रोहिणी यहां बाहर क्यों बैठी हो? अंदर चलो बहुत रात हो गई है, इधर बॉलकोनी में बैठे-बैठे रात गुजार दोगी क्या? कमला जी ने अपनी बेटी को उलाहना देते हुए उसका हाथ पकड़ा और अंदर कमरे में ले आई।
रोहिणी मां का स्पर्श पाते ही पिघल गई और उनके सीने से लग गई, बस मां यूं ही मन किया और बताओं, घर में सब कुछ ठीक है, आपकी तबीयत ठीक है,आप बहुत कमजोर लग रही हो।
हां, सब ठीक है, तेरा भाई, तेरे पापा और मै हम सब अच्छे हैं, बस मनोज नौकरी की जगह अब अपना व्यापार करने की सोच रहा है, पर मुझे तू ठीक नहीं लग रही है, जब से आई है, अकेले ही बैठे रहती है, आखिर कोई परेशानी हो तो बता दें, मै कुछ हल निकाल सकूं, शादी के पहले तो मुझे हर बात बताती थी, और अब शादी के बाद कुछ नहीं बताती, मन ही मन में रखती है, कमला जी ने कहा तो रोहिणी आंखें चुराने लगी।
‘कुछ नहीं मां, छोटी सी बात है भी और नहीं भी, समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करूं? इस विषय पर कुछ बोलूं या नहीं बोलूं, वैसे भी मेरी तो कोई राय मायने ही नहीं रखती है, सब कुछ तो सासू मां के हिसाब से ही होता है, आखिर उनका घर है, मै तो वहां पर बस रह रही हूं, रोहिणी ने मन मसोसकर कहा।
कमला जी उसकी बातें सुनकर हैरान रह गई, “आखिर ऐसा भी क्या हो गया? तेरी सास तो बहुत अच्छी है, वो तेरा कितना ख्याल रखती थी, तू ही कहा करती थी, अब ऐसा भी क्या हो गया है?’
मां, मम्मी जी मेरे और इनके बीच नफरत की दीवार खड़ी कर रही है, वो हमेशा मुझे रोहित के सामने डांटती रहती है, मेरे काम में गलतियां निकालती रहती है, मेरे बनाये खाने में मीन-मेख निकालती रहती है, मै कुछ भी घर के लिए अच्छा करना चाहुं तो मुझे कुछ करने का हक ही नहीं है, दो साल हो गए हमारी शादी को, अभी तक बच्चा नहीं हुआ तो उसके लिए भी तानें देती है, सारी कमियां मेरे अंदर ही है, बस इसी बात को मुद्दा बना रखा है और वो ऐसा दृश्य बनाती है कि धीरे-धीरे रोहित भी मुझसे दूर हो रहे हैं, पता नहीं किस घड़ी तलाक के कागज मुझे मिल जाएं, ये कहकर रोहिणी सुबकने लगी।
ओहहह!! पर रोहित जी तो पढ़े-लिखे और समझदार है, फिर वो ऐसे कैसे बिना कुछ सोचे-समझे इस तरह का व्यवहार कर सकते हैं, फिर तेरी और रोहित जी की तो लव मैरिज हुई थी, फिर भी उन्होंने तुझे जानना और समझना जरूरी नहीं समझा, कमला जी ने सवाल किया।
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पता नहीं मां, मेरे जीवन में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है, रोहित और मै एक छत के नीचे रहते हैं, लेकिन अजनबियों की तरह ही रहते हैं। रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों का मम्मी जी इतना बढ़ा देती है कि रोहित को भी लगता है कि मै ही गलत हूं, वो मेरी और रोहित की शादी से वैसे भी बहुत नाराज थी, अब अपने अधुरे सपने को पूरा करना चाहती है, रोहित की शादी अपनी सहेली की बेटी से कराना चाहती है, जो बहुत अमीर है और इकलौती भी, आगे-पीछे सारी जायदाद रोहित को मिल जायेगी, और हमारे पास कुछ ज्यादा भी नहीं है, अभी तो मनोज बेरोजगार है, भाई का जीवन भी तो बसने में समय लगेगा, फिर हमारे पास कोई बहुत लंबी-चौड़ी जायदाद भी नहीं है।
अभी थोड़े दिनों पहले की बात है, रोहित ने अलमारी में एक लाख रुपए रखे थे, मैंने भी अच्छे से संभाल कर रख दिये थे, अगली सुबह रोहित सुबह की सैर पर गये और मै नहाने गई थी, जब रोहित ने आकर रूपये वापस मांगे तो अलमारी में रूपये नहीं थे, इनके मन में मेरे लिए नफरत के बीज तो कभी के बो दिये थे।
रोहित को लगा कि ये पैसे मैंने चुराए है, और अपने भाई मनोज को नये व्यापार के लिए दे दिए हैं, जबकि मैंने दोबारा पैसों को हाथ भी नहीं लगाया, बस इसीलिए मम्मी जी और रोहित ने मुझे घर से निकाल दिया है, मै निर्दोष थी, पर मम्मी जी ने मुझे दोषी साबित कर दिया और रोहित को भी यही लगता है, रोहित मुझसे नफरत करते हैं और मै रोहित से, उन्होंने अपने पहले प्यार अपनी पत्नी पर विश्वास नहीं किया।
दोनों के बीच एक नफरत की दीवार आ गई है, हम अब सामान्य पति-पत्नी की तरह जीवन नहीं जी सकते हैं।
रोहिणी की बात सुनकर कमला जी के पैरों से जमीन सरक गई।
एक ही बेटी है रोहिणी, उसकी शादी उसकी पसंद से धूमधाम से की थी, बजट से भी बाहर जाकर उसकी खुशी के लिए सब कुछ किया, और वही बेटी वापस मायके आ गई, अब उसका क्या भविष्य होगा? रोहिणी के पास कोई डिग्री भी नहीं है, जिसके बल पर वो आत्मस्वाभिमान से अपना जीवन जी सकें और अभी तो रोहिणी की उम्र ही क्या है? इतना लंबा जीवन अकेले जीना संभव ही नहीं है, स्त्री-पुरुष दोनों को एक-दूसरे का सहारा, साथ तो चाहिए।
वो रोहिणी को दिलासा देकर कमरे से बाहर आ गई, अपने पति भावेश जी के कंधों पर सिर रखकर रोने लगी, मन तो भावेश जी का भी भारी हो रहा था, पत्नी और बेटी की हालत उनसे छुपी हुई नहीं थी, वो मन ही मन सोच रहे थे कि आखिर ऐसा क्या किया जाएं, जिससे बेटी भी निर्दोष साबित हो जाएं, बेटी का घर भी बस जाएं और दो दिलों के बीच नफरत की दीवार हमेशा के लिए गिर जाएं।
भावेश जी रात भर सोचते रहें, अच्छे से सो नहीं पाएं, सवेरे वो मोबाइल में से कुछ नंबर ढूंढने लगे, उनके साथ उनका मित्र पढ़ा था। उसकी बड़ी बेटी पुलिस में थी, जिसकी शादी इसी शहर में हुई थी, उन्होंने अपने मित्र को सारी बातें बताकर उससे मदद मांगी।
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उनके मित्र ने अपनी बेटी का नंबर दे दिया, रोहिणी ने सारी बातें तसल्ली से बताई। पुलिस ऑफिसर चेतना अगली सुबह ही रोहित के घर पहुंच गई और सारी पूछताछ की, रोहित की मां से कड़ी पूछताछ की गई और वो थोड़ी देर में पिघल गई।
मुझे माफ कर दो वो पैसे मैंने लिए थे, ताकि मै रोहिणी को इसी बहाने से घर से निकाल सकूं और रोहित की दूसरी शादी करवा सकूं, मैंने अलमारी की दूसरी चाबी बनवा रखी थी, अपनी मां के मुंह से ये बयान सुनते ही रोहित भी हैरान रह गया।
मैंने ही रोहिणी पर गलत इल्जाम लगाया, क्यों कि रोहिणी दहेज में कुछ नहीं लाई थी, मेरे बेटे ने मेरी मर्जी के खिलाफ शादी करके मेरे अरमानों पर पानी फेर दिया था, और रोहिणी बिल्कुल ठीक है, मै ही उसके खाने और कभी-कभी पीने में पिल्स मिला देती थी, ताकि उसे बच्चा ना हो और वो रोहित की जिन्दगी से दूर चली जाएं, रोहित अपनी मां के मुंह से ये सब सुनकर आश्चर्य करने लगा।
रोहिणी के माता-पिता और खुद रोहिणी भी हैरान थी, वो जिस रोहित से नफरत करने लगी थी, उसमें उसकी कोई गलती नहीं थी, ये सारा खेल रोहित की मां का रचाया हुआ था।
मां, आपने मुझे पाला और बड़ा किया, मै जीवन भर आपका कर्जदार रहूंगा, लेकिन मेरी पत्नी के प्रति भी मेरे फर्ज है, आपकी सजा यही है कि मैं अब आपके साथ नहीं रहूंगा, मै रोहिणी के साथ अलग फ्लैट में रहूंगा, कुछ समय बाद आपको पछतावा होगा कि आखिर आपने किस तरह अपने ही बेटे की खुशियों में आग लगा दी, रोहिणी और मै गलत नहीं थे, आपने हम दोनों के बीच नफरत की दीवार खड़ी कर दी थी।
जिससे हमारी गृहस्थी बसने से पहले ही उजड़ गई।
रोहिणी के माता-पिता को संतुष्टि मिली, उनकी बेटी का घर टूटने से बच गया और उन्होंने अपने मित्र की पुलिस ऑफिसर बेटी चेतना को भी धन्यवाद दिया, जिसने डंडे के जोर पर तुरंत सच को बाहर उजागर करके रोहिणी की शादीशुदा जिंदगी बचा ली।
रोहित और रोहिणी के बीच नफरत की दीवार गिर गई, दोनों ने अलग घर ले लिया और उसमें रहने लगे, कुछ महीनों बाद उनके घर प्यारे से बच्चे ने जन्म लिया, इससे उनका रिश्ता और भी मजबूत बन गया।
धन्यवाद
लेखिका
अर्चना खंडेलवाल
मौलिक अप्रकाशित रचना
#नफरत की दीवार