संस्कार तो बेटे को भी देने पड़ते हैं। – अर्चना खंडेलवाल

“मुझे उम्मीद नहीं थी सात साल बाद ऐसा कुछ होगा!!!

अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था सामने प्राची को देखकर लग रहा था कि दुनिया बहुत ही छोटी है सोना कभी प्राची से फिर से मिलेगी ऐसा सोना ने सपने में भी नहीं सोचा था।

जो रिश्ते संज्ञाहीन और भावशून्य हो जाये उन रिश्तों का कोई मोल नहीं होता है जीवन में हमें सभी रिश्ते बने बनाए मिलते हैं पर दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो हम खुद बनाते हैं। सोना को आज भी याद है वो अपनी बेटी को लेने के लिए स्कूल के गेट पर खड़ी थी तभी एक महिला ने पूछा कि “ये स्कूल कैसा है? मुझे भी अपने बेटे का एडमिशन करवाना है हम लोग अभी-अभी इस शहर में शिफ्ट हुए हैं।”

सोना ने मुस्कराकर कहा “बहुत ही अच्छा है और सभी टीचर्स भी बच्चों को अच्छे से पढ़ाती है मेरी बेटी आरवी तो कभी स्कूल से छुट्टी ही नहीं लेती है।” प्राची ने भी अपने बेटे का एडमिशन वही करवा दिया अब आरवी और अयांश दोनों अच्छे दोस्त हो गये साथ ही सोना और प्राची में अच्छी दोस्ती हो गई थी।

दोनों के परिवार में मिलना जुलना हो गया साथ ही शापिंग करना घूमना फिरना एक साथ हर जगह जाना यही सिलसिला चलता रहा। अब आरवी और अयांश भी बड़े हो रहे थे दोनों परिवारों की तरह अब इन दोनों बच्चों की दोस्ती भी गहरी हो गई थी दोनों एक दूसरे को मन ही मन चाहने लगे थे।

दोनों बच्चों की भावनाओं से परिवार वाले बेखबर थे उन्हें तो लगता था कि दोनों सामान्यतः दोस्त हैं। इस दोस्ती के पीछे का प्यार दोनों ही समझ नहीं पाई थी। प्राची अपने बेटे अयांश को लेकर काफी पजेसिव थी प्राची को लगता था कि अयांश कभी कोई गलती कर ही नहीं सकता था अयांश की हर मांग पूरी की जाती थी वो जिस भी चीज को चाहता उसे पाकर ही रहता था।

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आरवी अयांश से पढ़ाई में तेज थी और क्लास की मॉनीटर भी वो स्कूल की सभी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थी और पुरस्कार भी जीतती थी सोना का मन खुश रहता था कि उसकी बेटी उसका नाम रोशन कर रही है पर प्राची इसी बात से मन ही मन चिढ़ने लगी थी।

एक दिन प्राची और सोना साथ में शापिंग करने गये थे दोनों बच्चों को पढ़ाई करनी थी इसलिए वो साथ में ही पढ़ाई करने को रूक गये अयांश आरवी से मन ही मन प्यार करता था पर उस दिन उसने आरवी को ग़लत तरीके से छूने की कोशिश की जिसका आरवी ने विरोध किया। जब प्राची और सोना घर पर आये तो आरवी ने अयांश की शिकायत कर दी क्योंकि आरवी शुरू से दबंग लड़की रही थी।

ये सुनकर प्राची का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने आरवी को ही दोष देना शुरू किया कि जरूर आरवी ने उकसाया होगा मेरा बेटा ऐसा बिल्कुल हो ही नहीं सकता। प्राची ने आरवी के चरित्र को लेकर भी भला-बुरा कहना शुरू कर दिया।

सोना तुमने आरवी को संस्कार नहीं सिखायें इसे अगले घर जाना है जरा भी शर्म लिहाज नहीं है इस लड़की को बेटी की जात है अपनी मर्यादा में ही रहे तो अच्छा है। आरवी रोने लगी और सोना ये जानकर हैरान थी कि आखिर प्राची के मन में आरवी के लिए कितना जहर भरा हुआ है। प्राची संस्कार तो बेटे को भी देने पड़ते हैं ये जिम्मेदारी तुमने निभाई नहीं और मेरी बेटी को ही दोष दे रही हो।

“बेटे को कौन सा दूसरे घर जाना है? अरे!! बेटे तो कुछ भी कर सकते हैं उनके लिए मर्यादा की सीमा नहीं बनी है पर बेटी पर लांछन लग जायें तो कोई शादी नहीं करता अपनी बेटी संभालकर रखो।” प्राची ने गुस्से से कहा और अयांश को लेकर चली गई।

दोनों के पारिवारिक रिश्ते टूट गये दोनों ने गुस्से में एक दूसरे के फोन नंबर डिलीट कर दिये स्कूल से ही सोना को पता चला कि प्राची के पति का कहीं ट्रांसफर हो गया है। सात साल निकल गये थे सोना अपने मायके आई हुई थी वहीं बाजार में प्राची को देखकर चौंक गई। उसकी नजरें प्राची से मिली तो वो जाने लगी पर प्राची ने उसे आवाज देकर रोक लिया।

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“मुझे माफ़ कर दो सोना!! प्राची ने हाथ जोड़कर कहा मैंने हमेशा अयांश का पक्ष लिया कभी ना सोचा कि वो भी ग़लत हो सकता है मैंने आरवी पर झूठा लांछन लगाया मुझे उसी की सजा मिल रही है। अगर उस वक्त मैंने अयांश को उसकी गलती के लिए डांटा होता और उसे लड़कियों की इज्जत करना सिखाया होता तो आज मेरा अयांश भी मेरे साथ होता।”

“जब हमारा ट्रांसफर इस शहर में हो गया तो हम यहां आकर शिफ्ट हो गए मुझे पता था यहां तुम्हारा मायका है पर कभी पता पूछा ही नहीं और फोन नंबर भी डिलीट कर दिया था। यहां जब आये तो अयांश के स्कूल से शिकायतें आने लगी एक दो बार मैंने नजरअंदाज किया लेकिन एक बार मैंने खुद फोन पर अयांश को किसी लड़की को ब्लैकमेल करते हुए सुना तो मेरे पैरों से जमीन सरक गई और तब तक बहुत देर हो चुकी थी अयांश गलत संगत में पड़ गया था रोज रात को देर तक घर आना और नशा करना उसकी आदत हो गई थी। एक दिन घर पर सुबह-सुबह पुलिस आ गई किसी लड़की से सामूहिक बलात्कार के आरोप में उसे पकड़कर ले गये और वो जुर्म सही साबित हो गया। आज अयांश जेल में सजा काट रहा है और हम दोनों पति-पत्नी बाहर सजा काट रहे हैं।” मुझे माफ़ कर दो ये कहकर प्राची सुबकने लगी।

आरवी कैसी है? उसने सोना से पूछा। अच्छी है उसने अपना इंजीनियरिंग पूरा कर लिया है और कॉलेज में ही उसका प्लेसमेंट हो गया है वो अब अमेरिका में नौकरी कर रही है हम उसके लिए अच्छा लड़का देख रहे हैं अब तो उसकी शादी करनी है सोना ने बताया।

अच्छा है आरवी होशियार तो थी उसे एक दिन ये मुकाम हासिल करना ही था मैं चलती हूं आरवी से कहना हो सके तो मुझे वो माफ कर दें इतना कहकर प्राची चली गई।

सोना उसे दूर तक देखती रही सोचने लगी काश!!! प्राची अयांश को उसकी गलती पर डांटती और समझाती तो आज अयांश भी सही राह पर चलता।

बेटी के लिए संस्कारों की दुहाई देने वाले यह क्यों भुल जाते हैं संस्कार तो बेटे को भी देने पड़ते हैं।

चाहें बेटा हो या बेटी उसे अच्छा बनाने की जिम्मेदारी तो हर माता-पिता को निभानी होती है।

 

धन्यवाद

अर्चना खंडेलवाल

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