” नए जीवन की आस ” – अनिता गुप्ता

ठंडी हवाएं चल रहीं थीं पर बारिश थम चुकी थी। खिड़की के पास विचारों में मग्न बैठी शालिनी को ठंडी हवा का झोंका बार – बार छू कर जा रहा था। मानो कह रहा हो,

” उठो शालिनी और जी लो जिंदगी जी भर कर । जिस तरह से इस तूफानी बारिश के बाद सब कुछ शांत और खुशनुमा हो गया है वैसे ही अपनी जिंदगी के चक्रवातों को खत्म कर दो और अपनी जिंदगी को खुशियों से भर दो। तुम्हें जो जिंदगी ने मौका दिया है उसे बेकार ना जाने दो। क्योंकि मौके बार – बार नहीं मिलते हैं।”

पैंतालिस साल की अविवाहित शालिनी कॉलेज में लैक्चरर के पद पर कार्यरत थी। परिवार के नाम पर वो अकेली ही थी। मां – पापा का चार साल पहले देहांत हो चुका था। एक छोटा भाई और भाभी थे, जो दूसरे शहर में नौकरी करते थे। जिनसे तीज – त्यौहार पर मिलना होता था।

शालिनी के सोलह साल के होने पर भी जब उसे पीरियडस नहीं आए तो डॉक्टर से कंसल्ट किया गया। डॉक्टर ने सोनोग्राफी करवाई, जिसमें पाया गया कि शालिनी के गर्भाशय ही नहीं है। चार – पांच हजार में से एक के साथ ऐसा होता है और उन एक में शालिनी शामिल थी।

यह जानकर शालिनी ने अपना सारा ध्यान अपनी पढ़ाई और कैरियर में लगा लिया। क्योंकि वह जानती थी कि गर्भाशय नहीं होने की स्थिति में उसकी शादी होना लगभग नामुमकिन है। जिस कारण उसके मां – पापा उसके भविष्य को लेकर हमेशा चिंतित रहेंगे।

समय के साथ शालिनी एक – एक सीढ़ी आगे बढ़ती गई और इधर उसके मां – पापा उसकी शादी के लिए कोशिश करते रहे। हालांकि वे जानते थे कि ये  बहुत मुश्किल है। क्योंकि कोई भी ऐसी लड़की को अपनी बहु नहीं बनाना चाहेगा, जो बच्चे को जन्म ना दे सके। उस समय यूटरस ट्रांसप्लांट भी नहीं होते थे

इस कहानी को भी पढ़ें: 

बंद मुट्ठी के रिश्ते – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi




पढ़ाई पूरी कर शालिनी ने पीएससी के एग्जाम्स और इंटरव्यू क्लियर कर गवर्मेंट कॉलेज में लैक्चरर हो गई। उसी कॉलेज में अभी दो साल पहले  ट्रांसफर होकर आए अरविंद ने ज्वाइन किया।

अरविंद लिखने – पढ़ने में व्यस्त रहने वाला 42 साल का सुदर्शन अविवाहित युवक था। उसका अधिकतर समय अपने पेपर राइटिंग और रिसर्च में बीतता, इसलिए उसे कभी शादी करने का ध्यान ही नहीं आया।

लेकिन जब से शालिनी को देखा था , वह उसके प्रति कुछ खिंचाव सा महसूस कर रहा था। दोनों का एक ही  विषय केमिस्ट्री था। इसलिए अरविंद शालिनी को भी रिसर्च पेपर लिखने के लिए प्रोत्साहित करता और उसकी मदद भी करता। इस तरह से दोनों का काफी समय भी साथ में निकलने लगा और एक दिन अरविंद ने शालिनी को शादी के लिए प्रपोज कर दिया।

” अरविंद ! तुमको पता है ना , मैं कभी मां नहीं बन सकती, फिर भी तुम मुझ से शादी करना चाहते हो ?” शालिनी ने पूछा।



” हां ! मां नहीं बन सकती तो क्या हुआ ? हम बच्चा गोद भी तो ले सकते हैं। आजकल तो फर्टिलिटी सेंटर भी हैं।” अरविंद ने कहा।

” नहीं ! तुम भावावेश में आकर ये निर्णय ले रहे हो। जब हकीकत से सामना होगा , तब तुमको अपने निर्णय पर पछतावा होगा और आंटी – अंकल की भी तो ख्वाहिशें हाेगी।” शालिनी ने कहा।

” मैं ने बहुत सोच लिया है। मुझे कोई पछतावा नहीं होगा। रही बात मम्मी – पापा की उन्होंने तो मेरी शादी की उम्मीद ही छोड़ दी है। मेरा शादी करने का फैसला ही उनके लिए बहुत बड़ी खुशी है। मैं तुम पर कोई दवाब नहीं बना रहा हूं। तुम अच्छे से सोच कर ही फ़ैसला लेना। मैं तुमको दो दिन का समय देता हूं। दो दिन बाद मैं तुम्हारे फोन का इंतजार करूंगा। अगर तुमने फोन किया तो मैं समझूंगा तुम्हारी तरफ से भी हां है और तुम्हारा जवाब ना में हो तो फोन नहीं करना। क्योंकि मैं ना नहीं सुनना चाहता हूं।” अरविंद ने कहा।

आज दो दिन पूरे हो रहे थे। सुबह से ही बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी और अंदर शालिनी के मन में विचारों का मंथन चल रहा था।

इस कहानी को भी पढ़ें: 

छोटी बहू – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

कभी उसका मन हां करने का होता तो कभी सोचती कि अपनी खुशी के लिए कैसे उससे शादी कर लूं। जबकि मैं जानती हूं कि मैं कभी मां नहीं बन सकती हूं और अपने बच्चे की ख्वाहिश तो हर किसी को होती है। ऊपर से वह मुझ से उम्र में भी छोटा है।

इन्हीं विचारों में खोई हुई शालिनी को ठंडी हवा के झोंको ने एक सकुन सा पहुंचाया और उसने मुस्कराते हुए अरविंद की फोन लगा दिया।

” हेलो ! अरविंद ।  बहुत ही खुशगवार मौसम हो रहा है। तुम जल्दी से गरमा गर्म कचौरी ले कर आ जाओ, जब तक मैं चाय बनाती हूं। दोनों मानसून की पहली बारिश का साथ में आनंद लेंगे।” और शालिनी गुनगुनाते हुए रसोई की तरफ चल दी।

अनिता गुप्ता

#उम्मीद

Leave a Comment

error: Content is Copyright protected !!