मासूम रिश्ता – लतिका  श्रीवासत्व

बारिश की भीगी भीगी फुहार….ठंडी हवाओं की शोखियां….नीर भरे सांवरे कजरारे मेघों की मीठी आंख मिचौलियां…… उजली उजली धुली धुली सी फिज़ा…..मोहक  खुशमिजाज अलमस्त मौसम ….मन उत्साह और नई स्फूर्ति से भर गया।पहले तो मन किया आज वॉकिंग पर ना जाऊं …आराम से अदरक तुलसी की चाय और पकोड़े के साथ बरसात का आनंद लूं….. … Read more

ऊंची सोच – रीटा मक्कड़

मल्होत्रा जी अपनी बिटिया अनिता के लिए सुयोग्य रिश्ते की तलाश कर रहे थे। उनकी पढ़ी लिखी, सुंदर और हर काम मे निपुण बेटी के रिश्ते में बस एक बात से अड़चन आ रही थी। वो ये कि बचपन मे गर्म दूध पड़ने से उसकी एक बाजू जल गई थी। जख्म इतने गहरे थे कि … Read more

समय के साथ परिवर्तन –    किरण केशरे

  आज कमलाजी ओर परमजी पूना जा रहे थे बेटे के घर।उधर बहू को एक ही चिंता थी कि , मम्मीजी रोटी बनाने वाली के हाथों का खाना भी नहीं खाती और उन्हें बाहर के खानें से भी परहेज  रहता है । रत्ना और आलोक दोनों ही जॉब में थे ,इसलिए घर में सुबह से … Read more

धरोहर – भगवती सक्सेना गौड़

बुजुर्ग रमन जी अपनी पत्नी रेवा के साथ शाम की चाय बालकनी में बैठ कर पी रहै थे। अचानक कमरे से बच्चो की जोरदार हंसी सुनाई पड़ी, असल मे गर्मी की छुट्टी में बेटे बहू और बच्चे भी घर आये थे। दोनो पोते अक्षय और अभय नौंवी और दसवीं कक्षा में थे। रेवा देखने गयी, … Read more

डोंट बी परफ़ेक्ट-बी रियल – कमलेश राणा

अभि,,जल्दी उठो,,बेटा,,तुम्हें टेनिस कोर्ट जाना है सोने दो न,,माँ,,बहुत नींद आ रही है,, जल्दी आओ ,,तुम्हारे पापा इन्तज़ार कर रहे हैं,, सोना,,तुम भी उठो ,,देखो,,5 बज गए,,तुम्हारे म्यूज़िक टीचर आने वाले  हैं,, मम्मा ,,मुझे सोना है,,आज नहीं सीखना,, 7 बजे बच्चे फ्री होते हैं,,चलो जल्दी नहाकर नाश्ता कर लो,,स्कूल वैन आने वाली है 1 बजे … Read more

*रिश्ता अनजाना* – सरला मेहता

यशोधराराजे ने एक  समारोह में जब से स्वर्णिमा को देखा, उसको भुला नहीं पा रही है। हिरनी सी आँखे, सुती हुई नासिका और कमर से नीचे झूलते केश। कंचन काया किसी जेवर की भी मोहताज़ नहीं। उसके सहज सरल स्वभाव की तारीफ़ करते पति से मन की बात कह डाली, ” शौर्यवीर की जीवनसंगिनी मुझे … Read more

बेटियों के लिए सरकारी नौकरी…….?   – मंजू तिवारी,                  

   जब बेटियां स्कूल जाती है ।तभी से उनके दिमाग में यह चीज धीरे-धीरे से डाल दी जाती है। एक बार सरकारी नौकरी लग जाए तो जिंदगी के लिए रोटी है जिंदगी के सारे संघर्ष खत्म,जिंदगी बड़े आराम से कटती है ।बेटियों के लिए तो सरकारी नौकरी ही सबसे अच्छी होती है। उस पर शिक्षिका की … Read more

सुपर माम  – सुषमा यादव

,, बच्चों को शिष्टाचार, तहज़ीब और संस्कार बहुत छोटी सी अवस्था में ही सिखाया जाये,, उन्हें भले बुरे की पहचान कराई जाये,, और किसी भी चीज़ के लिए ज़िद करने की आदत को सुधारा जाए, उन्हें प्यार से, तथा मनोवैज्ञानिक तरीके से समझाया जाये,,तो बच्चे बाद में सिरदर्द नहीं बनते, उनके कारण हमें किसी के … Read more

मोहे बिटिया ही देना – बेला पुनीवाला

रामलाल का कोई बेटा नहीं था, उसको तीन बेटियाँ ही थी मगर रामलाल कभी बेटी और बेटे में फ़र्क नहीं करते थे। बेटा ना होने की बजह से रामलाल ने अपनी तीनों बेटियों की परवरिश में कोई कमी नहीं रखी थी, जितना प्यार और हक़ हम बेटों को देते है, उतना ही प्यार और हक़ … Read more

लम्हा लम्हा जिंदगी – सुधा जैन

आध्या बहुत ही परफेक्ट लड़की है .बचपन से ही उसने अपने पापा को हर कार्य में परफेक्शन लाते हुए देखा है ,अतः उसमें भी यह गुण अनायास ही आ गया… वैसे परफेक्शन होना अच्छी बात भी है …व्यवस्थित तैयार होना, घर को व्यवस्थित रखना, व्यवस्थित रूप से स्कूल जाना, अपना होमवर्क करना, किताबें बस्ता सभी … Read more

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