निस्वार्थ प्रेम  -मीनाक्षी सिंह

Post View 1,370 राधा देख तेरे बापू ही हैँ ना वो ???? राधा अपनी आँखों को धूप में मिचमिचाती हुई,, अपने हाथों को माथे पर रख दूर तक देखती रही ! अरे हाँ री रूपा ,बापू ही आ रहे हैँ ! मैं चली घर जाकर व्यवस्था देखूँ ! कितने दिनों बाद आयें हैँ बापू ! … Continue reading निस्वार्थ प्रेम  -मीनाक्षी सिंह