पाप और पुण्य मेरे चश्में से – हरेन्द्र कुमार

Post View 210 गंगुवा ने जैसे ही आलू की बोरी (थैला) को माथे से नीचे उतरा बाबूसाहेब के आंगन में , बाबूसाहब आंगन में ही खड़े थे , गरजते हुए लहजे में बोले :- केकर लइका हवस (किसके लड़के हो)। गंगुवा डरे हुए और दबूपन नजरों से बाबूसाहब को देख कर बोला :- बुधिया के … Continue reading पाप और पुण्य मेरे चश्में से – हरेन्द्र कुमार