रत्तीभर हक – संध्या त्रिपाठी  : Moral Stories in Hindi

Post View 18,001 अरे , ये सब क्या फैला के रखी हो सुमन ….?  जाने की तैयारी करनी थी …. कपड़े वगैरह रखती… तो तुम ये सब फालतू में …..तबीयत ठीक नहीं रहती  , क्यों बना रही हो बेकार में….. आजकल कौन खाता है ये सब…. सूर्य दत्त जी ने पत्नी सुमन से कहा….।         आप … Continue reading रत्तीभर हक – संध्या त्रिपाठी  : Moral Stories in Hindi