नागिनी के कांटे – पूनम भटनागर : Moral Stories in Hindi

Post View 12,008 आज फिर आफिस से निकलने में लेट हो गया, अभी सब्जी भी खरीदनी है नहीं ‌तो रात क्या कल आफिस में क्या बना कर ले जाऊंगी। रेहू के दिमाग में आफिस से निकलते समय यही चल रहा था।  तभी सड़क पर वह ‌किसी से टकराते टकराते बची। सोरी, मैं —जब रेहू ने … Continue reading नागिनी के कांटे – पूनम भटनागर : Moral Stories in Hindi