परख – माता प्रसाद दुबे : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : गीता रोज की तरह आज भी अविनाश का इंतजार कर रही थी..उसकी और अविनाश की नजदीकियां हुए एक वर्ष बीत चुका था..शायद ही कोई ऐसा दिन बीता हो जिस दिन वह एक दूसरे से ना मिलते हो,अविनाश शाम को अपने आफिस से निकलने के बाद गीता से मिलने के बाद ही अपने घर जाता था..घर में उसकी मां कौशल्या देवी के सिवा और कोई नहीं था, बड़ी बहन पायल की शादी हो चुकी थी..

अविनाश के पिता का दशकों पहले देहांत हो चुका था,उसकी मां कौशल्या देवी ने अनगिनत मुसीबतों का सामना करते हुए अविनाश और पायल की जीवन की सभी कठिनाईयों को दूर करके उन्हें सुखमय जीवन प्रदान किया था..अविनाश सरकारी विभाग में उच्च पद पर कार्यरत था..

पायल की शादी सुशिक्षित संस्कारवान परिवार में हुई थी उसका जीवन खुशियों से परिपूर्ण था..कौशल्या देवी अविनाश की जल्द शादी करके घर में बहू लाने के लिए बेचैन रहती थी,उसने अविनाश के लिए दूर के रिश्ते की अपनी एक बहन की लड़की को अविनाश के लिए पसंद भी कर लिया था..

मगर अविनाश गीता से प्रेम करता था, जिसकी वजह से वह शादी की बात को लेकर अपनी मां कौशल्या देवी को पिछले छह महीनों से किसी न किसी बहाने से कुछ दिन और शादी ना करने की बात कहकर टाल देता था। अविनाश सही समय देखकर गीता को अपनी मां कौशल्या देवी से मिलवाने का लिए प्रयत्न कर रहा था।

“आज फिर आप देर से आए है, शायद आप यह भूल जाते है कि कोई आपके आने का बेसब्री से इंतजार करता है?”गीता अविनाश को देखकर मुंह सिकोड़ते हुए बोली।

 “गीता! तुम्हारी नाराजगी जायज है, वैसे भी आजकल मां मेरी शादी के लिए रोज बातें करती है, उसने तो एक लड़की देख भी लिया है”अविनाश मुस्कुराते हुए बोला।”क्या कहा तुमने मैं कुछ समझी नहीं,अगर तुमने किसी और से शादी किया तो यह समझ लो वह दिन मेरी जिंदगी का आखिरी दिन होगा?”गीता गुस्से से लाल होकर अविनाश की आंखों से आंखें मिलाती हुई बोली।”

 इसलिए तो आज मैं तुम्हें मां से मिलवाने ले चल रहा हूं, पहले तुम अपने घर चलकर तैयार हो जाओ मैं तुम्हारे पापा को बता दूंगा” अविनाश गीता के करीब आते हुए बोला।”आप पापा की चिंता मत करें,वह वहीं करते है जो मैं कहती हूं ” गीता अविनाश को समझाते हुए बोली।

“मगर कपड़े तो बदल लो घर चलकर?” अविनाश हैरान होते हुए बोला।”अरे यार कपड़ों को क्या हुआ ठीक ही तो है ” गीता अपने अधखुले शरीर को देखते हुए बोली।”गीता!मेरी मां पूजा पाठ करने वाली संस्कारों को  सर्वोपरि मानने वाली महिला हैं कही वह तुम्हारे ऐसे कपड़े देखकर कुछ गलत ना समझ बैठे?”अविनाश चिन्तित होते हुए बोला।

“कुछ नहीं समझेंगी आप बेकार में डर रहे है,वह आपसे बेहद प्यार करती है,ऐसे कपड़े तो हर लड़की पहनती हैं ” गीता मुंह सिकोड़ते हुए बोली।”चलों ठीक है, आगे फिर मुझे कुछ मत कहना?” अविनाश गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए बोला।

“नहीं कहूंगी ” गीता कार की अगली सीट पर बैठते हुए बोली। अविनाश मुस्कुराते हुए गाड़ी स्टार्ट करके गीता के साथ अपने घर की ओर निकल गया।

गीता को अविनाश के घर की सभी जानकारी थी,एक वर्ष से वह अविनाश के करीब थी..उसे अविनाश ने अपनी मां कौशल्या देवी व घर में उनका हाथ बंटाने वाली माया मौसी (नौकरानी) के बारे में बताया था।

अविनाश गीता को लेकर अपने घर पर पहुंच चुका था। मुख्य द्वार पर खड़ी माया मौसी अविनाश के साथ किसी लड़की को आता देखकर मुस्कुराती हुई घर के अंदर चली गई। अविनाश गीता को लेकर घर के अंदर पहुंच चुका था.. सामने कौशल्या देवी को सोफे में बैठा देखकर अविनाश ने गीता को उनके चरण स्पर्श करने का इशारा किया..गीता ने झुक कर कौशल्या देवी के चरण के बजाय दोनों घुटनों को स्पर्श किए,”खुश रहो बेटी “

कौशल्या देवी सोफे पर गीता और अविनाश को बैठने का इशारा करते हुए बोली।”अम्मा! यह गीता है” अविनाश कौशल्या देवी का हाथ पकड़ते हुए बोला। कौशल्या देवी की नजरें गीता को गौर से देख रही थी..गोरी चिट्टी देखने में सुंदर दिखने वाली गीता के शरीर पर कम कपड़े खुले बाल उसे पसंद नहीं आ रहें थे 

फिर भी वह इन सब बातों को नजरंदाज करते हुए गीता से स्नेह दर्शाते हुए उससे बातें करने लगी। कुछ देर तक गीता खामोश रहने के बाद कौशल्या देवी से खुलकर बातें करने लगी..वह अपने और अविनाश के रिश्ते के बारे में कौशल्या देवी को बताने लगी.. 

कौशल्या देवी ने जब उससे उसके घर परिवार के बारे में पूछा तो वह बेहिचक बोली।”मम्मी! मेरे पापा! मम्मी! और एक छोटा भाई है जो बाहर रहकर पढ़ाई कर रहा है,घर के सभी फैसले मैं ही लेती हूं,मेरे पापा मुझपर किसी भी प्रकार की बंदिश नहीं लगाते है” गीता बिना रूके एक ही सांस में बोले जा रही थी। अविनाश चुपचाप बैठा हुआ था..माया मौसी चुपचाप खड़ी एक टक गीता की ओर देख रही थी। 

कौशल्या देवी ने माया को चाय नाश्ता लाने के लिए कहा वह किचन की तरफ चली गई। कुछ ही देर में माया चाय नाश्ता लेकर आ गई गीता नाश्ता करते हुए अविनाश से बोली।”क्या आप मुझे अपना घर नहीं दिखाएंगे?” गीता की ओर देखकर अविनाश ने सिर हिलाते हुए बोला “क्यूं नहीं दिखाऊंगा” गीता अविनाश का घर देखने के लिए उठकर खड़ी हो गई।”दीदी आठ बज रहे है,

चलिए पूजा का समय हो गया है”माया कौशल्या देवी की ओर देखते हुए बोली।”अरे मैं तो भूल ही गई थी?”कौशल्या देवी सोफे से उठते हुए बोली।”ठीक है मम्मी!आप पूजा करिए तब तक मैं अविनाश के साथ अपना घर देखती हूं” गीता ढीटता दर्शाते हुए बोली।”ठीक है बेटी! आजकल के बच्चों को पूजा पाठ में कोई दिलचस्पी नहीं होती है ” माया देवी चिन्तित होते हुए बोली। अविनाश गीता को अपना घर दिखाने लगा कौशल्या देवी चुपचाप माया के साथ घर में बने मन्दिर की ओर चली गई।

 

रात के नौ बज रहे थे,घर के ऊपर  छत से गीता की जोरदार ठहाके की आवाज आ रही थी.. अविनाश गीता को कुछ समझा रहा था मगर गीता कहा मानने वाली थी..वह उसे परेशान देखकर मुस्कुरा रही थी। “अविनाश बेटा! कौशल्या देवी अविनाश को पुकारते हुए बोली।

“अभी आया अम्मा! कहते हुए अविनाश गीता के साथ छत से नीचे पहुंच चुका था।”बेटा! रात के नौ बज रहे है,तुम गीता बेटी को उसके घर छोड़ दो” जी अम्मा! अविनाश घड़ी की ओर देखते हुए बोला।”अच्छा मम्मी!अब मैं चलती हूं,आप बहुत अच्छी है” गीता कौशल्या देवी से विदा लेते हुए बोली।”संभल कर जाना बेटा! कौशल्या देवी अविनाश को निर्देश देते हुए बोली। कुछ ही देर में अविनाश गीता के साथ कमरे से बाहर निकल गया।

कौशल्या देवी एकटक माया की ओर देख रही थी “क्या हुआ दीदी?”माया कौशल्या देवी को चिन्तित देखकर बोली।”माया तुझे यह लड़की कैसी लगी?”कौशल्या देवी माया के मन को टटोलते हुए बोली।”हम क्या कहें दीदी! मुझे तो इस लड़की पर संदेह हो रहा है?

” माया सकुचाते हुए बोली।”तुम ठीक कह रही हो माया, मुझे अपने बेटे के लिए एक सुंदर संस्कारी सुशील कन्या चाहिए थी,जो अविनाश के पिता का बनाया हुआ यह आलीशान घर संभालने के लायक हो,यह लड़की तो काफी खुले दिमाग की संस्कारों से हीन लगती है,

 मैंने उसे अच्छी तरह परख लिया है, उसके अंदर अपने से बड़ों का सम्मान भी नहीं है, मेरे पैरों को न छूकर उसने घुठनो को छुआ, पूजा का नाम सुनते ही वह दूर हो गई” कहते हुए कौशल्या देवी खामोश हो गई।”दीदी आप बिल्कुल ठीक कह रही है,मुझे तो लगता है कि इसने हमारे लल्ला (अविनाश)को सोच समझ कर अपने प्रेम जाल में फंसाया है?”माया गुस्साते हुए बोली।

“माया मैं अपने अविनाश को दुखी नहीं देख सकती आखिर मेरा एक ही तो बेटा है,वह भी अपनी अम्मा को बहुत प्यार करता है,वह मुझे दुखी नहीं देख सकता आखिर मैं कैसे उसे समझाऊ कि यह लड़की उसके जैसे लड़के के लिए नहीं है,वह तो काफी दिनों से इसके मोहपाश में कैद है, इसलिए हर बार शादी की बात पर वह मुझसे आनाकानी करता था?” कौशल्या देवी उदास होते हुए बोली।

“दीदी आपको ही कुछ करना पड़ेगा लल्ला को इस लड़की से बचाने के लिए” माया कौशल्या देवी को समझाते हुए बोली।”हा अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा वरना यह घर जो एक मन्दिर की तरह है,वह नष्ट हो जाएगा,मेरे बेटे का जीवन बर्बाद हो जायेगा ” कौशल्या देवी सख्त लहजे में बोली। कौशल्या देवी ने गीता के बारे में जानकारी प्राप्त करके उसकी मंशा को समझकर अपने बेटे को उसके जाल से आजाद कराने का दृढ़ निश्चय कर लिया था।

रात के दस बज रहे थे, अविनाश गीता को उसके घर छोड़कर वापस आ चुका था,”अम्मा! तुम्हें गीता पसंद आई की नहीं?” अविनाश घर के अंदर आकर कौशल्या देवी से लिपटते हुए बोला।”मेरे बेटे की पसंद को भला मैं कैसे नापसंद कर सकती हूं?” कौशल्या देवी अविनाश को दुलारते हुए बोली। 

अविनाश खुशी से झूम रहा था मगर कौशल्या देवी के मन में अनगिनत सवाल उसे कटोच रहें थे,वह अपनी मनोदशा को नियंत्रित करते हुए अविनाश से गीता के बारे में कुछ नहीं बोली,ऐसा करके वह अविनाश को दुखी नहीं करना चाहती थी,वह अच्छी तरह जानती थी 

कि उसका बेटा अविनाश अपनी मां के सम्मान के आगे हर वह चीज ठुकरा देगा जो उसे प्रिय हो, इसलिए उसने सोच विचार करके अपने बेटे को गीता के चुंगल से आजाद कराने के लिए और अपने घर को बचाने के लिए सही समय का इंतजार करना ही ठीक समझा,जिसके लिए उसे गीता और उसके परिवार की सच्चाई को जानने समझने की जरूरत थी। 

अविनाश खाना खाकर अपने कमरे में सोने के लिए चला गया था, कमरे में कौशल्या देवी के साथ माया मौजूद थी,”माया तुम किसी ऐसे आदमी की तलाश करो,जो मुझे गीता के परिवार व उसकी जीवनशैली के बारे में सारी जानकारी एकत्र करके मुझे दें,इस काम को बहुत ही गोपनीयता से करना है,तुम्हारे लल्ला को इसकी भनक भी न लगने पाए,जितने भी पैसे खर्च हो मैं दूंगी” 

कौशल्या देवी माया को समझाते हुए बोली।माया कुछ देर तक सोचती रही फिर बोली।”दीदी बस समझिए कि आपका काम हो गया,मैं ऐसे एक साहब को जानती हूं,वह जरुर हमारी मदद करेंगे,मैं कल उनसे मिलकर आपको बताऊंगी” कहते हुए माया कमरे से बाहर निकल गई।

सुबह के नौ बज रहे थे, अविनाश घर से बाहर निकल चुका था, कौशल्या देवी उत्सुकता से माया का इंतजार कर रही थीं, कुछ ही देर में माया अपने साथ किसी व्यक्ति को लेकर कौशल्या देवी के पास पहुंच चुकी थी। “दीदी यह विकास भैया है,आप की मदद करेंगे,मैंने इनसे सारी बातें बता दिया है ” 

माया कौशल्या देवी को दिलासा देते हुए बोली। उस व्यक्ति ने कौशल्या देवी को सम्मान देते हुए अभिवादन किया और बोला। “माता जी!आप मुझे अपनी होने वाली बहूं और उसके घर का पता बताए,मैं पूरी कोशिश करूंगा कि उनके बारे में सारी जानकारी एकत्र करने की पूरी कोशिश करूंगा 

” कौशल्या देवी को गीता का घर कहा है, इसके बारे में उसने अविनाश से कुछ भी नहीं पूछा था,”बेटा! मैं उसका घर कहा है यह नहीं जानती,बस इतना जानती हूं कि वह सपना कालोनी में कही रहती है ” कौशल्या देवी चिन्तित होते हुए बोली। “अच्छा माता जी! 

गीता के पिता का नाम तो आपको पता होगा?” वह व्यक्ति कौशल्या देवी को देखते हुए बोला।”हा याद आया अविनाश ने बताया था, शैलेन्द्र नाम है उनका और वह प्रापर्टी का काम करते है” कौशल्या देवी माया की ओर देखते हुए बोली।”ठीक है माता जी मैं सब ढूंढ लूंगा आप बिल्कुल भी चिंता ना करें ” कहते हुए वह व्यक्ति उठकर खड़ा हो गया। “बेटा! यह लो और तुम पैसे कि चिंता मत करना” कौशल्या देवी पांच हजार रुपए के नोट उस व्यक्ति के हाथों में पकड़ाते हुए बोली।

” माता जी इसकी अभी कोई जरूरत नहीं है,माया आंटी ने मुझे सब कुछ बताया है,जब जरूरत होगी तो बता दूंगा ” वह व्यक्ति कौशल्या देवी का अभिवादन करके वहा से चला गया।, सुबह-शाम दोनों वक्त गीता उससे मिलने आती थी।  “अम्मा! गीता के पापा जल्द ही हमारी शादी करना चाहते है,तुम दीदी और जीजा को बुला लो उनसे बात करने के लिए?”

कौशल्या देवी कुछ देर अविनाश को देखती रही,”बेटा”अगले महीने पितृपक्ष शुरू हो रहें हैं, ऐसे में अभी किसी भी प्रकार की जल्दबाजी ठीक नहीं है, तूं उनसे तीन महीने रूकने के लिए कह दें ” कौशल्या देवी अविनाश को समझाते हुए बोली।”ठीक है अम्मा!जैसा तुम कहोगी वैसा ही होगा” कहकर अविनाश अपने कमरे में चला गया।

दस दिन बाद उस व्यक्ति ने गीता के बारे में सारी जानकारी कौशल्या देवी को बताई जिसे जानकर कौशल्या देवी के होश उड़ गए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि गीता की पहले भी शादी हो चुकी थी,वह शादी के एक महीने बाद ही ही अपने पति को छोड़कर अलग हो गई थी, काफी पैसा उसने अपने पिता के साथ मिलकर ससुराल वालों से वसूला था,

उसका कोई भाई बाहर नहीं पढ़ता था, बल्कि वह अपनी मां के साथ अपनी बहन और पिता से अलग रहता था,गीता के साथ रहने वाली उसकी मां नहीं थी, उसे उसके पिता शैलेन्द्र ने रखा हुआ था,जो कि एक नंबर का शराबी था, दोनों बाप-बेटी मिलकर लोगों का शिकार करते थे,इनके गलत कामों की वजह से ही गीता की मां अपने बेटे को लेकर अपने भाई के घर रहती थी,यह सब बातें जानकर कौशल्या देवी भय से कांप रही थी।

“दीदी! अब आपको बहुत हिम्मत से काम लेना होगा, वरना लल्ला का और आपका जीवन नर्क हो जाएगा ” माया कौशल्या देवी का हौसला अफजाई करते हुए बोली। “मगर माया! हम अविनाश की आंखों पर चढ़े पर्दे को कैसे हटाएंगे,वह तो गीता का दीवाना बन चुका है,यह सब कहकर हम उसे कैसे यकीन दिलाएंगे,

कही वह हमें ही न गलत समझने लगे ” कौशल्या देवी चिन्तित होते हुए बोली।”आप सही कहती है दीदी!उस चुड़ैल ने पहले से ही सारी तैयारी सोच समझकर किया है,हमे कुछ और ही सोचना होगा,गीता का मकसद सिर्फ पैसा और यह घर है,हम लल्ला को यह बात नहीं समझा पाएंगे इसके लिए हमें एक बार फिर विकास भैया की मदद लेनी पड़ेगी मैं उनसे बात करती हूं” कहते हुए माया और कौशल्या देवी गंभीर चिंता में डूब गई।

रात के आठ बज रहे थे घर पहुंचते ही कौशल्या देवी को लेटा हुआ देखकर अविनाश परेशान होने लगा “क्या हुआ अम्मा!तुम लेटी क्यूं हो, तबियत ठीक है”अविनाश चिन्तित होते हुए बोला।”ठीक है बेटा!बस पैर में मोच आ गई है” कौशल्या देवी कराहती हुई बोली।”मौसी! डाक्टर को दिखाया कि नहीं?

“अविनाश माया को देखते हुए बोला।”दिखाया है बेटा! दो चार दिन दीदी को चलने फिरने के लिए मना किया है” माया परेशान होती हुई बोली। “ठीक है अम्मा तुम आराम क्यों कोई जरूरत नहीं चलने फिरने की” अविनाश कौशल्या देवी के पैर दबाते हुए बोला।”ठीक है बेटा! मैं कहा चल फिर रही हूं,मगर जब माया चली जाती है तो मैं अकेली रहती हूं,

बस यही चिंता है”कौशल्या देवी उदास होते हुए बोली।”ठीक है अम्मा मैं एक हफ्ते की छुट्टी ले लेता हूं” अविनाश कौशल्या देवी को पकड़ते हुए बोला।”तूं क्यूं छुट्टी लेता है मैं ठीक ही तो हूं,कुछ दिन के लिए हमारी होने वाली बहूं को यहा दिन में बुला ले,दिन भर रहेगी मेरे पास शाम को उसे घर छोड़ देना

” कौशल्या देवी अविनाश को दुलारते हुए बोली।”अरे हां अम्मा!यह तो मैंने सोचा ही नही, वैसे भी गीता दिन में फ्री रहती है, मैं उसके पापा से बात करके कल से उसे रोज दिन में तुम्हारे पास छोड़ दिया करुंगा” अविनाश खुश होते हुए बोला।”लल्ला तुम कल से बहूरिया को दिन में दीदी के पास छोड़ देना जिससे मेरी भी चिंता कम हो जाएगी” माया कौशल्या देवी की ओर देखते हुए मुस्कुराते हुए बोली।” ठीक है मौसी!कहकर अविनाश अपने कमरे में चला गया। कौशल्या देवी और माया एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रही थी।

दूसरे दिन से सुबह गीता को अपने घर छोड़कर ही अविनाश अपने आफिस जाता था,गीता बहुत खुश थी कि उसे शादी से पहले ही सब कुछ समझने का पूरा मौका मिल गया था, कौशल्या देवी और माया गीता की हर हरकत को अंजान बनकर उस पर नज़र गड़ाए हुए थी,माया रोज दिन में सारा काम करके चली जाती थी,

गीता कुछ न करके घर की हर चीज पर ताक-झांक करती टीवी देखतीं और कौशल्या देवी से इधर-उधर की बातें पूछकर अपना दिन व्यतीत करती थी, उनके पास वह दस मिनट से ज्यादा बैठती तक नहीं थी,खाना पीना मौज उड़ाना और अविनाश के आगे मीठी-मीठी बातें करना जिसमें वह परांगत थी,वही कर रही थी,

“मम्मी आपको कुछ चाहिए तो नहीं” गीता कौशल्या देवी के पास बैठते हुए बोली।”बेटी मुझे कुछ नहीं चाहिए मगर आज माया को पैसा देना है, उसे काम है” कौशल्या देवी गीता से स्नेह जताती हुई बोली।”तो दें दीजिए, इसमें चिन्ता की क्या बात है” गीता हैरान होते हुए बोली।”बेटी! मैं उठकर अलमारी खोल सकती हूं क्या

” ओह मम्मी!यह तो मैंने सोचा ही नहीं था” गीता कौशल्या देवी को देखते हुए बोली।”बेटी यह ले चाभी, और अलमारी से दस हजार रुपए निकालकर रख ले अभी माया आएगी तो उसे दें देना” कौशल्या देवी गीता को अलमारी की चाभी पकड़ाती हुई बोली।अलमारी की चाभी अपने हाथ में लेकर गीता खुशी से झूमने लगी,

उसकी आंखों में चमक साफ दिखाई दे रही थी, कौशल्या देवी चुपचाप उसके बदलते भावों को महसूस कर रही थी। “ठीक है मम्मी मैं अभी दस हजार रूपए निकाल लेती हूं,माया आंटी के लिए” गीता कौशल्या देवी की ओर देखते हुए बोली। “बेटी! तुमको भी कुछ पैसे चाहिए हो तो ले लेना, आखिर कल को तुम्हीं को यह सब करना है” कौशल्या देवी गीता को देखते हुए बोली।”जैसा आप कहें मम्मी! गीता अलमारी की ओर बढ़ गई।

अलमारी में नोटों की गड्डियों को देखकर गीता हैरान होने लगी, नोटों के बगल रखें छोटे बक्सों को खोलते ही उसके चेहरे की रंगत बदलने लगी लाखों के जेवरों को उन बक्सों में देखकर उसे अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था,”कितना माला रखा है इस बुढ़िया के पास” वह बुदबुदाईं,वह तो सोच भी नहीं सकती थी कि अलमारी में पूरा खजाना है, उसने जल्दी-जल्दी सौ की गड्डी निकाली और अलमारी को बंद करके चाभी कौशल्या देवी को दे दिया। माया आ चुकी थी, उसे दस हजार रूपए देकर गीता अविनाश के साथ अपने घर चली गई।

दूसरे दिन सुबह गीता खुद ही अविनाश के घर पहुंच गई, उसके मन-मस्तिष्क में उथल-पुथल हो रही थी, अविनाश आफिस जा चुका था,माया भी अपने सारे काम निपटा कर चली गई, घर पर केवल कौशल्या देवी और गीता ही मौजूद थी,”बेटी जरा मुझे बाथरूम तक छोड़ दें”कौशल्या देवी गीता को पास बुलाते हुए बोली।

गीता को तो जैसे इसी बात का ही इंतजार था,वह कौशल्या देवी को बाथरूम में छोड़कर जल्दी से वापस आ गई,तकिया के नीचे से अलमारी की चाबी निकाल कर उसने पैसा ज़ेवर सब समेटकर एक बैग में रख दिए, और अलमारी को बंद करके चाभी तकिया के नीचे रख दिया,और अपने पिता शैलेन्द्र को चुपचाप फोन मिलाकर कुछ कहा,और बाथरूम की ओर बढ़ गई। कौशल्या देवी गीता की हर हरकत को चुपचाप देख रही थी।

शाम के छह बज रहे थे, अविनाश घर आ चुका था माया भी घर पहुंच कर अपने काम में लगी हुई थी,”अम्मा!अब कैसा है आपका पैर” अविनाश कौशल्या देवी के करीब बैठते हुए बोला।”अब तो बिल्कुल ठीक लग रहा है बेटा! कौशल्या देवी अविनाश का हाथ पकड़ते हुए बोली।

“अम्मा! मैं गीता को उसके घर छोड़कर आता हूं ” अविनाश गीता की ओर देखते हुए बोला। “बेटा!अलमारी में पायल का हार रखा है, उसे गीता बेटी!को छोड़ने के बाद सही कराते आना वह सही नहीं है ” कौशल्या देवी गीता की ओर देखते हुए बोली। यह सुनकर गीता के चेहरे पर घबराहट साफ़ दिखाई दे रही थी,वह चुपचाप खड़ी कौशल्या देवी की ओर देख रही थी।

कौशल्या देवी पलंग से उठकर खड़ी हो गई, तकिया के नीचे से चाभी लेकर जैसे ही उन्होंने अलमारी खोली उनके मुंह से चीख निकल पड़ी,”अरे यह क्या हुआं “वह घबराते हुए बोली।”क्या हुआ अम्मा! क्यों घबरा रही हो क्या हुआ?” अविनाश कौशल्या देवी को पकड़ते हुए बोला।”बेटा! तुम्हारा दो लाख रूपया और मेरे सारे पुश्तैनी ज़ेवर पायल का हार,सब कुछ गायब है”

कौशल्या देवी रोते हुए बोली।”क्या कह रही हो अम्मा!ऐसा कैसे हो सकता है,आपके और माया मौसी के अलावा और कौन रहता है यहा, ध्यान से देखिए होंगे यही कही” अविनाश हैरान होते हुए बोला।”नही है बेटा! मैंने देख लिया है,किसी ने चुरा लिया है हमारे पैसे व लाखों के गहने”कौशल्या देवी चीखती हुई बोली।”मौसी!अम्मा! क्या कह रही है

आप देखिए आकर” अविनाश माया को आवाज देते हुए बोला। माया चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए कमरें में आते हुए बोली।”दीदी आपके सिवा किसी और ने तो अलमारी नहीं खोली?” माया सवाल करते हुए बोली।”क्या मतलब है मौसी! अम्मा!के सिवा और कौन अलमारी खोलेगा? अविनाश हैरानी से बोला।”बेटा! मैंने गीता से अलमारी खुलवाकर माया को पैसे दिए थे,

और किसी को मैंने कभी अलमारी की चाभी नहीं दी है ” कौशल्या देवी परेशान होते हुए बोली।”मम्मी!आप क्या कहना चाहती है?” गीता मासूमियत दर्शाते हुए बोली।”बेटी मैं तुझे तो नहीं कह रही हूं, मैंने खुद ही तुझे चाभी देकर अलमारी खोलने के लिए कहा था ” कौशल्या देवी गीता की ओर शंका भरी नजरों से देखते हुए बोली।

“अम्मा! मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है “अविनाश अपना सिर पकड़ते हुए बोला।”चलिए आप मुझे घर छोड़ दीजिए मुझे देर हो गई है ” गीता अविनाश का हाथ पकड़ते हुए बोली।”गीता! थोड़ी देर रूको, अभी चलता हूं ” अविनाश गीता को समझाते हुए बोला।”काहे की जल्दी हैं बहूरिया अभी चली जाना,यहा इतनी बड़ी चोरी हो गई है और तुम्हें जाने की जल्दी हो रही है,

आखिर यह भी तुम्हारा अपना ही तो घर है” मौसी!तुम बिल्कुल सही कह रही हो,गीता! हमारे घर में लाखों की चोरी हो गई है,तुम जाने की जल्दी क्यूं कर रही हो,कुछ दिन बाद सब कुछ तुम्हारा ही तो है ” अविनाश गीता की ओर देखते हुए बोला।गीता कुछ नहीं बोली उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी,वह यहां एक पल भी रूकना नहीं चाहती थी,

“आप समझते नहीं है, मुझे शाम को पापा को दवाई देनी पड़ती है वह मेरा इंतजार कर रहे होंगे?” गीता मासूमियत दर्शाते हुए अविनाश से बोली। अविनाश कुछ नहीं बोला दो लाख रुपए और लगभग दस लाख से ज्यादा कीमती गहने गायब थे,और गीता उसे जिस तरह आज घर छोड़ने के लिए कह रही थी,ऐसा पहले कभी नहीं कहा उसने बल्कि वह तो नौ दस बजे तक उसे घर नहीं आने देती थी ना जाने आज उसे क्या हो गया था।

“अम्मा!तुम परेशान मत हो मैं पुलिस को बुलाता हूं” अविनाश मोबाइल पर पुलिस का नंबर डायल करते हुए बोला।”लल्ला हमने पहले ही पुलिस बुला लिया है वह आती होगी,शायद आ गई है” माया घर के बाहर पुलिस की गाड़ी के सायरन की तरफ सबका ध्यान केंद्रित करते हुए बोली। कुछ ही देर में अविनाश के घर में पुलिस पहुंचकर सभी लोगों से पूछताछ करने लगी।

सभी लोगों से बात करने के बाद इंस्पेक्टर गीता से पूछताछ करने लगें, उसके सवालों का जवाब देते हुए गीता गुस्से से तमतमाने लगी।”क्या आप लोग मुझ पर शक कर रहे हैं”गीता अविनाश और कौशल्या देवी की ओर देखते हुए बोली। “शक ही नहीं तुमने ही चुराए हैं हमारे गहने और रूपए, उससे भी ज्यादा बड़ा धोखा तुम मेरे बेटे को अपने प्रेम जाल में फंसाकर दें रही हो”

कौशल्या देवी गुस्साते हुए गीता को पकड़कर चीखती हुई बोली।”यह तुम क्या कह रही हो मम्मी! अविनाश सकपकाता हुआ बोला।”मैं सही कह रही हूं बेटा! इंस्पेक्टर साहब आप इसे गिरफ्तार कर लीजिए यही बताएगी कि हमारे रूपए और गहने कहा है?” कौशल्या देवी सामने खड़े सब कुछ समझ रहे पुलिस इंस्पेक्टर से बोली।”

क्या सबूत है आपके पास, अविनाश मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी?” गीता अविनाश की ओर देखते हुए बोली। यह क्या हो रहा है अविनाश को कुछ समझ में नहीं आ रहा था, क्या गीता ऐसा कर सकती हैं उसे यकीन नहीं हो रहा था,”अम्मा! तुम यह क्या कह रही हो?” सही कह रही हूं बेटा!इस लूटेरी को सबूत चाहिए,वह भी मिलेगा इंस्पेक्टर साहब को” गीता माया की ओर देखते हुए बोली।

“यह लीजिए साहब! ” माया अलमारी के ठीक सामने लगी गणेशजी की प्रतिमा में लगा एक छोटा सा कैमरा इंस्पेक्टर के हाथ में रखते हुए बोली। गीता खुद को जाल में फसता देखकर चुपचाप वहां से भागने का प्रयास करने लगी, मगर वह भाग न सकी उसे गिरफ्तार कर लिया गया। कैमरे में रिकॉर्ड रिकॉर्डिंग को देखकर अविनाश का सिर शर्म और घृणा से झुक गया, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस गीता पर वह जान छिडकता था, उसे अपनी पत्नी बनाना चाहता था,

वह अपने पिता के साथ मिलकर लोगों को अपने रूप जाल में फंसाकर लूटने वाली एक शातिर लूटेरी थी। गीता की निशानदेही पर उसके घर से सारे गहने और रूपए बरामद करके पुलिस ने गीता के पिता शैलेन्द्र को पुलिस ने गिरफतार कर लिया। “अम्मा! मुझे माफ़ कर दो” अविनाश कौशल्या देवी से लिपटकर बच्चों की तरह रोने लगा।”उठों बेटा! इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं है, जीवन साथी चुनने में कही लड़का तो कभी लड़की गलत गलत होती है,

जिससे उनका और उनका परिवार बिखर जाता है,इसलिए जीवन के फैसले रूप रंग देखकर नहीं करने चाहिए” कौशल्या देवी अविनाश को दुलारते हुए बोली।”सही कह रही हो अम्मा! तुम्हारी और मौसी की सूझ-बूझ ने इस घर के साथ-साथ मेरा पूरा जीवन बचा लिया है ” अविनाश कौशल्या और माया की तरफ़ देखते हुए अपना सिर झुकाते हुए बोला।”लल्ला मेरी और दीदी की आंखों ने उसी दिन इस लूटेरी को परख लिया था,जिस दिन तुम उसे यहां लेकर आए थे”

कहते हुए माया ने वह सारी बातें बताई कि किस तरह विकास की मदद से उन्होंने गीता के बारे में सब कुछ बताया और गीता के लिए जाल बिछाया,गीता अच्छी तरह जानती थी कि घर में सी,सी,टीवी नहीं लगा है, इसलिए उसने किस तरह गहने और रूपए अपने पिता को फोन करके यहा से गायब करा दिया, जिसे वह लोग पहले ही भांप चुकी थी, और विकास की मदद से अलमारी के सामने छोटा सा कैमरा लगवा दिया।

अविनाश यह सोच रहा था कि जीवन के फैसले लेने में मां की सहमति बहुत जरूरी है,उसकी नज़र अपने बेटे पर आने वाले हर संकट को तुरंत पहचान लेती है।”कहा खो गये बेटा! रविवार को चल रहा है ना हमारे साथ”कौशल्या देवी अविनाश को झकझोरती हुई बोली।”कहा चलना है अम्मा?” अविनाश हड़बड़ाते हुए बोला।”चलना कहा है लल्ला!दीदी ने जो बहुरिया पसंद की है तुम्हारे लिए उसे देखने चलना है” कहकर माया मुस्कुराने लगी।”क्यूं नहीं चलुंगा अम्मा!‌ कहकर अविनाश कौशल्या देवी से लिपट गया।

 

स्वरचित

माता प्रसाद दुबे

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