Post View 1,040 अनिता मूँदीं आँखों से अस्पताल के बिस्तर पर लेटी-लेटी अपनी जिन्दगी का लेखा-जोखा लगा रही थी।उसकी आँखों के कोर से आँसू बह रहे थे।उसी समय हरी मखमली घास -सी डाॅक्टर बेटी नीरा की शीतल छुअन उसके तन-मन को शीतल कर गई। पश्चाताप उसकी आँखों से आँसू बनकर बह रहा था।उन आँसुओं ने … Continue reading माफी (कहानी) – डाॅ संजु झा
Copy and paste this URL into your WordPress site to embed
Copy and paste this code into your site to embed