थैंक्यू मां जी, मुझे अच्छी सास बनाने के लिए – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

” मम्मी जी, आज मेरी फ्रेंड की मेंहदी है , मैं जाऊं??”

” हां शिवी, क्यों नहीं!! वैसे भी शादी के बाद तो ऐसा मौका मुश्किल से मिलता है.. नहीं तो सहेलियां पता नहीं कौन से शहर में होती हैं और हम कौन से शहर में। तुम्हारी सहेली तो इसी शहर में है तो तुम जरूर जाओ। और हां अगर तुम्हें कोई मैचिंग ज्वेलरी चाहिए तो मेरे बाक्स में देख लो।”

” थैंक्यू मम्मी जी, यू आर सो स्वीट…. ” कहते हुए शिवी अपनी सास हेमा जी से लिपट गई।

बालकनी में बैठकर धूप सेंकती हुई हेमा जी की सास मनोरमा जी जो कुछ दिन यहां रहने के लिए आईं थीं … उन्होंने जब अपने बेटे की बहू और पोते की बहू को इस तरह लिपटते चिपकते देखा तो हैरानी से उनकी आंखें चौड़ी हो गईं ।

शिवी खुशी से उछलते हुए अपने कमरे में गई तो मनोरमा जी अपनी बहू हेमा के पास आईं और बोलीं,

” बहू, ये कैसी बहू है जिसे ना कोई सहूर से ना सास ससुर से बात करने का तरीका… !! लगता है तूने आते हीं इसे सर पर चढ़ा लिया। ना कोई रोक टोक ना किसी काम की जिम्मेदारी … हमारे यहां भी तुम तीन तीन बहुएं थीं… कभी ऐसा उछन्ड पना देखा था क्या??

अपनी जेठानी को देख अपनी दोनों बहुओं को कैसे कस कर रखती है.. मजाल जो कभी घर में जोर की आवाज भी सुनाई दे। कुछ भी कह लेकिन बड़की मेरी तरह अच्छी सास बन गई लेकिन तूं पता नहीं कब अच्छी सास बनेगी !!!! ,,

हेमा जी अपनी सास की बातें सुनकर मुस्कुरा उठीं और अपनी सास के पैर छूते हुए बोली, ” मां जी, आज मैं भी आपको थैंक्यू बोलना चाहती हूं.. आपकी नजरों में ना सही लेकिन सच में आपके कारण हीं मैं अपनी बहू के लिए एक अच्छी सास बन पाई हूं … ,,

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मनोरमा जी हैरान सी अपनी बहू का मुंह ताकने लगीं।

” सच मां जी, आपने हमें जैसे रखा उससे मुझे ये सीखने को मिला कि मुझे अपनी बहू के साथ क्या नहीं करना चाहिए क्योंकि जितनी रोक टोक और पाबंदी मैंने सही है उससे हीं मुझे इस बात का आभास हुआ है कि एक बहू अपने ससुराल वालों से किस चीज की उम्मीद रखती है।

यदि हम उसकी इच्छाओं का सम्मान करेंगे तो हीं वो हमें भी दिल से अपनाएगी ना। जरूरी तो नहीं कि मेरी बहू भी मेरी तरह अपनी खुशियों से समझौता करती रहे!! ‌और ये सारी सीख मुझे आपसे हीं तो मिली है ना, इसलिए.. थैंक्यू मां जी।,,

इतनी देर में शिवी तैयार होकर अपने कमरे से इठलाती हुई बाहर आई ” मम्मी जी, मैं कैसी लग रही हूं?? “

” सो ब्यूटीफुल ” हेमा जी भी उसकी स्टाइल में बोलीं।

” मम्मी जी, यू आर दी बेस्ट सासु मां ऑफ दिस वर्ल्ड”

फिर शिवी अपनी दादी सास के पास जाकर उनसे पैर छूते हुए बोली,” दादी जी , मम्मी जी हमेशा बताती हैं कि आपने हीं उन्हें सबकुछ सिखाया है। मुझे भी आपसे बहुत कुछ सीखना है… आप सिखाएंगी ना?? ,,

मनोरमा जी के चेहरे पर भी एक हल्की सी मुस्कान आ गई , तभी शिवी का फोन बजा, उसकी एक सहेली उसे पिक करने आ गई थी।

शिवी निकल गई। सास बहू का ये रूप मनोरमा जी की समझ से परे था लेकिन उन्हें उनकी आपसी समझ अच्छी लग रही थी। वो भी सोच रही थी कि काश। वो भी अपनी बहुओं के साथ इतना खुल कर बोल पातीं। सास के साथ- साथ एक सहेली भी बन पाती!! लेकिन बीता समय लौटकर नहीं आता, हां आने वाले समय में हम खुद को बदलने की कोशिश जरूर कर सकते हैं।

लेखिका : सविता गोयल 

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