समधन के चरण – ज्योति अप्रतिम

Post View 470 ************** क्या बात है बहू ,जब हम तुम्हारे घर पहुंचे तो न तो तुम्हारी मम्मी हमें लिवाने आईं न ही उन्होंने हमारे पैर छुए। ओह मम्मीजी! लिवाने तो इसलिए नहीं आ पाई होंगी कि साथ पापाजी भी थे न!अब वे अपने समधी  से कहाँ बात करती हैं ? आप कह रही हैं … Continue reading समधन के चरण – ज्योति अप्रतिम