मदद – सिम्मी नाथ : Moral Stories in Hindi
Post View 57 तू बिल्कुल नहीं समझता अक्लू , इतना रात तक कहां भटक रहा था ? आप काहे नहीं सोए बाबूजी मैं थोड़ा काम से गया था । मैं सोने ही वाला था ,कि तुम्हारी दादी खाँसने लगी ,उसे ही पानी देने गया ,तो तू नदारद था। तेरा लंगोटिया रघु के साथ घूमता … Continue reading मदद – सिम्मी नाथ : Moral Stories in Hindi
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