इंस्पेक्टर विनोद कुशवाहा और कुमार सर, अनुराधा के साथ ही कमिश्नर साहेब के निर्देशानुसार उनके गाज़ियाबाद में बने अस्थाई कमिश्नर ऑफिस में ही आ गए थे, दरअसल कमिश्नर साहेब का हेड क्वार्टर तो मेरठ में था, परंतु केंद्र सरकार के द्वारा निर्देशित अति गोपनीय ऑपरेशन के क्रियान्वयन के लिए उन्होंने अस्थाई तौर पर एक कार्यालय गाजियाबाद में ही बनवा लिया था, जो कि कलेक्टर ऑफिस के पास ही था,
कमिश्नर साहेब ने भ्रष्टाचार निरोधक दस्ते की स्पेशल टीम को बुलाकर उनसे विशेष स्याही लगे 94 हज़ार रुपए कलेक्टर ए कुमार को देते हुए कहा कि इसे लिफाफे से बाहर मत निकालना, सारे नोट विशेष स्याही लगे है, और इन सभी नोटों के नंबर भी इस एंटी-करप्शन ब्यूरो की टीम के पास लिखे हुए है, तुम आज शाम को ही यह रुपए उस ठेकेदार को से देना और उससे सीमेंट कहां से उठाना है इसकी बात कर लेना।
शाम को इंस्पेक्टर विनोद कुशवाहा किसी परिचित की मोटर साइकिल लेकर गांव के लोगों की तरह धोती कुर्ता पहनकर नकली मूंछ लगा कर कुमार सर के साथ बाकी के रुपए लेकर उस ठेकेदार के पास चल दिया। उनके पीछे पीछे हवलदार भी सिविल ड्रेस में अपनी अपनी व्यक्तिगत मोटर साइकिल में कुछ अंतराल से चल रहे थे। उस अंडर कंस्ट्रक्शन ब्रिज से कुछ पहले इंस्पेक्टर विनोद कुशवाहा ने पीछे आ रहे चारों हवलदारों को पास आने पर, आगे कि योजना समझाई, उन चारों हवलदारों के मोबाइल नंबर
कुमार सर ने नोट कर लिए थे । इसके बाद कुमार सर ने नोटों से भरा लिफाफा ठेकेदार को देते हुए कहा, लो भाई बाकी के 94 हज़ार रुपए भी ले आया हूँ, गिन कर अपनी संतुष्टि कर लो, ठेकेदार ने लिफाफा बिना खोल ही जेब में डाल लिया और शंकित नज़र से इंस्पेक्टर विनोद की और इशारा करके पूछा कि ये भाई साहेब कौन हैं, तो कुमार ने इंस्पेक्टर विनोद का परिचय अपने गांव के ही युवक के रूप में कराया और कहा कि इतनी बड़ी रकम लेकर आने में डर लगता है, इसलिए अपने साथ इस व्यक्ति को भी ले आया हूं,
अब ठेकेदार ने आश्वस्त होकर नोट गिने, फिर पास में ही स्थित एक पीसीओ से कहीं पर फ़ोन करके वापस आकर कुमार से कहा कि वह कल तड़के ही उनकी एक दूसरी कंस्ट्रक्शन साइट पर ट्रक लेकर पहुंच जाएं उसे माल वहीं मिल जाएगा, अपने साथ सामान लोड करने के लिए लेबर भी लेकर आना है।
कुमार ने खुश होकर कहा कि ठीक है अब मुझे पैसों की पावती तो से दो, इस पर ठेकेदार ने कहा कि आपको कच्चा बिल ही मिलेगा और वह भी तब जब आप सीमेंट लेने को आओगे ।
अब तक तो सबकुछ कलेक्टर ए.कुमार कि योजनानुसार ही हो रहा था, फिर भी उन्होंने डरने का अभिनय करते हुए उस ठेकेदार से कहा भाई सब कुछ ठीक-ठाक तो हो जाएगा न, मुझे सही वक़्त पर माल तो मिल जायेगा न, कोई पुलिस का लफड़ा नहीं चाहिए मुझे।
ठेकेदार ने उसे मुस्कुराकर कहा तू पहली बार हमसे माल ले रहा है, इसलिए इतना डर रहा है, हमारा धंधा तो सिर्फ ज़ुबान पर ही चलता है, और पुलिस से डरने कि कोई बात नहीं है हमारा सेठ तो बाप है पुलिस का, अगर गलती से कुछ हो भी गया तो 24 घंटे में तुमको छुड़वा लेंगे।
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ए कुमार ने उसकी बात पर इस तरह
हामी भरी मानो वह आश्वस्त हो गया हो, उसने ठेकेदार की बताई साइट पर ठीक 4 बजे सुबह पांच ट्रक और अपनी लेबर के साथ पहुंचने का समय ठेकेदार से सुनिश्चित किया, ठेकेदार ने भी कहा कि तुम्हारी 2500 बोरी सीमेंट और इसका कच्चा बिल भी तुम्हें उसी वक्त मिल जाएगा।
कुमार सर ठेकेदार से विदा लेकर इंस्पेक्टर विनोद कुशवाहा के साथ उस साइट से आगे बढ़े, उसके तुरंत बाद ही इंस्पेक्टर विनोद कुशवाहा ने दो हवलदार को अपनी अपनी बाइक उस कंस्ट्रक्शन साइट के और नज़दीक जाकर पेड़ के पीछे छुपकर उस ठेकेदार पर नजर रखने को लगा दिया, और बाकी के दोनों हवलदार उस सड़क के दोनों छोर पर अपनी अपनी मोटर साइकिल बैठ कर जाने वाले थे।
कुमार सर ने उन्हें कहा कि हम लोग पुलिस हेड क्वार्टर जा रहे है, तुम लोग अपनी अपनी मोटरसाइकिल से इस ठेकेदार पर सुबह 4 बजे तक नज़र रखना वह जिस भी जगह जाए, हमें तुरंत सूचित करते रहना, और उसके घर वापस आने तक एक हवलदार उसके पीछे लगा ही रहेगा, इसके अलावा यह ठेकेदार जिस भी घर में जाएगा दूसरा हवलदार उस घर के पास तब तक रुकेगा जब तक कि कोई दूसरा उस घर से बाहर नहीं निकलता, और उसका भी पीछा करने के लिए एक हवलदार लगा देना। इस तरह से चैन की कड़ी की तरह कार्य करते हुए हमें अपने अपने मोबाइल फोन से अपडेट करते रहना। इस कंपनी के मालिक रीतेश ठाकुर के घर के पास उनसे उचित दूरी बनाएं रखना, किसी भी हाल में उनको शक नहीं होना चाहिए।
इसके बाद कलेक्टर ए कुमार और इंस्पेक्टर विनोद कुशवाहा पुलिस हेड्वार्टर चले गए, इंस्पेक्टर कुशवाहा ने दो दो हवलदार सिविल ड्रेस में ही अपनी प्राइवेट मोटर साइकिल के साथ में उस कंस्ट्रक्शन कम्पनी के मालिक रीतेश ठाकुर और मंत्री जी के घर के पास भी लगा दिए थे, सभी हवलदार एक दूसरे से एवम् इंस्पेक्टर कुशवाहा से मोबाइल से कनेक्टेड थे,वो सभी हवलदार सभी इंस्पेक्टर विनोद कुशवाहा के विश्वासपात्र थे और इस तरह की मुखबिरी में माहिर थे।
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पुलिस हेडक्वार्टर पहुंचते ही इंस्पेक्टर विनोद कुशवाहा और कुमार सर ने पाया कि वहां पर एंटी करप्शन ब्यूरो कि बड़ी टीम चार गाड़ियों में पहले से ही आ चुकी थी।
कलेक्टर ए कुमार ने सभी हवलदारों के मोबाइल नंबर लेकर उनकी ट्रेकिंग के लिए एक कंप्यूटर पर डाल दिया इससे उन सभी हवलदार की लोकेशन का पता पुलिस हेडक्वार्टर में पता चल रहा था हालांकि यह बात वे हवलदार नहीं जानते थे। इसके अलावा मंत्रीजी और रीतेश ठाकुर के घर के सारे फ़ोन भी पुलिस टीम टेप कर रही थी।
लगभग दो घंटे बाद ठेकेदार का पीछा करते हुए हवलदार उस कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक के घर पहुंचे, कुछ समय बाद रीतेश ठाकुर जो उस कंपनी का मालिक था ने मंत्री जी को फ़ोन करके कहा कि वह उनके लिए “मिठाई” लेकर आ रहा है, मंत्री जी खुश होकर बोले ठीक है जल्दी आओ
एक हवलदार उस कंस्ट्रक्शन कम्पनी के मालिक के घर के पास रुका और दूसरा वापस उस ठेकेदार का पीछा करने लगा। ठेकेदार वहां से सीधा अपने घर जाकर सो गया। दोनों ही हवलदार ने पूरी जानकारी पुलिस हेड्वार्टर में दी। दूसरे हवलदार जो कि कंस्ट्रक्शन कम्पनी के मालिक रीतेश ठाकुर की निगरानी कर रहा था ने बताया कि वह रीतेश ठाकुर के निकलने का इंतजार कर रहा है।
लगभग आधे घंटे बाद रीतेश ठाकुर एक ब्रीफकेस लेकर अपनी काली रंग की बी.एम.डब्लयू कार में बैठकर घर से निकला, हवलदार खुद हैरान होकर उसका पीछा करते हुए मंत्री जी के बंगले तक पहुंच गया, उसने तुरंत ही डरते हुए यह बात पुलिस हेडक्वार्टर में बताई, कुमार सर ने उसे रीतेश ठाकुर के घर तक पहुंचने तक नजर रखने और लगातार सूचना देते रहने को कहा।
आधे घंटे बाद ही रीतेश ठाकुर, मंत्री जी के यहां से निकलकर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मेश्राम जो कि उस इलाके का थाना इंचार्ज था के यहां पहुंचा, थाना इंचार्ज मेश्राम पर पहले भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके थे, उसकी छवि दागदार थी पुलिस विभाग की तरफ़ से उस पर कार्यवाही भी चल रही थी परन्तु हर बार वह सबूतों के अभाव व मंत्री जी के दबाव के आगे छोड़ दिया जाता। इसलिए कुमार सर ने जानबूझकर उसे इस ऑपरेशन की भनक भी नहीं लगने दी, और उसे दूसरे नाके की जिम्मेदारी देकर हेडक्वार्टर से दूर ही रखा था, इसलिए मेश्राम के इसमें शामिल होने पर किसी को आश्चर्य नहीं हुआ, अब मेश्राम का मोबाइल फोन भी पुलिस ने टेप करने को लगा दिया था। दस मिनट बाद वहां से रीतेश ठाकुर सीधा अपने घर जाकर सो गया।
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रात को ही मंत्री जी मेश्राम को फ़ोन करके बोलते है कि मेरे पांच सीमेंट के ट्रक सुबह चार से छह बजे के बीच तुम्हारे इलाके से निकलेंगे, उनको आराम से जाने देना, मेश्राम वफादार कुत्ते की तरह मंत्री जी को बोला जो हुकुम साहेब जी।
अब हेडक्वार्टर में बैठी एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम, इंस्पेक्टर विनोद, ए कुमार और स्वयं कमिश्नर आगे की कार्यवाही की योजना बनाते है, एक बड़ी पुलिस टीम, कमिश्नर सर के साथ एंटी करप्शन ब्यूरो की आधी टीम को लेकर चार गाड़ियों में मंत्री जी के घर को रवाना होती है उसके साथ ही दो जीप में अतिरिक्त पुलिस बल भी भेजा जाता है जो किसी अनहोनी की दशा में फौरन कार्यवाही करने में सक्षम था।
दो दो गाड़ियों में तीन टीमें जिसमें एंटी करप्शन ब्यूरो के चार चार अधिकारी, और पुलिस बल भी थे क्रमशः उस ठेकेदार, कसंट्रक्शन कंपनी के मालिक और थाना इंचार्ज मेश्राम में घर के पास पहुंच कर रात ठीक दो बजे एक साथ रेड की।
चूँकि पूरा मिशन पूर्णतः गोपनीय था और किसी को इस तरह की कार्यवाही कि भनक भी नहीं थी इसलिए मंत्री जी, रीतेश ठाकुर, मेश्राम और ठेकेदार उन विशेष स्याही मार्क नोटों के साथ ही रंगे हाथ पकड़ लिए गए थे।
मंत्री जी कमिश्नर सहित सभी को सस्पेंड करने कि धमकी दे रहे थे, तो ठेकेदार, थाना प्रभारी मेश्राम, और रीतेश ठाकुर उस टीम को मंत्री जी से शिकायत करने की धमकी दे रहे थे।
हालांकि एंटी करप्शन ब्यूरो के पास बरामद रुपए,और सभी आरोपियों की फोन डीटेल्स टेप थी फिर भी चूँकि मामला मंत्री जी से जुड़ा हुआ था, इसलिए वह चाह रहे थे कि इन चारों में से कोई सरकारी गवाह बन जाए तो उनका केस मजबूत हो जाएगा। इसके लिए अलग अलग कमरो में मेश्राम और ठेकेदार को सजा कम करने प्रलोभन दे कर पुलिस टीम प्रयास कर रही थी परन्तु मेश्राम और ठेकेदार मंजे हुए खिलाड़ी थे उन पर इन बातो का कोई असर नहीं पड़ रहा था, वह दोनों आश्वस्त थे कि मंत्री जी के होते हुए कोई भी उनपर हाथ नहीं डाल सकता था।
कोई बात न बनते देख कर कलेक्टर ए कुमार ने पूछताछ कर रही टीम को कहा कि आप ठेकेदार को पकड़कर उस कमरे के सामने से निकालो जिधर मंत्री जी को गिरफ्तार करके रखा था, और सीधा लाकर मेरे पास ले आओ।
ठेकेदार ने पहली बार मंत्री जी को इतनी दयनीय हालत में गिरफ्तार होते देखा था। इसके बाद जब उसे ए कुमार के पास लाया गया तो ए कुमार ने उसे कुर्सी पर बैठने को कहा और पूछा क्या लोगे चाय, पानी वगरैह ?
ठेकेदार ने अब तक कुमार सर को नहीं पहचाना था, पहचानता भी कैसे अभी तो कुमार सर सूट पेंट पहन कर बैठे हुए थे, उनके पास आया साधारण कुर्ते पैजामे वाला आदमी एक कलेक्टर हो सकता था यह उस ठेकेदार ने तो सपने में भी नहीं सोचा था, इसलिए उसने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था।
इसके बाद कुमार सर ने अपनी बैग खोल कर उस ठेकेदार के सामने ही उस बैग से अपना कुर्ता निकाला, और कुर्ते कि जेब से बीड़ी का बंडल और माचिस निकाल कर उस ठेकेदार को कहा, मुझे पता है कि तुम चाय नहीं बीड़ी पियोगे इसलिए मै यह कुर्ता यहां पर भी अपने साथ लेकर आया था। अब वह ठेकेदार हैरान परेशान होकर कुमार सर की ऑंखों में झांक कर समझने कि कोशिश कर रहा था कि जब यही आदमी मुझसे दो बार मिला था तो कितना अलग लग रहा था, पर आवाज़ तो वहीं है, ठेकेदार को सब याद आ गया कि किस तरह से वह अपनी होशियारी मारते हुए इन साहेब को सब कुछ आज सुबह ही बता चुका था।
ठेकेदार अब टूट चुका था, बोला साहेब जी सुबह तो आपको सबकुछ बता ही चुका हूं, इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं पता है, और यह सब मैंने आपको बताया जानने के बाद तो मंत्री जी मुझे जिंदा भी नहीं छोड़ेंगे।
इस पर कुमार ने उस ठेकेदार को कहा कि तुम तो देख ही चुके ही कि मंत्री जी अब हमारी कैद में है, उनके खिलाफ हमारे पास इतने सबूत है कि आराम से 10-15 साल तो मंत्री जी जेल में ही गुजरेंगे, कह कर उन्होंने उस ठेकेदार को उसकी कम्पनी के मालिक रीतेश ठाकुर और मंत्री जी के बीच हुई बात का टेप सुना दिया।
इससे ठेकेदार आश्वस्त हो गया कि मंत्री जी और उसकी कम्पनी का मालिक रीतेश ठाकुर तो अब लंबे से नपने वाले है, इनके जेल में रहने से उसकी नौकरी तो वैसे ही छूट जाएगी, यदि उसने मंत्री जी का साथ दिया तो वह भी उन सबके साथ 5-7 साल के लिए जेल चला जाएगा। ऐसे में उसके परिवार का क्या होगा।
ठेकेदार ने रोते हुए कुमार सर के पैर पकड़ लिए और बोला साहेब मै सरकारी गवाह बनने को तैयार हूं पर उसके लिए आपको मेरी सलामती का वादा करना होगा। मुझे और मेरे परिवार को मंत्री जी के आदमियों से जान का खतरा रहेगा। कुमार सर ने कमिश्नर से बात की तो कमिश्नर ने उसके लिए पुलिस सुरक्षा देने का वादा किया,इसके बाद उस ठेकेदार ने विस्तार से रीतेश ठाकुर और मंत्री जी के सारे काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा पुलिस को बताकर टेप करवाया, बयान पर सरकारी गवाह की हैसियत से दस्तखत किए।
अब उसे यही बात कमिश्नर सर से द्वारा बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कहना था
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कमिश्नर ने कुमार को बुलाकर कुछ विचार विमर्श किया और उसके बाद एक लेडी इंस्पेक्टर को कलेक्टर अनुराधा जो अभी अपने गेस्ट हाउस में सो रही थी, के पास भेजकर कहा कि आप आज सुबह 7 बजे ऑफिस आ जाइए, कमिश्नर सर ने अर्जेंट मीटिंग रखी है।
इस बीच इंस्पेक्टर विनोद ने सभी न्यूज मीडिया चेनल को फोन करके मंत्री जी को आज तड़के भ्रष्ट्राचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया है और कमिश्नर साहेब ने आज सुबह इसके लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी है।
अनुराधा ने उस लेडी इंस्पेक्टर के आने के बाद वक़्त देखा तो सुबह के 6.30 बज रहे थे, वह तैयार होकर नियत समय पर कमिश्नर सर के अस्थाई ऑफिस पहुंच गई, उसके मन में तरह तरह कि आशंका हो रही थी कि कहीं उससे कोई गलती तो नहीं हो गई, क्या शहर मै कोई अनहोनी हो गई ? फिर ऐसा क्या हुआ कि कमिश्नर सर ने उसे इतनी सुबह सुबह बुलाया है।
उसने उस कार्यालय में आकर देखा तो उसे वहां भारी चहल पहल दिखाई दी, कमिश्नर सर, कुमार सर इंस्पेक्टर विनोद, अन्य ऑफिस के लोग, कुछ उत्साही मीडिया भी अब पहुंचने लग गए थे।
कमिश्नर सर ने उसे और कुमार सर को एक रूम में बुलाया और कहा कि हमने आज आधी रात को मंत्री जी को भ्रष्ट्राचार के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार किया है, इसी बारे में सुबह सात बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, चूंकि कुमार अभी अस्थाई कलेक्टर है, और तुमने दो दिन पूर्व ही यह पद भार सम्हाल लिया है, तुम्हे मीडिया के सामने संक्षिप्त में इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी व श्रेय लेना है, वहां पर तुम्हारे बयान से पहले हम उस
ठेकेदार को मीडिया के सामने मंत्री जी की पूरी कुंडली खोलने को बोल देंगे, उसके बाद तुम्हें दो लाइन का बयान देना है कि अपने सीनियर्स के मार्गदर्शन, ईमानदार पुलिस और जोशीली एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम के तालमेल से हमने आज मंत्री जी को रंगे हाथ पकड़ा है, इसी तरह आगे भी हम बड़े से बड़े अपराधी को पकड़ने में नहीं हिचकिचाएंगे।
योजना के अनुसार ही ठीक साढ़े सात बजे सारे मीडिया चेनल ने ब्रेकिंग न्यूज के साथ उस अस्थाई कमिश्नर ऑफिस से लाइव कवरेज दिखाना शुरू कर दिया।
सबसे पहले कमिश्नर ने मीडिया के सामने कहा की इस कार्य को “अनुराधा जी जिन्होंने दो दिन पूर्व ही कलेक्टर पद जी जिम्मेदारी ली है” ने बहुत बुद्धिमानी और साहस का परिचय देते हुए पूर्ण किया है, उनसे उम्मीद करता हूं कि आगे भी को इसी तरह जिले में भ्रष्टाचार के विरोध में कठोर कार्यवाही करती रहेंगी ।
उसके बाद मीडिया के सामने ठेकेदार को प्रस्तुत किया गया। जिसने पूरे विस्तार से मंत्री जी के पिछले 10-12 वर्षो का कच्चा चिट्ठा खोल दिया, उसने यह भी बताया कि कैसे मंत्री जी की बात माने बिना टेंडर डालने पर मंत्री ही ने 5-6 ठेकेदारों का मर्डर करवा दिया था। अंत में अनुराधा ने कमिश्नर सर द्वारा निर्देशित बयान को “अपने सीनियर्स के मार्गदर्शन, ईमानदार पुलिस और जोशीली एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम के तालमेल से हमने आज मंत्री जी को रंगे हाथ पकड़ा है, इसी तरह आगे भी हम बड़े से बड़े अपराधी को पकड़ने में नहीं हिचकिचाएंगे। “ज्यों का त्यों सुना कर प्रेस कॉन्फ्रेंस ख़तम की, उसके लिए यह पहला अनुभव था।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के कारण राजनैतिक उठापटक मच गई, सत्तारुढ़ दल ने विपक्ष के सवालों से बचने के लिए आननफानन में मंत्री जी को मंत्री पद एवं उनकी पार्टी से 6 वर्ष के लिए निकाल दिया, मंत्री के द्वारा किए मर्डर के लिए सीबीआई जांच बैठा दी गई, जिससे मंत्री का बचा खुचा रसूख भी ख़तम हो गया था।
अनुराधा जिसने दो दिन पूर्व ही कलेक्टर पद ग्रहण किया था उसकी छवि अचानक शहर में “हीरो” जैसी हो गई थी, मुख्यमंत्री से लेकर मीडिया तक सभी उसके बुद्धिमानी एवम् साहस की जी खोल कर प्रशंसा कर रहे थे, हालाकि अनुराधा को कुमार सर के हिस्से में मिलनी वाली प्रशंसा का श्रेय स्वयं के लिए लेना अच्छा नहीं लगा था, परन्तु वह कमिश्नर सर के निर्णय को मानने को बाध्य थी उस निर्णय कुमार भी शामिल था ।
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कमिश्नर सर ने अपने वादे के मुताबिक ठेकेदार को सरकारी गवाह बनाकर उसकी सजा माफ़ करवा दी, और उसके परिवार को कड़ी सुरक्षा मुहैया करा दी।
इधर एंटी करप्शन ब्यूरो एवम् सीबीआई ने अदालत में मंत्री जी के खिलाफ इतने पुख्ता सबूत इकट्ठा कर दिए कि बड़े से बड़ा वकील भी पूरी सुनवाई के दौरान एक बार भी मंत्री जी को जमानत पर रिहा नहीं करा पाया ..
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कुटील चाल (भाग-8) – अविनाश स आठल्ये : Moral stories in hindi
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अविनाश स आठल्ये
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