पश्चाताप – अपर्णा गर्ग : Moral Stories in Hindi
Post View 3,543 कमरे की छत से पानी टपक रहा था, ज्योति कभी एक तरफ बर्तन रखती, तो कभी दूसरी ओर… न तो बारिश रूक रही थी और न ही उसके पास और बर्तन बचे थे, जिसे वो टपकते हुए पानी के नीचे लगा दे। हे भगवान! अब तो रहम करो, कब तक बरसोगे। ऐसा … Continue reading पश्चाताप – अपर्णा गर्ग : Moral Stories in Hindi
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