सबक – नीरजा कृष्णा

Post View 581 “रेवा, आज तुमसे मिल कर बहुत अच्छा लग रहा है। मुझे वो समय याद आ रहा है…जब मिनी के पापा के देहांत के बाद तुम कैसी बावली सी हो गई थीं।” रंजना आज काफ़ी वर्षों के बाद अपनी मित्र से मिल रही थी। उस समय की रेवा तो कहीं गुम हो चुकी … Continue reading सबक – नीरजा कृष्णा