्योंकि उसे पता था कि उसके पापा बेहद जिद्दी स्वभाव के थे जो बात मन में ठान लेते थे उसे पूरा करके ही चैन की सांस लेते थे अगले दिन ही उसके पापा उसके लिए लड़का देखने के लिए लड़के के घर पहुंच गए थे और लड़का देखकर कुछ ही घंटे बाद घर वापस आ गए थे घर आने के बाद उन्होंने सुनैना को बताया कि उन्हें लड़का काफी पसंद आ गया है और वह अगले महीने ही अंजलि की शादी उसके साथ कर देंगे मेरी लड़के के पिता से बात हो गई है दो दिन बाद वे अंजलि को देखने के लिए पास के होटल में आ जाएंगे हम भी अंजलि को लेकर वहां चले जाएंगे यदि उन्हें लड़की पसंद आ गई तो मैं वहीं पर उसका रिश्ता पक्का कर दूंगा।
जब सुनैना ने सुमित से लड़के के बारे में पूछा तो सुमित मुस्कुराते हुए बोला”लड़का काफी पढ़ा लिखा है लेकिन बेरोजगार है और दिन भर घर में ही रहता है वैसे भी उसे काम करने की कोई जरूरत नहीं है उसके पिता का अपना फर्नीचर का व्यवसाय है जिससे उन्हें काफी कमाई हो जाती है।”पति की बात सुनकर सुनैना का मन दुखी हो गया था क्योंकि उसकी बेटी के दोनों ही अरमान अधूरे रह गए थे ना ही उसका घर बना था और ना ही उसे नौकरी करने वाला वर मिला था जब उसने सुमित को अंजलि की बात समझाने का प्रयास किया तो उसने सुनैना की बात मानने से साफ इनकार कर दिया।
जब सुमित सुनैना को लड़के के बारे में बता रहे थे तो अंजलि उस वक्त घर में ही थी उसने अपने पापा की सारी बातें सुन ली थी उसने अपने चाचा और फूफा से कहा कि वे दोनों उसके पापा को समझाएं कि वह उसकी शादी उस बेरोजगार लड़के से ना करें परंतु, उसकी बात मानने से दोनों ने साफ़ इनकार कर दिया तब वह अपने कमरे में जाकर” मेरी तो कोई भी नहीं सुनता” यह कहकर रोने लगी थी।
तब बेटी को दुखी देखकर सुनैना उसे समझाते हुए बोली” बेटी जिसकी कोई नहीं सुनता उसकी भगवान सुनता है जा तू अपने मन की इच्छा भगवान के सामने प्रकट कर तुम्हारी भगवान सुनेगा।”अपनी मम्मी की बात सुनकर अंजलि के मन में एक विश्वास की लौ जल उठी थी वह तुरंत घर के पास स्थित एक मंदिर में गई जिसमें वह रोजाना शाम के समय दिया जलाने जाती थी वह बंसी वाले के सामने हाथ जोड़कर बोली” हे प्रभु !आप सब की सुनते हो मेरी क्यों नहीं सुनते?”यदि आज आपने मेरी इच्छा का मान नहीं रखा तो मैं आज के बाद कभी भी आपके सामने अपने मन की इच्छा प्रकट नहीं करूंगी”यह कहकर अंजलि अपने घर आ गई थी।
कहते हैं जब भक्त सच्चे मन से अपने भगवान को पुकारता है तो भगवान उसकी प्रार्थना जरूर स्वीकार करता है अंजलि की प्रार्थना भी भगवान ने तुरंत स्वीकार कर ली थी जब अंजलि भगवान के सामने प्रार्थना कर रही थी उसी वक्त सुमित के फोन पर लड़के के पिता माधव का फोन आ गया था कि शूक डूब रहा है हमारे पंडित ने बताया है ऐसे में लड़की देखना शुभ नहीं होता इसलिए हम अभी लड़की देखने का निर्णय रद्द कर रहे हैं। माधव की बात सुनकर सुमित कुछ सोचने लगा था।
उसी दौरान ईश्वर की प्रेरणा से उसकी सोच में परिवर्तन हुआ वह मुस्कुराते हुए अंजलि से बोला” अब विवाह नहीं होगा पहले हमारा घर बनेगा फिर तुम्हारी शादी होगी”पापा की बात सुनकर अंजलि के चेहरे पर मुस्कान आ गई थी और कुछ ही दिनों के बाद उनके घर का निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया था जिसके कारण जल्द ही उनका घर बनाकर तैयार हो गया था घर बनने के बाद ही सुमित का एक दोस्त रवि अंजलि के लिए अमित जो काफी पढ़ा लिखा था और एक कंपनी में मैनेजर की जॉब करता था का रिश्ता लेकर आ गया था जब अंजलि ने उस रिश्ते पर अपनी सहमति जता दी तो अमित ने उसकी शादी की तैयारी शुरू कर दी थी।”अब बेटी को आशीर्वाद दो” जैसे ही पंडित ने सुनैना से कहा तो वह अतीत के दायरे से बाहर आकर अपने दोनों हाथ अमित और अंजलि के सिर पर रखकर उन्हें प्यार से आशीर्वाद देने लगी थी।
#सिंदूर
लेखिका : बीना शर्मा