रणभेदी – रीमा ठाकुर

Post View 250 बड़े बड़े    सरकंडे ‘घनी घास उसपर दलदल “ जाने कितनी  देर और चलना होगाः ” इनके बीच “ नरकुल के पेड हल्की हवा के साथ ” झूम रहे थे!  चांदनी रात चांद अपने सौदर्य से ” तारों के बीच मुस्कुरा रहा था!  पूस का महिना ” पर आकाश बिना परवाह किये … Continue reading रणभेदी – रीमा ठाकुर