दिल्ली के एक कारखाने में काम करते हुए मुझे तीन बर्ष हो चुके थे अम्मा को महीने की सैलरी देने के बाद जो ओवर टाइम लगाता था उन रूपयों को मैं कारखाने के मालिक जगत शर्मा के पास जमा के तौर पर उन्हें दे देता था
एक दिन जगत शर्मा जी ने पूछ लिया नेकराम तुम अपने ओवर टाइम के रुपए मेरे पास क्यों जमा करवाते हो तब मैंने बताया साहब घर से कारखाने आने के लिए भरी बसों में चढ़ना उतरना पड़ता है
कई बार बस में जेब भी कट चुकी है स्टॉप पर वक्त पर बस नहीं मिलती बस मिल जाए तो बैठने के लिए सीट नहीं मिलती अगर सीट मिल जाए तो खुले पैसों के लिए कंडक्टर से तू तू मैं मैं हो जाती है इसलिए मैंने ठान लिया है कि जो रुपए आपके पास जमा करवाता हूं उन रूपयों से एक मोटरसाइकिल ले लूंगा फिर बस की चिक चिक से हमेशा छुटकारा मिल जाएगा
जगत शर्मा जी बोले मोटरसाइकिल खरीदने के लिए हम आज ही दुकान पर चलेंगे तीन वर्षों में तुमने जितना रुपया मेरे पास जमा किया है उनमें एक नई मोटरसाइकिल आसानी से आ जाएगी कुछ रुपए कम पड़ेंगे तो मैं मिला दूंगा,,
जगत शर्मा जी ने एक लाल रंग की मोटरसाइकिल पसंद करके पेमेंट कर दी
तब मैंने कहा साहब इस मोटरसाइकिल को मैं अभी घर नहीं ले जाऊंगा इसे आप कारखाने में ही खड़ी रहने दीजिए एक महीने बाद मां का जन्मदिन है उसी दिन मोटरसाइकिल घर ले जाऊंगा मां को मोटरसाइकिल में बिठाकर सारी मार्किट घुमाऊंगा
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शाम को कारखाने से घर लौटा तो मां ने बताया नेकराम तेरी शादी हम वही करेंगे जो लड़की वाले तुझे शादी में मोटरसाइकिल देंगे अगर लड़के को शादी में मोटरसाइकिल ना मिले तो पड़ोसी समझते हैं कि लड़का नाकारा है ,, कल ढंग के कपड़े पहन लेना लड़की वालों के घर चलना है अम्मा रसोई घर में खड़ी आलू छीलते हुए बोली
मैं फ्रीज से पानी की बोतल निकालते हुए बोला ,,लड़की वालों से क्या मोटरसाइकिल मांगना जरूरी है
हां जरूरी है रिश्तेदारों को भी तो पता चले कि हमारे बेटे नेकराम को शादी में मोटरसाइकिल मिली है अम्मा ने थोड़ा ऊंचे स्वर में कहा
खाना खाकर उस रात में छत पर आकर बैठ गया बटन वाला एक छोटा सा फोन जेब में पड़ा था कारखाने के मालिक जगत शर्मा को कॉल लगा दिया जगत शर्मा जी बोले ,, कहो नेकराम,, इतनी रात को फोन क्यों किया ,,सब ठीक तो है ,
,तब मैंने जगत शर्मा जी को बताया मैं दहेज के खिलाफ हूं मगर मां अपनी बात पर अड़ी बैठी है हमारे घर के सामने एक पड़ोसन है उसी ने ही मेरी मां को दहेज के लिए प्रेरित किया होगा एक महीने पहले उस पड़ोसन ने अपने बेटे जग्गू के लिए बाइक मांगी थी काफी लालची औरत है ,, मेरे पीठ पीछे ही हमारे घर आती है आप कोई तरकीब लगाओ लड़की वालों का पता मैं आपको मैसेज कर रहा हूं
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अगले दिन में परिवार सहित लड़की वालों के घर पहुंचा तो सोफे पर एक बूढ़ा आदमी बैठा नजर आया मैंने तुरंत पहचान लिया यह तो हमारे कारखाने के मालिक जगत शर्मा जी है लेकिन मैं चुप रहा ,, बिचौलिए ने सबका परिचय करवाया जगत शर्मा जी की तरफ इशारा करते हुए कहा यह लड़की के दूर के मामा जी हैं इनका सपना था कि यह अपनी भांजी की शादी में एक नई मोटरसाइकिल देंगे
तब अम्मा कहने लगी हम भी यही सोच कर आए थे की लड़की वालों से मोटरसाइकिल मिलेगी तो रिश्ता आगे बढ़ाया जाएगा वरना हम कोई और दूसरी लड़की ढूंढते मगर तुम लोग मोटरसाइकिल दे रहे हो तो हमारी तरफ से रिश्ता पक्का समझो
एक महीने के भीतर मेरी शादी हो गई ,, दुल्हन घर आ चुकी थी
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एक टेंपो से कुछ रिश्तेदारों ने एक लाल रंग की नई चमचमाती मोटरसाइकिल उतार कर सड़क पर खड़ी कर दी मोहल्ले के लोग दौड़े दौड़े मोटरसाइकिल देखने के लिए हमारे घर के आंगन में आ पहुंचे
चारों तरफ हल्ला मच गया नेकराम को शादी में बाइक मिली है
नेकराम को शादी में मोटरसाइकिल मिली है
रिश्तेदारों की भीड़ से दूर खड़े जगत शर्मा जी मुझे देख मुस्कुरा रहे थे और मैं उन्हें देखकर
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शादी को एक महीना हो चुका था लेकिन मेरी दुल्हन और मेरी अम्मा यही समझती रही की मोटरसाइकिल उनके दूर के मामा जी देकर चले गए हैं
एक दिन मैंने जानबूझकर पूछ लिया अपनी दुल्हन से तुम्हारे मामा जी ने शादी में तुम्हें मोटरसाइकिल दी फिर उसके बाद तुम्हारे मामा जी कभी दिखाई नहीं दिए
तब हमारी दुल्हन बोली ,, वह विदेश में रहते हैं हिन्दुस्तान कभी नहीं आते वह तो मेरी किस्मत अच्छी थी कि उन दिनों वह हिन्दुस्तान आ गए
तब मैंने हंसते हुए कहा तुम्हारे कितने मामा जी हैं,,
तब हमारी दुल्हन ने बताया मेरे बहुत सारे मामा जी हैं वह विदेश में ही रहते हैं केवल शादी के सीजन में ही हिंदुस्तान आते हैं और भांजियों की शादियों में कुछ ना कुछ कीमती उपहार देकर चले जाते हैं
मैं अपनी दुल्हन की बात सुनकर हक्का-बक्का रह गया
फिर मुस्कुराते हुए मैंने अपनी दुल्हन से कहा ऐसे मामा जी भगवान सबको दे..।
शादी का दूसरा महीना शुरू ही हुआ था दुल्हन ने मुझसे पूछा तुम महीने की सैलरी ही लाए हो फिर ओवर टाइम के पैसे कहां खर्च कर दिए तब में चुप रहा तो दुल्हन ने दो जोड़ी कपड़े बैग में रखते हुए कहा, मैं इस घर में नहीं रह सकती
मुझे एक-एक पैसे का हिसाब चाहिए आजकल के मर्द बाहर पराई स्त्रियों पर पैसा लुटाते हैं तुम्हारी चुप्पी बता रही हैं तुमने मुझे धोखा दिया है मैं इस घर में एक पल नहीं ठहरूंगी
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उस दिन मेरी दुल्हन मुझे छोड़कर अपने मायके जाकर बैठ गई
दो दिन बाद मायके से मेरे सास ससुर कुछ लोगों को साथ लेकर आए साथ में एक टेम्पो भी लाए मोटरसाइकिल टेम्पो में लदवाते हुए बोले जहां हमारी बेटी रहेगी मोटरसाइकिल भी वही रहेगी
,,तभी गुस्से में
पिताजी ने एक लकड़ी का मोटा डंडा हाथ में ले लिया मुझे धमकाते हुए कहा,, देख नेकराम ओवरटाइम के पैसे तेरे कहा जाते अब तू बच्चा नहीं रहा तेरी शादी हो चुकी है
उस दिन सारा घर मेरे खिलाफ था सबने मुझे जली कटी सुनाई बुरा भला कहा मैं मन ही मन रोता रहा ,,
तब पिताजी बोले इस घर की बहू को कहीं जाने की जरूरत नहीं है अगर घर छोड़ कर जाना है तो नेकराम जाएगा,,
पता नहीं कैसे अचानक हमारे कारखाने के जगत शर्मा जी आ पहुंचे ,,
हमारी सासू मां ने जगत शर्मा जी को प्रणाम किया और उनसे कहा शादी के दिन आपने अपना मोबाइल नंबर हमें देते हुए कहा था कभी कोई परेशानी हो तो निसंकोच फोन करके बुला लेना मैं हाज़िर हो जाऊंगा,, टेम्पो में हमने मोटरसाइकिल रखवा ली है नेकराम एक बिगड़ा हुआ लड़का है बाकी बातें हमनें तुम्हें फोन में बता दी थी …..
तब जगत शर्मा जी बोले नेकराम तीन सालों से मेरे कारखाने में
काम कर रहा है ओवरटाइम का पैसा मेरे पास जमा करवाता रहा यह कहकर की मुझे अपनी मेहनत के पैसों कि एक मोटरसाइकिल खरीदनी है
फिर नेकराम ने एक मोटरसाइकिल लाल रंग की खरीद ली थी
और उसी मोटरसाइकिल को मेरे हाथों शादी वाले दिन लड़की वालों को देने के लिए कहा आप लोगों ने समझा मोटरसाइकिल मैंने जगत शर्मा जी ने दी है,
यह मोटरसाइकिल जो आप लोगों ने टेंपो में रखवाई है यह नेकराम के खुद की मेहनत की खरीदी हुई मोटरसाइकिल है
अभी तीन महीने की किस्त और बाकी है
नेकराम कड़ी मेहनत करके उन किस्तों को भी चुका देना चाहता था
लेकिन आप लोग तो नेकराम के पीछे ही पड़ गए उसका
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एक-एक पैसे का हिसाब – किताब पूछने के लिए
दिया लेकर भी ढूंढोगे तब भी यह हीरे जैसा बेटा आप लोगों को कहीं नहीं मिलेगा दुल्हन के तो भाग खुल गए जिसे ऐसा दूल्हा मिला जो दहेज के खिलाफ है ,,
उस दिन जगत शर्मा जी ने
उस भेद को बता दिया जो मैं हमेशा हमेशा के लिए छुपा देना चाहता था
मैं नहीं चाहता था की सच्चाई सामने आए और मेरी दुल्हन को पता चले यह नेकराम की मोटरसाइकिल है
लेखक नेकराम सिक्योरिटी गार्ड
डॉ मुख़र्जी नगर दिल्ली
स्वरचित रचना अप्रकाशित