“रिश्तो में नाराजगी सहन हो सकती है नफरत नहीं” – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

बहु…. जरा देखना यह वही राधा कृष्ण की मूर्ति है ना जो 3 साल पहले तुम्हारे पापा के रिटायरमेंट पर हमने दी थी किंतु यह क्या बात हुई उन्होंने हमारे 50वीं शादी की सालगिरह पर वही मूर्ति हमें वापस उपहार में दे दी यह तो गलत बात है, वह ऐसा कैसे कर सकते हैं? किसी की दी हुई चीज को क्या उनको वापस देना अच्छी बात है हमें तो यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई, जरूरी नहीं था कि वह इतना महंगा उपहार हमें देते

अगर इसकी जगह वह चांदी का सिक्का भी हमें देते तो हमें खुशी होती और निधि के सास  ससुर ऐसा कहकर गुस्सा होते हुए वहां से चले गए! तब निधि को भी लगा शायद यह  वही मूर्ति है किंतु उसकी मम्मी पापा ने ऐसा क्यों किया अगर उनके पास आर्थिक समस्या भी थी तो उस वाली मूर्ति को बेचकर कोई नई मूर्ति ही दे देते या कुछ और चीज भी तो दे सकते थे, जरूरी था क्या इस मूर्ति को वापस देना?

पता नहीं मम्मी पापा को क्या हो गया अब वह अपने सास ससुर से कैसे नजरे मिलाएगी और इस बात पर तो निधि को भी बहुत गुस्सा रहा था और उसने अपने मायके फोन मिलाकर कहा ….मम्मी पापा, यह आपने क्या किया? आपने तो मेरी ससुराल में बेइज्जती करवा दी, मम्मी आपको पता है ना 3 साल पहले मेरे पापा जी मम्मी ने आपके रिटायरमेंट पर जो मूर्ति दी थी आपने वही वापस हमें दे दी,

जरा तो सोचते कि इसका परिणाम क्या होगा? नहीं बेटा… ऐसी कोई बात नहीं है हमने वह मूर्ति वापस नहीं की थी बल्कि हम तो ऐसी ही दूसरी मूर्ति लेकर आए थे क्योंकि हमें वह मूर्ति बहुत पसंद आई थी! रहने दो पापा मुझे आपकी कोई बात नहीं सुननी, क्या मुझे नहीं पता यह वही मूर्ति है, उधर पापा मम्मी निधि को  समझाते रहे किंतु निधि के ऊपर कोई असर नहीं हो रहा था,  वह बस उनसे बहस करती जा रही थी

और धीरे-धीरे करके उसके गुस्से ने उसके और मायके वालों के बीच में नफरत की दीवार  खड़ी कर दी, उसको तो अपने सास ससुर से बात करने में भी शर्म आ रही थी, फिर एक दिन  हिम्मत करके उसने कहा…. पापा जी मम्मी जी अपने पापा मम्मी की तरफ से मैं आपसे माफी मांगती हूं पता नहीं क्या कारण था कि उन्होंने वही मूर्ति आपको दे दी और निधि के सास ससुर ने बदले में कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि

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उन्हें भी अपनी समाधियों से नाराजगी के साथ-साथ नफरत भी होने लगी थी क्या कोई अपने समाधियों के साथ भी ऐसा कर सकता है? खैर इस बात को 2 महीने बीत गए! उधर निधि के पापा मम्मी का भी बुरा हाल था वह समझ ही नहीं पा रहे थे कैसे अपनी बेटी की ससुराल में सब कुछ ठीक करें निधि तो कोई बात सुनने को तैयार ही  नहीं थी!

एक दिन उन्होंने निधि और उसके पूरे परिवार को खाने पर बुलाया बड़ी मुश्किलों से निधि और उसके ससुराल वाले माने और वह निधि के मायके पहुंच गए, खाना पीना खाने के बाद में निधि के पापा अपने समाधियों को अपने घर के मंदिर में ले गए और उन्होंने देखा राधा कृष्ण की वही मूर्ति जो उन्होंने 3 साल पहले निधि के पापा को दी थी वह तो मंदिर में रखी हुई है

तो फिर हमें जो  मूर्ति दी उसका क्या  राज है? निधि के पापा अपने  समधियों की मनोस्थिति समझ गए और बोले ….भाई साहब बात ऐसी है जब आपने हमें यह मूर्ति उपहार में दी थी हमें यह मूर्ति इतनी पसंद आई कि  इससे सुंदर वस्तु की कल्पना भी नहीं कर सकते और वह मूर्ति हमें इतनी पसंद आई थी कि हमें लगा आपको भी आपकी शादी की सालगिरह पर कुछ इसी तरह का तोहफा देना चाहिए

और बहुत सोचने के बाद जब हम बाजार में गए तो वहां हमें ऐसी ही दूसरी मूर्ति मिली और उससे हमारी नजर ही नहीं हट रही थी, हमने बहुत सी वस्तुएं  देखी पर इस मूर्ति के अलावा हमें कुछ नहीं पसंद आया आखिरकार हमने यह फैसला किया की ऐसी ही मूर्ति आपको भी उपहार में दी जाए ताकि दोनों घरों में राधा कृष्ण का आशीर्वाद बराबर बना रहे, आपने शायद ध्यान से नहीं देखा 

दोनों मूर्तियों में थोड़ा सा अंतर है,  जिस चौकी पर भगवान खड़े हैं एक का रंग लाल है और एक का रंग पीला है आपके पास पीली है और हमारे पास लाल है और आपने भाई साहब यह कैसे सोच लिया हम बेटी के ससुराल से आए हुए उपहार को उसी के यहां वापस दे देंगे, इतना तो हम भी समझते हैं कि किसी के दिए हुए उपहार को उसी को वापस नहीं देना चाहिए, अगर  हमारे किए से आपके दिल को ठेस पहुंची हो

तो हम बहुत शर्मिंदा है भाई साहब रिश्तो में नाराजगी सहन हो सकती है पर नफरत नहीं! हम इस गलतफहमी के लिए आपसे हाथ जोड़कर माफी मांगते हैं और निधि के पापा मम्मी ने उसके सास ससुर के आगे हाथ जोड़ लिए! तब निधि के सास ससुर बोले…. नहीं-नहीं भाई साहब गलती तो हमसे समझने में हुई है हमने यह कैसे सोच लिया कि आप वही मूर्ति  हमें वापस उपहार स्वरूप देंगे,

माफी तो हमें मांगनी चाहिए हमने आपके बारे में न जाने क्या-क्या उल्टा सीधा सोच लिया था और हमारी नाराजगी ने हमारे रिश्ते में एक नफरत की दीवार सी खड़ी कर दी हम भी इसके लिए बेहद शर्मिंदा हैं आज आपने हमें यहां बुलाकर सारी गलतफहमियां दूर कर दी! तब निधि के पति राघव बोले… चलो अच्छा हुआ सही समय पर दोनों परिवारों की गलतफहमी दूर हो गई और वह अपने सास ससुर से बोला…

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पापा मम्मी आपका यह खाने पर बुलाने का विचार हमें बहुत पसंद आया वरना यह नफरत की दीवार तो बढ़ती ही चली जाती और इसमें कोई भी खुश नहीं रहता, ना मैं ना निधि और ना दोनों मम्मी पापा !राघव की बात सुनकर निधि की भाभी सभी के लिए गुलाब जामुन लाते हुए बोली… चलो अब जब सब कुछ सही हो ही गया है तो क्यों ना मीठा हो जाए और फिर सभी ने एक-एक गुलाब जामुन खाते हुए

और हंसते हुए अपने घर को विदा ली! आज दोनों परिवारों के बीच से नफरत की दीवार पूरी तरह हट गई थी और एक दूसरे के पति सम्मान और भी बढ़ गया था, कभी-कभी छोटी सी गलतफहमी बहुत विकराल रूप धारण कर लेती है किंतु जरूरत है उसे सही समय पर दूर करने की !

    हेमलता गुप्ता स्वरचित 

     कहानी प्रतियोगिता (नफरत की दीवार)

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