नफरत की दीवार – विधि जैन : Moral Stories in Hindi

सुनील और अनिल दो भाई दोनों की बहुत ही बनती थी दोनों एक दूसरे के बिना नहीं रहते थे खाना भी साथ में खाना और कहीं पर काम में जाना तो एक साथ जाना छोटे-छोटे बिजनेस करते थे कभी सुई धागा का बिजनेस तो कभी ब्रश बनाने का बिजनेस कभी बालों में लगाने वाले बैंड का बिजनेस इस तरह से वह रोजमर्रा के छोटे-छोटे सामान तैयार करके …थोक की दुकान में देकर आते थे ..दोनों भाई साथ में हर एक काम करते थे …संयुक्त परिवार में रहने वाले समता और ममता दोनों देवरानी जेठानी बहनों की तरह रहती थी ।

जाने इस परिवार को किसकी नजर लग गई और देखते ही देखते परिवार कई टुकड़ों में विभाजित हो गया।

 फिर भी सुनील और अनिल अपना काम धंधा जैसे करते आ रहे थे वैसे ही कर रहे थे ।

सुनील की दो बेटे और अनिल की दो बेटियां सुनील की दोनों बेटे इस काम से बिल्कुल खुश नहीं रहते थे।

 उनका पढ़ाई में बिल्कुल भी मन नहीं लगता था धीरे-धीरे बच्चे बड़े हो गए ।

और घर में पैसों की किल्लत होने लगी हर एक को अपनी मर्जी का सामान लाना है।

उस के लिए पैसा चाहिए पड़ता था अनिल की दोनों बेटियां समझदार थी।

 एक वक्त तो ऐसा आया कि घर में खाने के लाले पड़ने लगे सुनील के बड़े बेटे की शादी का समय आ गया।

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 और घर में एक नई बहू का आगमन हुआ पढ़ी-लिखी बहू नौकरी पेशा वाली बहू घर का जब माहौल देखा… तो उसे लगने लगा कि अब यह सब लोग मेरे पैसों पर अपना हक जमाएंगे …तुरंत ही उसने अपने पति सोमेश से कहा -अब मैं इस घर में नहीं रह पाऊंगी ।

मैं अपना पैसा किसी के साथ नहीं बांट सकती।

 और यह बात सुनील के कानों तक पड़ गई और उसने कहा कि तुम दोनों अलग रह सकते हो… सुनील की पत्नी समता ने कहा कि मैं भी इस घर में क्यों रहूं?

 जब मेरी बहू बेटे दूसरे घर में रहेंगे इस तरह से सुनील का परिवार अलग घर में जाकर रहने लगा ।

वहीं पर अनिल की दोनों बेटियां बहुत समझदार और पढ़ने में भी बहुत होशियार थी कहू और पीहू दोनों ने अपनी मेहनत से कॉम्पिटेटिव एक्जाम निकाल लिया।

 और अच्छे पद पर नौकरी करने लगी… अनिल के पास धीरे-धीरे बहुत पैसा आ गया वहीं पर सुनील के दोनों बेटे नौकरी भी नहीं करते थे।

 और बहू की कमाई पर ऐसो आराम करते थे धीरे-धीरे अनिल ने एक अच्छा फ्लैट खरीद लिया।

 और वहां पर जाकर रहने लगे वहीं दूसरी और सुनील किराए के कमरे में ही अपना जीवन व्यतीत करने लगा।

 सुनील और अनिल के बीच नफरत की दीवार ऐसी खङी हो गई कि जैसे अमीर और गरीब के बीच एक दीवार बन जाती है ।

सुनील अपनी गरीबी पर दुखी होकर दिनभर पलंग पर लेटा रहता जिसके कारण वह बहुत बीमार रहने लगा।

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 और एक दिन ऐसा आया कि उसे हार्ट अटैक आ गया यहां पर अब सिर्फ बहू के पास पैसा था।

 और उसकी अकड़ थी कि मैं ही खर्च क्यों करूं अनिल को यह बात पता चली …कि उसके बड़े भाई को अटैक आया तुरंत वह अस्पताल पहुंच गया।

 और सारी कार्रवाई की और अपने भाई की जान बचा ली ।

जब सुनील को यह बात पता चली कि मेरी जान अनिल ने बचाई है तो उसने प्रण किया कि अब मैं अपने भाई को कभी भी अकेले नहीं छोडूंगा हम दोनों भाई एक दूसरे के हमेशा काम आते रहेंगे आज यदि मेरा छोटा भाई मेरी जान नहीं बचता तो शायद मैं यह दुनिया फिर से नहीं देख पाता और उसने अनिल से तुरंत बात की हम हमेशा एक दूसरे के साथ रहेंगे और कोई भी मुसीबत आएगी हम एक दूसरे के लिए खड़े रहेंगे

दोनों भाइयों के बीच बनी हुई नफरत की दीवार तोड़कर अनिल और सुनील फिर से एक हो गए।

 और उन्होंने एक दूसरे से वादा किया कि हमारे घर में कुछ भी होता रहेगा ।

लेकिन हम जैसे पहले रहते थे अब वैसे ही हम दोनों भाई रहेंगे.. हमें बच्चों और बीवी की बात नहीं माननी है ।

हमें अपना रिश्ता याद रखना है आज अनिल ने सुनील की जान बचाकर दोनों भाइयों ने अपनी एक मिशाल खड़ी कर दी।

 इसी तरह हमें जीवन में कभी किसी से नफरत नहीं करनी चाहिए और हमारे भाई बहनों से तो कभी नफरत नहीं करनी चाहिए चाहे कोई भी हमें कितना भी भड़काए।

विधि जैन

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